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14 मार्च को उत्तराखण्ड में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत,, हाईकोर्ट से लेकर जिला, पारिवारिक, श्रम, उपभोक्ता और ऋण वसूली अधिकरणों में होगा मामलों का त्वरित निस्तारण,, समझौते के ज़रिये न्याय: शमनीय अपराध, मोटर दुर्घटना, वैवाहिक, बिजली-पानी बिल और यातायात चालान होंगे शामिल

आम नागरिकों को त्वरित, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक बार फिर न्याय व्यवस्था बड़ा कदम उठाने जा रही है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशन में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में 14 मार्च 2026 (शनिवार) को पूरे राज्य में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह लोक अदालत प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक राज्य के सभी प्रमुख न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थानों में एक साथ आयोजित होगी।

इन्तजार रजा हरिद्वार-14 मार्च को उत्तराखण्ड में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत,,

हाईकोर्ट से लेकर जिला, पारिवारिक, श्रम, उपभोक्ता और ऋण वसूली अधिकरणों में होगा मामलों का त्वरित निस्तारण,,

समझौते के ज़रिये न्याय: शमनीय अपराध, मोटर दुर्घटना, वैवाहिक, बिजली-पानी बिल और यातायात चालान होंगे शामिल

 

हरिद्वार, 30 जनवरी 2026।
आम नागरिकों को त्वरित, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक बार फिर न्याय व्यवस्था बड़ा कदम उठाने जा रही है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशन में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में 14 मार्च 2026 (शनिवार) को पूरे राज्य में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह लोक अदालत प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक राज्य के सभी प्रमुख न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थानों में एक साथ आयोजित होगी।

इस व्यापक आयोजन में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, राज्य के समस्त जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय, पारिवारिक न्यायालय, श्रम न्यायालय, वाणिज्यिक न्यायालय, राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, तथा ऋण वसूली अधिकरण, देहरादून शामिल रहेंगे। लोक अदालत का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर शीघ्र निस्तारण कर आमजन को राहत पहुंचाना है।

प्री-लिटिगेशन से लेकर लंबित वादों का होगा समाधान

राष्ट्रीय लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें केवल न्यायालयों में लंबित मामलों ही नहीं, बल्कि प्री-लिटिगेशन मामलों यानी ऐसे विवाद जो अभी न्यायालय में दायर नहीं हुए हैं, उनका भी निस्तारण किया जाता है। इससे न केवल न्यायालयों पर बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी से भी मुक्ति मिलती है।

लोक अदालत में जिन मामलों का निस्तारण किया जाएगा, उनमें फौजदारी के शमनीय मामले, धारा 138 एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी) के मामले, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, श्रम संबंधी विवाद, भूमि अर्जन से जुड़े मामले, दीवानी वाद, राजस्व एवं सहायक मामले प्रमुख रूप से शामिल हैं।

बिजली-पानी बिल, वेतन और सेवानिवृत्ति मामलों को मिलेगी राहत

राष्ट्रीय लोक अदालत आम जनता के रोजमर्रा से जुड़े मामलों के समाधान का भी बड़ा मंच साबित होती है। इस बार लोक अदालत में वेतन, भत्तों एवं सेवानिवृत्ति से संबंधित विवाद, विद्युत एवं जलकर बिलों के मामले, धन वसूली से जुड़े प्रकरण, लंबित आईपीआर (बौद्धिक संपि अधिकार) मामले, तथा उपभोक्ता विवाद भी निस्तारण के लिए रखे जाएंगे।

इसके अतिरिक्त किसी भी अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण के समक्ष लंबित ऐसे मामले, जो आपसी समझौते से सुलझाए जा सकते हैं, उन्हें भी राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा जा सकेगा।

यातायात चालान और छोटे विवाद भी होंगे खत्म

लोक अदालत के माध्यम से मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत शमनीय यातायात चालानों का निस्तारण भी किया जाएगा। इससे वाहन चालकों को अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी और छोटे-छोटे विवादों का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा। विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रकार के मामलों का समझौते से समाधान न्यायिक प्रक्रिया को अधिक मानवीय और प्रभावी बनाता है।

13 मार्च तक कराएं अपने मामले नियत

जो भी व्यक्ति अपने विवाद या मामले का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में करवाना चाहते हैं, वे दिनांक 13 मार्च 2026 तक संबंधित न्यायालय में किसी भी कार्यदिवस में स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थना पत्र देकर अपने मामले को लोक अदालत के लिए नियत करा सकते हैं।

विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं, क्योंकि लोक अदालत में किए गए समझौते अंतिम होते हैं, जिनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती, और न्यायालय शुल्क भी वापस किया जा सकता है।

न्याय तक पहुंच का सशक्त माध्यम

राष्ट्रीय लोक अदालत न केवल न्यायिक बोझ कम करने का माध्यम है, बल्कि यह सुलह, समझौते और सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा देती है। वर्षों से लंबित मामलों का एक ही दिन में निस्तारण आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होता है।

अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल अथवा अपने संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत एक बार फिर यह संदेश दे रही है कि न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि समाधान है—और समाधान संवाद व सहमति से भी संभव है।

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