उत्तराखंड में शराब के दाम नहीं बढ़ेंगे,, सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, 28 नवंबर का नोटिफिकेशन स्थगित,, डिस्टलरी की याचिका पर खंडपीठ का अहम आदेश
उत्तराखंड में शराब के दाम बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट की इस रोक के बाद प्रदेश में शराब के रेट यथावत बने रहेंगे। न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सरकार द्वारा 28 नवंबर 2025 को जारी किए गए नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह अहम आदेश पारित किया

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड में शराब के दाम नहीं बढ़ेंगे,,
सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, 28 नवंबर का नोटिफिकेशन स्थगित,,
डिस्टलरी की याचिका पर खंडपीठ का अहम आदेश

नैनीताल | 16 दिसम्बर 2025
उत्तराखंड में शराब के दाम बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट की इस रोक के बाद प्रदेश में शराब के रेट यथावत बने रहेंगे। न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सरकार द्वारा 28 नवंबर 2025 को जारी किए गए नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगाते हुए यह अहम आदेश पारित किया है।
यह मामला उत्तराखंड की प्रमुख शराब निर्माता डिस्टलरी मैसर्स इंडियन ग्लाइकोल्स लिमिटेड की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभित सहारिया ने न्यायालय में दलील दी कि राज्य सरकार ने आबकारी सत्र (Excise Year) के बीच अचानक शराब के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया, जो नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार इस तरह के बदलाव नोटिफिकेशन के माध्यम से नहीं कर सकती।
अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर को नोटिफिकेशन जारी कर शराब की कीमतों में वृद्धि का फैसला लिया था। जबकि आबकारी नीति और उससे संबंधित नियमावली में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर ही किया जा सकता है। इसके लिए नियमावली में संशोधन, मसौदा तैयार करने और आपत्तियां आमंत्रित करने जैसी विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, जिसे सरकार ने नजरअंदाज किया।
याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि आबकारी सत्र के मध्य में शराब के दाम बढ़ाना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे डिस्टलरी और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। अचानक मूल्य वृद्धि से पहले से किए गए अनुबंध और बाजार संतुलन प्रभावित होता है, जो कानूनन उचित नहीं है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रदेश सरकार को शराब के दाम तय करने और उनमें संशोधन करने का अधिकार है। सरकार ने यह भी कहा कि राजस्व हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था। हालांकि, खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलीलों को अधिक वजनदार मानते हुए सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल उत्तराखंड में शराब की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। इस फैसले को शराब उद्योग से जुड़े कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह आदेश राज्य सरकार के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि नीतिगत फैसलों में विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
मामले की अगली सुनवाई में अब सरकार को अपने निर्णय को कानूनी रूप से सही ठहराना होगा। तब तक 28 नवंबर 2025 को जारी नोटिफिकेशन प्रभावी नहीं रहेगा और प्रदेश में शराब के पुराने रेट ही लागू रहेंगे।



