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गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग तेज,, उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दायर की याचिका

उत्तराखंड में गो संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार भदोरिया, अधिवक्ता कमल भदोरिया, अधिवक्ता चेतन भदोरिया (LLB अध्ययनरत), श्रीमती सुमेधा भदोरिया पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह व बाल संत स्वामी हेमानंद जी सरस्वती ने राज्य मानवाधिकार आयोग, उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित याचिका दायर की है।इस याचिका में गौ माता को “राष्ट्रीय माता” घोषित किए जाने, उत्तराखंड राज्य में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराने तथा गो-हत्या करने वाले अपराधियों को फांसी की सजा का कठोरतम प्रावधान सुनिश्चित करने की माँग की गई है। 🐄 गौ माता के सम्मान और सनातन संस्कृति की विरासत

इन्तजार रजा हरिद्वार ✍️गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग तेज,,

उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दायर की याचिका

देहरादून/हरिद्वार:

उत्तराखंड में गो संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार भदोरिया, अधिवक्ता कमल भदोरिया, अधिवक्ता चेतन भदोरिया (LLB अध्ययनरत), श्रीमती सुमेधा भदोरिया पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह व बाल संत स्वामी हेमानंद जी सरस्वती ने राज्य मानवाधिकार आयोग, उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित याचिका दायर की है।इस याचिका में गौ माता को “राष्ट्रीय माता” घोषित किए जाने, उत्तराखंड राज्य में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराने तथा गो-हत्या करने वाले अपराधियों को फांसी की सजा का कठोरतम प्रावधान सुनिश्चित करने की माँग की गई है।

🐄 गौ माता के सम्मान और सनातन संस्कृति की विरासत

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भारत में गौ माता को हजारों वर्षों से धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्य के रूप में पूजा जाता है। इसलिए गौ-रक्षा सिर्फ भावनाओं का विषय नहीं, बल्कि देश की आस्था, कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़ी है।

याचिकाकर्ताओं ने आयोग के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया कि—

“जिस राष्ट्र ने गौ-हत्या पर सम्पूर्ण प्रतिबंध लगाए, इतिहास गवाह है कि वहाँ शासन लंबे काल तक स्थिर और समृद्ध रहा है। यह केवल धार्मिक आदेश नहीं, बल्कि राष्ट्र व मानवता के हित से जुड़ा हुआ निर्णय है।”

❌ गौवंश-हत्या पर पूर्ण रोक और आरोपियों को फांसी की सजा की माँग

याचिका में स्पष्ट लिखा गया है कि—

  • उत्तराखंड सहित देश भर में गो-हत्या पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए
  • गो-हत्या में दोषी पाए जाने वालों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा दी जाए
  • गोवंश की तस्करी, कटान व कालाबाजारी करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य हो

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि मौजूदा कानून कई बार अपराधियों के लिए पर्याप्त निवारक प्रभाव नहीं छोड़ पाता, जिससे गो-हत्या व तस्करी का क्रम थम नहीं रहा है।

📌 प्रत्येक तहसील में गौ ब्रह्मलीन प्रक्रिया हेतु विभाग बनाने की माँग

याचिका का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि—

  • प्रत्येक जिले की हर तहसील में एक अलग विभाग बनाया जाए
  • यह विभाग ब्रह्मलीन (मृत) गौ माता के सम्मानजनक दफ़न/अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे
  • वेतनभोगी कर्मचारी नियुक्त किए जाएं ताकि किसी भी गौवंश को अपमानजनक अथवा अस्वच्छ परिस्थितियों में सड़कों, नालों, कूड़े या जंगलों में न छोड़ा जाए, दायर याचिका में कहा गया है कि यह मानव और पशु दोनों के मानवाधिकार व पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हुई आवश्यकता है।

🌎 आर्थिक, पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टिकोण से अहम पहल

पिटीशनर्स के अनुसार, गौवंश:

  • कृषि में पारंपरिक ऊर्जा का प्रमुख स्रोत रहा है
  • जैविक खाद, दवा, और गाँव आधारित अर्थव्यवस्था का आधार है
  • धार्मिक मान्यताओं से सीधे जुड़ा है

इसलिए गो-रक्षा न केवल धार्मिक विश्वास की रक्षा है, बल्कि सतत विकास और ग्रामीण भारत की रीढ़ को भी मजबूत बनाती है।

🙏 बाल संत स्वामी हेमानंद जी सरस्वती का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन

बाल संत स्वामी हेमानंद जी सरस्वती ने इस याचिका को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि—

“गौ माता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देना हमारे राष्ट्र धर्म का पालन है। गौ-रक्षा में ही भारत की रक्षा निहित है।
राज्य और राष्ट्र को इस दिशा में प्रामाणिक निर्णय लेना ही होगा।”

📑 मानवाधिकार आयोग करेगा सुनवाई

याचिका दायर होने के बाद आयोग ने इसे स्वीकार कर सुनवाई प्रक्रिया में शामिल किया है।जल्द ही इस संबंध में आयोग की ओर से उत्तराखंड शासन से रिपोर्ट और उत्तर मांगा जा सकता है।याचिकाकर्ताओं को उम्मीद है कि राज्य और केंद्र सरकार इस मामले में गंभीर व सकारात्मक निर्णय लेंगी।

उत्तराखंड में गौ-रक्षा को लेकर यह याचिका न सिर्फ धार्मिक भावना, बल्कि मानवाधिकार, संस्कृति संरक्षण और कानून व्यवस्था के स्तर पर एक बड़ी बहस का विषय बन गई है। अब देखना यह होगा कि आयोग व सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्या निर्णय लेती हैं और गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित किए जाने की माँग भविष्य में किस रूप में आगे बढ़ती है।

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