ग्राम पंचायत गढ़ में जीपीडीपी की बैठक सम्पन्न — ग्रामीणों का विकास पर हल्ला बोल,, केंद्र की किस्तें अटकीं, ग्राम सचिव की मौजूदगी अन्य अधिकारी नदारद — अंधेरे में चली पंचायत बैठक ने उजागर की जमीनी हकीकत,, प्रधान बोले — “जब पैसा नहीं आया तो काम कहां से कराऊं”, सचिव ने रखी पूरी वित्तीय स्थिति, ग्रामीण बोले — “पैसे की देरी ही विकास की देरी”,, “दो साल से नहीं बना पशुबाड़ा ऑफिस-ऑफिस खेल रही है फाइल,,.. ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार — “गांव में जनता दरबार लगाकर सुनें हमारी फरियाद”

इन्तजार रजा हरिद्वार- ग्राम पंचायत गढ़ में जीपीडीपी की बैठक सम्पन्न — ग्रामीणों का विकास पर हल्ला बोल,,
केंद्र की किस्तें अटकीं, ग्राम सचिव की मौजूदगी अन्य अधिकारी नदारद — अंधेरे में चली पंचायत बैठक ने उजागर की जमीनी हकीकत,,
प्रधान बोले — “जब पैसा नहीं आया तो काम कहां से कराऊं”, सचिव ने रखी पूरी वित्तीय स्थिति, ग्रामीण बोले — “पैसे की देरी ही विकास की देरी”,,
🐄 “दो साल से नहीं बना पशुबाड़ा ऑफिस-ऑफिस खेल रही है फाइल,,..
ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार — “गांव में जनता दरबार लगाकर सुनें हमारी फरियाद”

हरिद्वार, 29 अक्टूबर।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत गढ़ में ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की बैठक आयोजित की गई। पंचायत भवन सभागार में ग्राम प्रधान जावेद हसन की अध्यक्षता और ग्राम पंचायत सचिव कुलदीप चौहान की उपस्थिति में यह बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में ग्राम पंचायत सदस्य, महिला मंगल दल, युवा प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लेकिन यह बैठक विकास के बजाय जन आक्रोश का मंच बन गई — ग्रामीणों ने पंचायत पर ठप पड़े कार्यों, अधूरी योजनाओं और नदारद अधिकारियों को लेकर जमकर सवाल खड़े किए।
💬 केंद्र की किस्तें लंबित, विकास कार्य ठप
बैठक में पंचायत सचिव कुलदीप चौहान ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024–25 व 2025–26 के लिए केंद्र सरकार की किस्तें अभी तक पंचायत को प्राप्त नहीं हुई हैं, जिसके चलते अधिकांश कार्य अधूरे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य वित्त आयोग से मात्र 15 लाख 73 हजार रुपये की राशि मिली है, जिसके अंतर्गत सिर्फ छह कार्य पूरे कराए जा सके हैं।
सचिव ने स्पष्ट किया कि 2025–26 की कार्ययोजना में कुल 68 कार्य प्रस्तावित थे, लेकिन बजट न मिलने के कारण अधिकांश अधूरे हैं।
प्रधान जावेद हसन ने कहा —
“जब पैसा ही नहीं आया तो मैं कार्य कहां से कराऊं? राज्य से जो राशि आई, उसी से सीमित कार्य पूरे किए हैं। अब केंद्र की किस्तें जारी होने का इंतजार है।”
इस बयान के बाद ग्रामीणों ने केंद्र व राज्य सरकार से बजट शीघ्र जारी करने की मांग की, ताकि गांव में विकास कार्य आगे बढ़ सकें।
🏠 अंधेरे में चली बैठक, बिजली न होने पर ग्रामीणों का रोष
ग्राम पंचायत गढ़ में आयोजित यह बैठक अपने आप में विडंबना साबित हुई। पंचायत भवन में बिजली की सुविधा नहीं थी, बैठक अंधेरे में चली और पंखे हवा में झूलते शोपीस बने रहे। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा —“जिस भवन में रोशनी नहीं, वहां विकास की उम्मीद कैसे करें?”
