ऊर्जा दक्ष भवनों की दिशा में उत्तराखंड का बड़ा कदम,, ECSBC-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यभर में प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान,, UREDA–BEE के सहयोग से देहरादून में दो दिवसीय टाइप-बी प्रशिक्षण सफल

इन्तजार रजा हरिद्वार- ऊर्जा दक्ष भवनों की दिशा में उत्तराखंड का बड़ा कदम,,
ECSBC-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यभर में प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान,,
UREDA–BEE के सहयोग से देहरादून में दो दिवसीय टाइप-बी प्रशिक्षण सफल
देहरादून।
ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास की दिशा में उत्तराखंड सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (UREDA) द्वारा ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE), भारत सरकार के सहयोग से ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता (ECSBC-2024) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यभर में व्यापक जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। यह संपूर्ण पहल श्री मेहरबान सिंह बिष्ट, निदेशक, UREDA के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश स्तर पर लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड को ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण में अग्रणी बनाना है।
इसी कड़ी में ‘इंटीग्रेटिव बिल्डिंग डिजाइन, ऊर्जा एवं डे-लाइट सिमुलेशन’ विषय पर आधारित दो दिवसीय टाइप-बी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 19 एवं 20 जनवरी 2026 को होटल ग्रैंड लेगेसी बीकन, सहारनपुर रोड, सेवला कलां, माजरा, देहरादून में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न भवन निर्माण से जुड़े शासकीय विभागों के अभियंता, वास्तुविद, नगरीय निकायों के अधिकारी, निजी क्षेत्र के इंजीनियर, आर्किटेक्ट और भवन डिजाइन से जुड़े अन्य पेशेवरों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
ECSBC-2024 के प्रावधानों पर मिला गहन तकनीकी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ECSBC-C (वाणिज्यिक भवन) एवं ECSBC-R (आवासीय भवन) के प्रावधानों, उनके अनुपालन की प्रक्रिया, ऊर्जा दक्ष भवन डिजाइन, डे-लाइट सिमुलेशन तकनीक और एकीकृत भवन डिजाइन (Integrative Building Design) के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि भवन की प्रारंभिक डिजाइन अवस्था से ही ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखने से दीर्घकालिक ऊर्जा बचत संभव हो पाती है।
प्रशिक्षण में यह भी समझाया गया कि किस प्रकार भवनों में प्राकृतिक प्रकाश (डे-लाइट) का अधिकतम उपयोग, बेहतर इंसुलेशन, उन्नत निर्माण सामग्री और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के प्रयोग से भवनों की कुल ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों और सिमुलेशन के माध्यम से यह भी बताया गया कि ECSBC के अनुरूप भवन डिजाइन करने से भवन की कार्यक्षमता और उपयोगकर्ता सुविधा दोनों में वृद्धि होती है।
अब तक 7 प्रशिक्षण, आगे भी जारी रहेगा अभियान
उल्लेखनीय है कि BEE, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024 में प्रकाशित ECSBC-2024 को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से UREDA द्वारा अब तक प्रदेश में कुल 7 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों और निजी क्षेत्र से जुड़े अभियंताओं एवं वास्तुविदों को ऊर्जा दक्ष एवं सतत भवन निर्माण के प्रति जागरूक किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान यह जानकारी भी साझा की गई कि UREDA और BEE के संयुक्त सहयोग से राज्य स्तरीय पार्क में एक Super ECBC Demonstration Building के निर्माण का प्रस्ताव है। यह भवन उत्तराखंड में ऊर्जा दक्ष और सतत भवन निर्माण का एक मॉडल (Demonstration Project) के रूप में विकसित किया जाएगा। भविष्य में यह भवन प्रदेश के अभियंताओं, वास्तुविदों और भवन निर्माण से जुड़े पेशेवरों के लिए Live Demonstration के रूप में कार्य करेगा, जिससे ECSBC-2024 के प्रावधानों को व्यवहारिक रूप में समझना आसान होगा।
30–40 प्रतिशत तक ऊर्जा बचत संभव
कार्यक्रम में दिल्ली से आमंत्रित BEE प्रमाणित मास्टर ट्रेनर मो. आंबू तल्हा फारूखी एवं BEE प्रमाणित मास्टर ट्रेनर मरियम जाकिया ने तकनीकी सत्रों के दौरान बताया कि ECSBC-2024 को अपनाने से भवनों की ऊर्जा खपत में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत संभव है। इससे न केवल भवन स्वामियों की ऊर्जा लागत में कमी आएगी, बल्कि राज्य में विद्युत मांग और आपूर्ति के अंतर को कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकेगी।
निदेशक UREDA के मार्गदर्शन में यह स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी जिला एवं प्रदेश स्तर पर ECSBC-2024 आधारित प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि उत्तराखंड को ऊर्जा दक्ष एवं सतत भवन निर्माण की दिशा में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
इन विभागों के अधिकारियों ने की सहभागिता
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में UREDA के श्री मनोज कुमार (मुख्य परियोजना अधिकारी), श्री रॉकी कुमार (उप-मुख्य परियोजना अधिकारी) के साथ-साथ PWD, UJVNL, PTCUL, RWD, UUSDA, GMVN, MI, MDDA, BRIDCUL, BSNL, SIDCUL, UHDA, TCPA और नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे भवन निर्माण क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया।
कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल तकनीकी ज्ञान बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि उत्तराखंड को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और सतत विकास की राह पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार भी साबित हुआ।



