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अब प्लास्टिक माफियाओं पर कड़े प्रहार की तैयारी,, डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित का सख्त आदेश—अब अनाधिकृत प्लास्टिक पर सीधे जुर्माना,, नगर से गांव तक अधिकारियों को डीएम हरिद्वार से मिली कार्रवाई की पूरी ताकत,, पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन की दो टूक

इन्तजार रजा हरिद्वार- अब प्लास्टिक माफियाओं पर कड़े प्रहार की तैयारी,,

डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित का सख्त आदेश—अब अनाधिकृत प्लास्टिक पर सीधे जुर्माना,,

नगर से गांव तक अधिकारियों को डीएम हरिद्वार से मिली कार्रवाई की पूरी ताकत,,

पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन की दो टूक

हरिद्वार, 22 फरवरी 2026।
गंगा तट की पवित्रता और पर्यावरण संतुलन को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अब निर्णायक कदम उठा लिया है। पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग, के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अनाधिकृत प्लास्टिक की बिक्री और उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया है। साफ शब्दों में कहें तो अब प्लास्टिक माफिया और नियम तोड़ने वाले दुकानदारों की खैर नहीं।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधित एवं अनाधिकृत प्लास्टिक सामग्री की बिक्री, भंडारण, उपयोग तथा प्लास्टिक अपशिष्ट को खुले में फेंकने पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि पर्यावरण से खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नगर क्षेत्र में सख्ती—नगर आयुक्त को मिले विशेष अधिकार

शहरी क्षेत्रों में कार्रवाई की कमान नगर आयुक्त और स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारियों को सौंपी गई है। आदेश के अनुसार नगर आयुक्त या उनके द्वारा नामित अधिकारी—जो सैनेट्री सुपरवाइजर के पद से नीचे का न हो—को प्लास्टिक अपशिष्ट से जुड़े उल्लंघनों पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है।

इसका सीधा अर्थ है कि अब नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में प्लास्टिक का अवैध उपयोग करने वालों के खिलाफ मौके पर ही चालान काटा जाएगा। बाजारों, ठेलों, होटलों, किराना दुकानों और थोक विक्रेताओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन शहर में प्लास्टिक प्रदूषण लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। गंगा घाटों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर प्लास्टिक कचरे के ढेर प्रशासन के लिए चुनौती रहे हैं। लेकिन अब डीएम के इस आदेश के बाद यह संदेश साफ है—या तो नियम मानिए, या फिर जुर्माना भरिए।

ग्राम पंचायतों में भी अब होगी सख्त कार्रवाई

केवल शहरी क्षेत्रों तक ही यह अभियान सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्लास्टिक की अवैध बिक्री और उपयोग पर कड़ी नजर रखी जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है।

विकास खंड स्तर पर क्षेत्र पंचायत सचिव एवं सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को भी अधिकृत किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद हो। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बाजार दिवस, मेलों और छोटे आयोजनों में प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग होता है। प्रशासन का मानना है कि यदि गांव स्तर पर ही सख्ती की जाए तो प्लास्टिक प्रदूषण पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।

प्लास्टिक अपशिष्ट फेंकने पर भी लगेगा दंड

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल बिक्री और उपयोग ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक कचरे को खुले में या सामान्य कूड़े के साथ फेंकना भी दंडनीय होगा। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। विशेष रूप से धार्मिक आयोजनों, मेलों और बाजारों में प्लास्टिक कचरे के ढेर लगने की समस्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि प्लास्टिक अपशिष्ट का पृथक्करण और उचित निस्तारण अनिवार्य होगा।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन की दो टूक

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है।

हरिद्वार की पहचान धार्मिक नगरी के रूप में है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं। यदि प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक नहीं लगी तो इसका सीधा असर गंगा और आसपास के पर्यावरण पर पड़ेगा। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

व्यापारियों और आमजन के लिए चेतावनी

जिला प्रशासन ने सभी व्यापारियों, दुकानदारों, होटल संचालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग तुरंत बंद करें। कपड़े के थैले, जूट बैग और अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाएं। यदि किसी दुकान या प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री पाई गई तो न केवल जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है।

डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित का संदेश साफ—हरिद्वार को बनाना है प्लास्टिक मुक्त

डीएम के इस सख्त फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि हरिद्वार को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। नगर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक अधिकारियों को अधिकार देकर यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी उल्लंघनकर्ता बच न पाए।

पर्यावरण संरक्षण केवल नारा नहीं, बल्कि अब कानूनी दायित्व है। हरिद्वार में यदि कोई अनाधिकृत प्लास्टिक की बिक्री या उपयोग करता पाया गया तो उसे सीधे आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।अब देखना यह होगा कि व्यापारी वर्ग और आमजन इस आदेश का कितना पालन करते हैं। लेकिन इतना तय है कि प्रशासन ने अपनी मंशा साफ कर दी है—हरिद्वार में प्लास्टिक प्रदूषण अब बर्दाश्त नहीं होगा।

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