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हरिद्वार में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत,, प्रदेश का पहला जनपद बना हरिद्वार, जहां महिलाओं को मिला क्लाउड किचन प्रशिक्षण,, ‘गंगा रसोई’ नाम से पहचान बनाएंगी प्रशिक्षित महिला समूह

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार में महिला सशक्तिकरण की नई इबारत,,

प्रदेश का पहला जनपद बना हरिद्वार, जहां महिलाओं को मिला क्लाउड किचन प्रशिक्षण,,

‘गंगा रसोई’ नाम से पहचान बनाएंगी प्रशिक्षित महिला समूह

 

जनपद हरिद्वार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल करते हुए क्लाउड किचन आधारित स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन किया गया। इस एक सप्ताह के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा द्वारा किया गया, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 25 महिलाओं को क्लाउड किचन का व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। खास बात यह रही कि हरिद्वार प्रदेश का पहला जनपद बन गया है, जहां महिलाओं को इस तरह का संगठित क्लाउड किचन प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया।

क्लाउड किचन से घर बैठे रोजगार की राह

ग्रामीण व्यवसाय इन्क्यूबेटर सेंटर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग, ऑनलाइन ऑर्डर प्रणाली, लागत प्रबंधन और उपभोक्ता संतुष्टि जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।

मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने प्रमाण पत्र वितरण के दौरान महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं अपने घर के किचन से ही स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार कर उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगी, जिससे उन्हें नियमित आय के साथ आत्मसम्मान भी मिलेगा।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही परिवार और समाज की मजबूती है। क्लाउड किचन मॉडल महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और टिकाऊ रोजगार का सशक्त विकल्प है।”

‘गंगा रसोई’ बनेगी पहचान का प्रतीक

मुख्य विकास अधिकारी ने घोषणा की कि क्लाउड किचन में कार्यरत इन सभी महिलाओं की पहचान अब ‘गंगा रसोई’ के नाम से होगी। यह नाम न केवल हरिद्वार की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, बल्कि शुद्धता, विश्वास और गुणवत्ता का भी प्रतीक बनेगा।

उन्होंने कहा कि जनपद में स्थित सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र, विभिन्न उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों व छात्रों को घर जैसा, स्वच्छ और मनपसंद भोजन उपलब्ध कराने में ‘गंगा रसोई’ अहम भूमिका निभाएगी। इसके लिए सिडकुल प्रबंधन और उद्योग विभाग द्वारा महिलाओं को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

विभागों और संस्थानों का साझा प्रयास

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और पीएनबी शताब्दी ग्राम विकास न्यास के संयुक्त सहयोग से संचालित किया गया। यह मॉडल भविष्य में अन्य जनपदों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

इस अवसर पर सहायक परियोजना निदेशक डीआरडीए नलिनीत घिल्डियाल ने कहा कि मुख्य विकास अधिकारी के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम पूरी गंभीरता और योजना के साथ संचालित किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे महिलाओं को स्थायी स्वरोजगार मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में ठोस सुधार होगा।

ऋण सुविधा का भी भरोसा

एलडीएम दिनेश गुप्ता ने महिलाओं को आश्वस्त किया कि क्लाउड किचन शुरू करने के लिए बैंक स्तर पर उन्हें ऋण उपलब्ध कराने में पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने में भी वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाएगी।

बड़ी संख्या में अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन निर्देशक शिव कुमार सिंह, मुख्य प्रबंधक पीएनबी मंडल कार्यालय पुरुषोत्तम प्रसाद, जिला परियोजना प्रबंधक (रिप) संजय सक्सेना, आरएम सिडकुल कमल किशोर, उद्योग विभाग के दिनेश, सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला समूह की सदस्याएं उपस्थित रहीं।

महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव

हरिद्वार में शुरू की गई यह क्लाउड किचन पहल न केवल महिलाओं को रोजगार देगी, बल्कि उन्हें उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी। ‘गंगा रसोई’ आने वाले समय में महिला सशक्तिकरण की पहचान बनकर उभरेगी—इसमें कोई संदेह नहीं।

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