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पंचायती भूमि से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश,, 73वें संविधान संशोधन के तहत 29 विषय पंचायतों को सौंपने पर जोर,, पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

इन्तजार रजा हरिद्वार- पंचायती भूमि से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश,,

73वें संविधान संशोधन के तहत 29 विषय पंचायतों को सौंपने पर जोर,,

पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

देहरादून।
प्रदेश की पंचायत भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों को लेकर अब सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंचायतों की भूमि को चिन्हित कर अवैध कब्जों को शीघ्र हटाया जाए। इसके साथ ही 73वें संविधान संशोधन के प्रावधानों के तहत संविधान की 11वीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों को पंचायतों को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

पंचायती राज निदेशालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाए बिना ग्रामीण विकास का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। पंचायतों की भूमि न केवल ग्रामीण संसाधनों की रीढ़ है, बल्कि यह स्थानीय विकास योजनाओं के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में पंचायत भूमि पर कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लैंड बैंक और पंचायत अधिकारों पर विशेष जोर

समीक्षा बैठक में मंत्री ने प्रदेश में उपलब्ध पंचायत लैंड बैंक की स्थिति का गहन आंकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास उपलब्ध भूमि का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार किया जाए, ताकि विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके साथ ही 73वें संविधान संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निधि, कार्य और कार्मिक पंचायतों को सौंपने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य को 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक कुल 2813 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। इसमें 1182.6 करोड़ रुपये टाइड फंड और 1630.4 करोड़ रुपये अनटाइड फंड के रूप में मिले हैं। इस धनराशि का उपयोग ग्रामीण स्तर पर आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया गया है।

पंचायत भवनों और स्वच्छता ढांचे का व्यापक विस्तार

प्राप्त धनराशि से प्रदेश की पंचायतों में व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य किए गए हैं। बीते पांच वर्षों में पंचायतों में कंपोस्ट पिट, वर्मी कंपोस्ट पिट, कम्युनिटी डस्टबिन, कूड़ा कलेक्शन वैन, यात्री प्रतीक्षालय, रीसाइक्लिंग प्लांट, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर और प्राथमिक कूड़ा संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए हैं।

इसके अलावा राज्य सेक्टर से 850 पंचायत भवन और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत 512 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है। इस तरह कुल 1362 पंचायत भवन अब तक बनकर तैयार हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कुल 1953 पंचायत भवनों का निर्माण करना है। इसके लिए प्रति वर्ष औसतन 490 पंचायत भवनों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है।

नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण

पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय आवासीय आधारभूत अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में कुल 58,729 नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों और वार्ड सदस्यों में से अब तक 55,274 प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। राज्य स्तर पर 39 और जिला स्तर पर 190 महिला प्रतिनिधियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे अन्य महिला प्रतिनिधियों को भी नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यों में दक्ष बना सकें।

ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंचायतीराज व्यवस्था केवल प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मा है। पंचायतों को अधिकार, संसाधन और प्रशिक्षण देकर ही गांवों का समग्र विकास संभव है। अवैध कब्जे हटने से जहां पंचायतों को अपनी भूमि वापस मिलेगी, वहीं विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलेगी।

बैठक में पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, पंचायत निदेशक निधि यादव, संयुक्त निदेशक रविनाथ रमन त्रिपाठी, हिमाली जोशी पेटवाल, अपर निदेशक मनोज तिवारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार के इन निर्देशों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में पंचायतों को और अधिक सशक्त, स्वावलंबी और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण उत्तराखंड के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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