सर्वेक्षण में नई तकनीकी क्रांति उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय में CORS विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित सटीक मानचित्रण और भू-आकंलन के लिए अधिकारियों को दी गई आधुनिक तकनीक की जानकारी🔹तकनीकी नवाचार से भू-सर्वेक्षण को मिलेगी नई गति
सर्वेक्षण एवं मानचित्रण के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने और Continuous Operating Reference Station (CORS) प्रणाली के प्रयोग को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 30 अक्टूबर 2025 को हाथीबड़कला, न्यू कैंट रोड स्थित निदेशालय प्रांगण में किया गया।

इन्तजार रजा हरिद्वार🔹सर्वेक्षण में नई तकनीकी क्रांति🔹
उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय में CORS विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित
सटीक मानचित्रण और भू-आकंलन के लिए अधिकारियों को दी गई आधुनिक तकनीक की जानकारी🔹तकनीकी नवाचार से भू-सर्वेक्षण को मिलेगी नई गति
हरिद्वार/देहरादून।
सर्वेक्षण एवं मानचित्रण के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देने और Continuous Operating Reference Station (CORS) प्रणाली के प्रयोग को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 30 अक्टूबर 2025 को हाथीबड़कला, न्यू कैंट रोड स्थित निदेशालय प्रांगण में किया गया।
इस कार्यशाला में Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Indian Institute of Soil & Water Conservation, BSNL, BRIDCUL, ONGC, CPWD, RWD, PWD और Survey of India जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अधिकारी व तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सर्वेक्षण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी संसाधनों के प्रयोग को बढ़ावा देना और फील्ड लेवल पर कार्यरत इंजीनियरों, सर्वेयरों व तकनीकी कर्मचारियों को नवीनतम तकनीक से अवगत कराना था।
CORS तकनीक से सर्वेक्षण होगा अधिक सटीक व त्वरित
कार्यशाला के मुख्य वक्ता श्री हरीश हेमदान, अधिकारी सर्वेक्षक, उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय ने CORS तकनीक के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Continuous Operating Reference Station (CORS) एक ऐसी उन्नत प्रणाली है जो रियल-टाइम में उपग्रह आधारित डाटा के माध्यम से अत्यंत सटीक लोकेशन निर्धारण की सुविधा देती है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्वेक्षण विधियों में जहां कई बार त्रुटियों की संभावना रहती थी, वहीं CORS सिस्टम इन कमियों को समाप्त करता है। इससे न केवल सर्वेक्षण की गति कई गुना तेज होती है, बल्कि मैपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास परियोजनाओं में भी सटीकता आती है।
“भविष्य के हर सर्वेक्षण कार्य में CORS की भूमिका निर्णायक होगी। यह प्रणाली न केवल इंजीनियरिंग व निर्माण कार्यों में उपयोगी है, बल्कि कृषि, वन, पर्यावरण और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी उपयोगिता रखती है।” — हरीश हेमदान
विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। PWD, RWD और BRIDCUL के इंजीनियरों ने बताया कि निर्माण कार्यों में सटीक मैपिंग और प्लॉटिंग के लिए अब CORS प्रणाली का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। वहीं Survey of India के विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रणाली से देशभर के सर्वेक्षण कार्यों में एक समानता और विश्वसनीयता लाई जा सकती है।
Indian Institute of Soil & Water Conservation के अधिकारियों ने कहा कि इस तकनीक के माध्यम से मिट्टी संरक्षण और जल स्रोतों के अध्ययन में अधिक सटीक डेटा उपलब्ध होता है। वहीं ONGC और BSNL के प्रतिनिधियों ने बताया कि तेल, गैस और दूरसंचार परियोजनाओं में भी CORS की मदद से स्थान निर्धारण का कार्य अब अधिक सटीक और तेज़ी से किया जा सकता है।
प्रशिक्षण और तकनीकी प्रचार-प्रसार की होगी निरंतर पहल
उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्यशाला तकनीकी ज्ञान के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि स्थानीय स्तर पर सर्वेक्षण करने वाले अधिकारी और कर्मचारी इस तकनीक से भलीभांति प्रशिक्षित हो सकें।
निदेशालय के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि CORS तकनीक राज्य में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण, भूमि विवाद समाधान और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। इसके माध्यम से एक ही स्थान से पूरे राज्य के सर्वेक्षण कार्यों की निगरानी और डेटा एकत्रण संभव हो सकेगा।
भविष्य के सर्वेक्षणों में तकनीकी क्रांति का संकेत
कार्यशाला के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से जटिल राज्य में CORS तकनीक का प्रयोग एक तकनीकी क्रांति से कम नहीं है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में भी सटीक सर्वेक्षण और योजनाबद्ध विकास संभव हो सकेगा।
भू-स्थानीय निदेशालय की यह पहल राज्य में टेक्नोलॉजी आधारित सर्वेक्षण प्रणाली को नई दिशा देगी और आने वाले वर्षों में यह प्रणाली भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के क्षेत्र में एक मजबूत आधार बनेगी।उत्तराखंड भू-स्थानीय निदेशालय की इस वर्कशॉप ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब राज्य में सर्वेक्षण और मानचित्रण का भविष्य सटीक, वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सशक्त होगा।
CORS प्रणाली न केवल सर्वेक्षण की परंपरागत पद्धति को आधुनिक रूप में ढाल रही है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।



