विधानसभा विशेष सत्र में लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद का तीखा प्रहार,, अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पर बोले शहजाद — “जिस समुदाय के लिए कानून बना, उसी की आवाज़ को दरकिनार क्यों?”,, सरकार से सीधे सवाल — “कब तक भेदभाव की राजनीति चलेगी, सबको समान अवसर कब मिलेगा?”
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र 2025-26 में लक्सर विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहम्मद शहजाद ने सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समुदाय विशेष (मुस्लिम समाज) के लिए यह विधेयक बनाया गया, उसी समुदाय के जनप्रतिनिधियों को नीति निर्धारण से दूर रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र के मूल भाव के खिलाफ है। विधायक शहजाद ने कहा— “सरकार को चाहिए था कि इस विधेयक के निर्माण में मुस्लिम जनप्रतिनिधियों को शामिल करती, ताकि जमीनी सच्चाई और समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझा जा सके। लेकिन अफसोस, जिनके हित की बात की जा रही है, उनकी आवाज़ ही नदारद रही।”
इन्तजार रजा हरिद्वार -विधानसभा विशेष सत्र में लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद का तीखा प्रहार,,
अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पर बोले शहजाद — “जिस समुदाय के लिए कानून बना, उसी की आवाज़ को दरकिनार क्यों?”,,
सरकार से सीधे सवाल — “कब तक भेदभाव की राजनीति चलेगी, सबको समान अवसर कब मिलेगा?”

विधायक शहजाद ने कहा— “सरकार को चाहिए था कि इस विधेयक के निर्माण में मुस्लिम जनप्रतिनिधियों को शामिल करती, ताकि जमीनी सच्चाई और समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझा जा सके। लेकिन अफसोस, जिनके हित की बात की जा रही है, उनकी आवाज़ ही नदारद रही।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली से यह संदेश जा रहा है कि निर्णय “ऊपर से थोपा गया कानून” बनकर रह गया है, जिसका वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचेगा।
सरकार से सीधे सवाल — “कब तक चलेगी भेदभाव की राजनीति?”
सदन में खड़े होकर विधायक शहजाद ने एक के बाद एक सरकार से कई तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा—
👉 “क्यों आज भी पहाड़ के लोग मैदानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं?”
👉 “क्यों मैदानों में रहने वाले लोगों को अब भी उनका उचित अधिकार नहीं मिल रहा?”
उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर विकास के नाम पर जो योजनाएं बनाई जाती हैं, वे सिर्फ कागज़ों और भाषणों तक ही क्यों सीमित रह जाती हैं? “क्या विकास सिर्फ पोस्टरों और बयानों में दिखाने की चीज़ बन गया है? ज़मीनी सच्चाई यह है कि उत्तराखंड आज भी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा है। मैदान और पहाड़ दोनों ही उपेक्षा के शिकार हैं,” — विधायक शहजाद ने कहा।
अल्पसंख्यकों की ज़मीन और धार्मिक स्थलों पर सवाल — “9000 एकड़ भूमि का हिसाब दे सरकार”
विधायक मोहम्मद शहजाद ने अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक स्थलों पर हो रही सरकारी कार्रवाइयों को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि “अतिक्रमण के नाम पर मस्जिदों, कब्रिस्तानों और धार्मिक स्थलों को तोड़ा जा रहा है, लेकिन जिन 9000 एकड़ भूमि को सरकार ने इस कार्रवाई से एकत्र किया है, उसका क्या हो रहा है?”उन्होंने मांग की कि इस भूमि को प्रदेश के भूमिहीन नागरिकों को बिना किसी धार्मिक भेदभाव के पट्टे के रूप में दिया जाए, ताकि हर समुदाय को समान अवसर और न्याय मिल सके। उन्होंने कहा— “धर्म के नाम पर भेदभाव न करें, प्रदेश की हर जनता को समान हक मिलना चाहिए।”
शिक्षा बनी व्यापार — आम आदमी की पहुँच से दूर हो रही उच्च शिक्षा
विधायक शहजाद ने शिक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में शिक्षा व्यापार बन चुकी है, गरीब परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा से दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा — “सरकारी कॉलेजों में संसाधनों की कमी है, फीस बढ़ती जा रही है, जबकि निजी संस्थान मुनाफाखोरी में लगे हैं। सरकार को चाहिए कि शिक्षा को व्यापार से बाहर निकाल कर आम लोगों की पहुंच तक ले जाए।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह हाल रहा, तो प्रदेश का युवा वर्ग रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाएगा, जिससे पलायन और बढ़ेगा।
लक्सर की बेटी भूमिका का मुद्दा उठा — “सरकार सम्मान दे, मदद करे”
सत्र के दौरान विधायक शहजाद ने अपने क्षेत्र लक्सर की ग्राम निरंजनपुर की बेटी भूमिका का उदाहरण देते हुए सरकार पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा— “भूमिका ने कबड्डी खेल में देश-विदेश में लक्सर का नाम रोशन किया, लेकिन अफसोस आज तक सरकार ने उसे किसी आर्थिक सहायता या सम्मान से नहीं नवाज़ा। जब दूसरे राज्यों की बेटियों को पुरस्कृत किया जाता है, तो उत्तराखंड की बेटी की अनदेखी क्यों?”उन्होंने सरकार से मांग की कि भूमिका जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तुरंत आर्थिक सहायता और राज्य स्तर का सम्मान दिया जाए।
हरिद्वार के बच्चों में प्रतिभा, लेकिन ‘मूल निवास’ बन गया बाधा
हरिद्वार जिले से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए विधायक शहजाद ने कहा कि यहां के बच्चों में टैलेंट की कोई कमी नहीं, लेकिन पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में “मूल निवास” की अड़चन उनकी राह में रोड़ा बन रही है।
उन्होंने कहा — “हरिद्वार के बच्चे मेहनती हैं, लेकिन उन्हें बार-बार निवास संबंधी औपचारिकताओं के कारण परीक्षाओं में अवसर नहीं मिल पा रहा। सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।”
“सरकार सुनना नहीं चाहती सच्चाई” — शहजाद का तीखा तंज
विधायक शहजाद ने कहा कि मौजूदा सरकार जनता की आवाज़ सुनने के बजाय “अपनी वाहवाही” में व्यस्त है।
उन्होंने कहा — “आज सदन में सच्चाई बोलना जैसे अपराध बन गया है। लेकिन मैं जनता की आवाज़ उठाने से पीछे नहीं हटूंगा।” उन्होंने साफ कहा कि “उत्तराखंड के विकास की राह तब तक नहीं खुलेगी, जब तक सरकार हर वर्ग, हर समुदाय, हर क्षेत्र के प्रतिनिधियों को समान रूप से नीति निर्धारण में शामिल नहीं करेगी।”
“समान अवसर, समान भागीदारी ही असली विकास”
लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद का यह वक्तव्य सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि प्रदेश के हाशिए पर खड़े तबकों की आवाज़ है।
उन्होंने कहा — “विकास का अर्थ तभी पूरा होगा जब किसी भी समाज या समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। सरकार को धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर समान अवसर और समान भागीदारी की दिशा में काम करना चाहिए।” सत्र में उनकी बातों को विपक्षी दलों के कई सदस्यों ने भी समर्थन दिया और कहा कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।“अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक में मुस्लिम जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ज़रूरी थी। विकास का अर्थ सबके लिए समान अवसर और न्याय है — यही लक्सर विधायक मोहम्मद शहजाद का स्पष्ट संदेश रहा।”