👥 अधिकारी नदारद, सचिव अकेले बने सुनने वाले
जिलाधिकारी के आदेशानुसार इस खुली बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों को उपस्थित रहना था, ताकि जनता की शिकायतें सुनी जा सकें।
लेकिन पंचायत सचिव के अलावा कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इस पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया —“अगर अधिकारी नहीं आएंगे तो हमारी फरियाद कौन सुनेगा?”ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान से भी सवाल किया कि अन्य विभागों के अधिकारियों को उपस्थित कराने के लिए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर दबाव क्यों नहीं बनाया।
सचिव चौहान ने स्थिति संभालते हुए कहा कि अनुपस्थित अधिकारियों की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
🚰 जल जीवन मिशन के कार्यों पर उठे सवाल — 🚰 जल जीवन मिशन पर गुस्सा “एनओसी मत दीजिए ठेकेदारों को”
💬 “जब पैसा नहीं आया तो काम कैसे होगा?” — प्रधान का जवाब, ग्रामीणों का सवाल
बैठक में पंचायत सचिव कुलदीप चौहान ने गांव की वित्तीय स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024–25 और 2025–26 के लिए केंद्र सरकार की किसी भी किस्त का भुगतान अब तक नहीं हुआ है, जबकि राज्य वित्त आयोग से मात्र 15 लाख 73 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा —
“इतनी सीमित धनराशि में पूरे गांव के लिए केवल छह छोटे कार्य ही कराए जा सके हैं। 2025–26 की कार्ययोजना में 68 विकास कार्यों का प्रस्ताव था, लेकिन बजट न मिलने के कारण बाकी कार्य अधूरे हैं।”
ग्राम के सनव्वर उर्फ पप्पू नामक पशुपालक ने खुली बैठक में अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा —“मैं दो साल से पशुबाड़ा निर्माण की अर्जी दे रहा हूं। अधिकारी आते हैं, फोटो खींचकर चले जाते हैं। न कोई मंजूरी मिली, न बाड़ा बना। मेरी फाइल सिर्फ दफ्तरों के चक्कर काट रही है।” उनकी बात सुनकर कई ग्रामीणों ने समर्थन किया और पशुपालन विभाग से लंबित फाइलों पर जल्द कार्यवाही की मांग की।
प्रधान जावेद हसन ने कहा —
“जब पैसा नहीं आया तो मैं काम कहां से कराऊं? केंद्र की किस्तें अटकी पड़ी हैं, राज्य से जो आया उसी में सीमित कार्य हुए हैं। लोगों का गुस्सा जायज़ है, लेकिन सच्चाई यह है कि बजट के बिना पंचायत असहाय है।”
ग्रामीणों ने भी कहा कि “15 लाख का बजट दो किलोमीटर फैले इतने बड़े गांव के लिए मुंह में जीरे के बराबर है”।
🏠 बिजलीहीन पंचायत भवन — अंधेरे में चली विकास चर्चा
विकास पर चर्चा तो हुई, मगर विकास का प्रतीक “बिजली” ही गायब थी। पंचायत भवन में बिजली न होने से पूरी बैठक अंधेरे में चली। ग्रामीणों ने कटाक्ष करते हुए कहा —“जिस भवन में अंधेरा है, वहां विकास की रोशनी कैसे आएगी?” छत पर झूलते पंखे, टूटी वायरिंग और नॉन-वर्किंग लाइट्स देखकर लोग आक्रोशित हो उठे। सचिव चौहान ने कहा कि बिजली कनेक्शन की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है, स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू होगा।
👥 अधिकारी नदारद — जवाबदेही का मज़ाक
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार इस खुली बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों — ग्राम विकास अधिकारी, मनरेगा प्रभारी, जल संस्थान, पशुपालन व कृषि विभाग — को मौजूद रहना था, ताकि लोग सीधे अपनी शिकायत रख सकें।लेकिन बैठक में केवल ग्राम पंचायत सचिव ही पहुंचे, अन्य सभी विभागीय अधिकारी नदारद रहे।
ग्रामीणों ने नाराजगी जताई —
“अगर अधिकारी नहीं आएंगे तो जनता सवाल किससे करे? सिर्फ सचिव क्या अकेले पूरे गांव की समस्याओं का जवाब देंगे?”
