दून शूटआउट का ‘झारखंड कनेक्शन,, 💀 जिम के बाहर मारा गया विक्रम शर्मा निकला 30 हत्याओं का आरोपी,, ⚠️ शांत देहरादून में अंडरवर्ल्ड की दस्तक से बढ़ी दहशत

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔥 दून शूटआउट का ‘झारखंड कनेक्शन,,
💀 जिम के बाहर मारा गया विक्रम शर्मा निकला 30 हत्याओं का आरोपी,,
⚠️ शांत देहरादून में अंडरवर्ल्ड की दस्तक से बढ़ी दहशत

देहरादून। शुक्रवार सुबह राजधानी के पॉश इलाके में स्थित सिटी सेंटर जिम के बाहर हुई गोलीबारी ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया। शुरुआत में जिस व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर स्टोन क्रेशर कारोबारी बताया जा रहा था, वह दरअसल झारखंड के कुख्यात अपराध जगत का बड़ा नाम निकला। मृतक की पहचान विक्रम शर्मा के रूप में हुई है, जिस पर हत्या, रंगदारी, अपहरण और गैंग ऑपरेशन से जुड़े 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह करीब 30 हत्याओं में नामजद या संदिग्ध रहा है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्तराखंड की शांत वादियों में अब संगठित अपराध ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं?
📂 ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ में चलता था अपराध का साम्राज्य
पुलिस की प्रारंभिक जांच और खुफिया इनपुट बताते हैं कि विक्रम शर्मा झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ा था। उसका नाम विशेष रूप से गैंग से जोड़ा जा रहा है। माना जाता है कि विक्रम इस गैंग का रणनीतिक दिमाग था और उसे ‘गुरु’ की संज्ञा दी जाती थी।
बताया जाता है कि उसने अपराध की दुनिया को ‘कॉरपोरेट मॉडल’ में ढाल दिया था। पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस—इन तीनों को साधने की रणनीति को वह ‘3P फार्मूला’ कहता था। आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच उसने राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक कमजोरियों का फायदा उठाकर अपने गैंग को मजबूत किया। उसके गुर्गे वारदात को अंजाम देते और विरोधियों को कानूनी शिकंजे में फंसवाया जाता।
सूत्रों के अनुसार, विक्रम शर्मा मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट था। वह अपने साथियों को अनुशासन और आक्रामकता सिखाने के लिए विदेशी मार्शल आर्ट फिल्मों का सहारा लेता था। उसके गिरोह में शामिल युवकों को ‘लॉयल्टी’ और ‘साइलेंस’ का कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था।
💔 अपनों के खून से सनी कहानी
विक्रम शर्मा पर अपने करीबी सहयोगी और ट्रांसपोर्ट कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या का भी आरोप रहा है। चर्चा यह भी है कि हत्या के बाद उसने संपत्ति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए मृतक की पत्नी की शादी अपने छोटे भाई से करवा दी। हालांकि इस मामले में आधिकारिक पुष्टि और न्यायिक निष्कर्ष अलग हो सकते हैं, लेकिन आपराधिक दुनिया में इस घटना को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं।
ऐसे कई मामलों में विक्रम पर गवाहों को प्रभावित करने और दबाव बनाने के आरोप लगे। यही वजह थी कि कई केस वर्षों तक अदालतों में लंबित रहे।
🔫 देहरादून बना नया ‘सेफ हेवन’?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि झारखंड का इतना बड़ा अपराधी उत्तराखंड की राजधानी में कैसे रह रहा था? जानकारी के अनुसार, वह रेसकोर्स इलाके में रह रहा था और स्थानीय स्तर पर खुद को कारोबारी बताता था। हमले के दिन भी वह जिम हथियार के साथ पहुंचा था, जिससे संकेत मिलता है कि उसे खतरे का अंदेशा था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने उसे संभलने का मौका नहीं दिया। ताबड़तोड़ फायरिंग में वह मौके पर ही गिर पड़ा। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि यह हमला गैंगवार का हिस्सा हो सकता है।
राजधानी में हुई इस वारदात ने यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या बाहरी राज्यों के गैंग उत्तराखंड को सुरक्षित पनाहगाह मान रहे थे? और अब आपसी दुश्मनी ने इस शांत शहर को भी ‘बैटलग्राउंड’ में बदलना शुरू कर दिया है?
🚨 पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
उत्तराखंड पुलिस के लिए यह मामला सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि एक संभावित संगठित अपराध नेटवर्क की परतें खोलने की चुनौती बन गया है। अगर विक्रम शर्मा लंबे समय से देहरादून में रह रहा था, तो उसकी गतिविधियों की निगरानी क्यों नहीं हो सकी? क्या स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की मदद उसे मिल रही थी?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में रियल एस्टेट और छोटे उद्योगों की आड़ में बाहरी आपराधिक तत्व आसानी से पहचान बदलकर रह सकते हैं। ऐसे में खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
📢 जनता में बढ़ी चिंता
देहरादून, जो अब तक शिक्षा, पर्यटन और प्रशासनिक शांति के लिए जाना जाता रहा है, वहां दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने लोगों को असहज कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर 30 हत्याओं का आरोपी यहां रह सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा कितनी मजबूत है?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर पूरे नेटवर्क का खुलासा करे। सिर्फ हमलावरों की गिरफ्तारी काफी नहीं होगी, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि संगठित अपराध की जड़ें कितनी गहरी हैं।
फिलहाल पुलिस टीमें हमलावरों की तलाश में जुटी हैं और झारखंड पुलिस से भी संपर्क साधा गया है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे संभव हैं।
दून शूटआउट ने साफ कर दिया है कि अपराध की दुनिया की सीमाएं अब राज्यों की सरहदों से बंधी नहीं हैं। उत्तराखंड की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चेतावनी है कि शांत दिखने वाले शहरों के पीछे भी अपराध की परछाइयां पनप सकती हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या पुलिस इस ‘गैंगवार नेटवर्क’ को जड़ से उखाड़ पाएगी या दून की फिजाओं में दहशत का यह धुआं और गहरा होगा।