ग्रामीणों ने मांग की कि अगली बैठक में जिलास्तर के अधिकारी स्वयं मौजूद रहें, ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
📊 26–27 के लिए नई कार्ययोजना — “कागज़ पर नहीं, जमीन पर दिखे असर”
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नई ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार की गई।
इसमें प्राथमिक विद्यालयों के रखरखाव, सड़क मरम्मत, नालियों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण और महिला स्वयं सहायता समूहों को मज़बूत करने के प्रस्ताव पारित किए गए।
सचिव ने बताया कि कार्ययोजना जिलास्तर पर भेजी जाएगी ताकि आगामी वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के साथ कार्यों का क्रियान्वयन हो सके।
📢 ग्राम सचिव कुलदीप चौहान ने कि UCC पोर्टल पर विवाह पंजीकरण की अपील
बैठक के अंत में ग्राम सचिव कुलदीप चौहान ने ग्रामीणों को UCC (Uniform Civil Code) पोर्टल पर विवाह रजिस्ट्रेशन की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अब विवाह पंजीकरण अनिवार्य है, जिससे भविष्य में कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
“हर व्यक्ति अपने विवाह का पंजीकरण UCC पोर्टल पर अवश्य कराए। इससे समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।”
📣 ग्रामीणों की बड़ी मांग — “डीएम गांव में लगाएं जनता दरबार”
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम पंचायत गढ़ जैसे बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र में दशकों से कोई जिलास्तरीय जनता दरबार नहीं लगा।
ग्रामीणों ने कहा —

“हम हर दिन सुनते हैं कि डीएम साहब फलां गांव में जनता दरबार लगाकर शिकायतें सुन रहे हैं, लेकिन हमारी पंचायत में कभी नहीं आए। अगर वे यहां आएं तो उन्हें पता चलेगा कि कितनी मूलभूत समस्याएं हैं।”
ग्रामवासियों ने डीएम मयूर दीक्षित से आग्रह किया कि वे जल्द ग्राम पंचायत गढ़ का दौरा करें, गांव की सड़कों, पेयजल व्यवस्था और अधूरे कार्यों का सर्वे करें तथा ग्राम स्तर पर जनता दरबार आयोजित करें, ताकि ग्रामीण सीधे अपनी समस्याएं रख सकें।
🔍 विकास तभी होगा जब जिम्मेदार जवाब देंगे और जिम्मेदारी तय होगी”
ग्राम पंचायत गढ़ की खुली बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि गांव के विकास में सबसे बड़ी बाधा बजट की देरी और अफसरों की गैर-जवाबदेही है। केंद्र की किस्तें लंबित हैं, राज्य की रकम सीमित है, और अधिकारियों की उपस्थिति नदारद — ऐसे में ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्य सीमित साधनों से संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने साफ कहा —
“हम वादे नहीं, जवाब चाहते हैं। जब अफसर नहीं आएंगे और पैसा नहीं मिलेगा, तो विकास कैसे होगा?”
अंधेरे में चली यह बैठक प्रतीक बन गई उस हकीकत की, जिसमें गांवों के सपने बिजली की तरह अधूरे तारों में झूल रहे हैं। अब गांव की जनता का एक ही संदेश है —
“हमें फाइलों में नहीं, जमीन पर विकास चाहिए।”



