ऑफिसर ऑफ द” निर्णायक प्रशासन, सख्त संदेश और पारदर्शी कार्यशैली की मिसाल,, HRDA के सचिव मनीष कुमार सिंह का असर दिखने लगा जमीनी स्तर पर,, अवैध निर्माण पर सीधी चोट, स्पष्ट संदेश- विकास का नया मॉडल — सख्ती और सुविधा का संतुलन,, अवैध निर्माण पर प्रहार से लेकर सिस्टम सुधार तक, संतुलित नेतृत्व बना चर्चा का विषय

इन्तजार रजा हरिद्वार “ऑफिसर ऑफ द” निर्णायक प्रशासन, सख्त संदेश और पारदर्शी कार्यशैली की मिसाल,,
HRDA के सचिव मनीष कुमार सिंह का असर दिखने लगा जमीनी स्तर पर,,
अवैध निर्माण पर सीधी चोट, स्पष्ट संदेश- विकास का नया मॉडल — सख्ती और सुविधा का संतुलन,,
अवैध निर्माण पर प्रहार से लेकर सिस्टम सुधार तक, संतुलित नेतृत्व बना चर्चा का विषय
हरिद्वार। तेजी से फैलते शहरों में विकास सिर्फ नई इमारतों और चौड़ी सड़कों का नाम नहीं होता, बल्कि कानून, व्यवस्था और दूरदर्शी योजना का संतुलन भी उतना ही जरूरी है। धार्मिक, पर्यटन और औद्योगिक महत्व रखने वाले हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र में यही संतुलन साधने की जिम्मेदारी निभा रहा है (HRDA)। और इस समय इसके सचिव मनीष कुमार सिंह की कार्यशैली चर्चा के केंद्र में है।

पद संभालने के बाद से ही उन्होंने जिस तरह प्रशासनिक सख्ती, पारदर्शिता और गति को प्राथमिकता दी है, उससे विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्ट बदलाव दिखाई देने लगा है। यही कारण है कि उन्हें “ऑफिसर ऑफ द निर्णायक प्रशासन” के रूप में देखा जा रहा है।
अवैध निर्माण पर सीधी चोट, स्पष्ट संदेश — “नियम सबके लिए बराबर”
हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवैध निर्माण लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहे हैं। कई स्थानों पर बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनदेखी और मानकों का उल्लंघन आम बात बनती जा रही थी।
सचिव मनीष कुमार सिंह ने कार्यभार संभालते ही इस मोर्चे पर आक्रामक रुख अपनाया। लगातार निरीक्षण, नोटिस जारी करना और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई — इन कदमों ने बिल्डरों और भू-माफियाओं को स्पष्ट संकेत दे दिया कि अब नियमों की अनदेखी आसान नहीं होगी।
सूत्रों के अनुसार, कई लंबित मामलों में तेजी से कार्रवाई की गई। जहां फाइलें महीनों तक पड़ी रहती थीं, वहां अब नियमित समीक्षा के बाद निर्णय लिए जा रहे हैं। अवैध निर्माण के खिलाफ यह सख्ती आम नागरिकों के बीच भरोसा पैदा कर रही है कि विकास प्राधिकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय है।
फाइलों की रफ्तार बढ़ी, ऑनलाइन सिस्टम को मिली मजबूती
किसी भी विकास प्राधिकरण की असली परीक्षा उसके दफ्तरों में होती है — जहां आम लोग अपने नक्शे पास कराने, लेआउट स्वीकृति और अन्य अनुमतियों के लिए आते हैं।
मनीष कुमार सिंह ने इस क्षेत्र में भी बदलाव की पहल की। लंबित नक्शों और प्रकरणों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि तय समयसीमा के भीतर मामलों का समाधान किया जाए।
ऑनलाइन प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। डिजिटल माध्यम से आवेदन और ट्रैकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई, जिससे आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस सुधार का सीधा लाभ आम नागरिकों और छोटे बिल्डरों को मिल रहा है। पारदर्शिता बढ़ने से अनावश्यक देरी और कथित भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
दबावों के बीच संतुलन और निर्णय क्षमता
हरिद्वार सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां विकास कार्यों में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
ऐसे वातावरण में प्रशासनिक निर्णय लेना आसान नहीं होता। कई बार स्थानीय दबाव, जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाएं और क्षेत्रीय समीकरण फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
लेकिन सचिव मनीष कुमार सिंह की कार्यशैली में स्पष्टता दिखाई देती है। वे निर्णय लेते समय नियमों को प्राथमिकता देते हैं और फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय समयबद्ध समाधान पर जोर देते हैं।
प्राधिकरण के भीतर भी उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बन रही है जो तथ्यों के आधार पर निर्णय लेते हैं और टीम से परिणाम की अपेक्षा रखते हैं।
टीम को साथ लेकर चलने की नीति
सिर्फ सख्ती ही किसी प्रशासन की पहचान नहीं होती; नेतृत्व की असली कसौटी टीम को साथ लेकर चलने में होती है।
HRDA में नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें विभिन्न परियोजनाओं और प्रकरणों की प्रगति पर चर्चा होती है। जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और समयसीमा तय करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता बनती जा रही है।
अधिकारियों और कर्मचारियों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि काम की गुणवत्ता और समयबद्धता से कोई समझौता नहीं होगा। साथ ही, सकारात्मक कार्य करने वालों को प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।
इस संतुलित दृष्टिकोण ने विभाग में एक नई कार्य संस्कृति को जन्म दिया है, जहां जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों पर समान जोर है।
विकास का नया मॉडल — सख्ती और सुविधा का संतुलन
हरिद्वार–रुड़की जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण भविष्य की बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है — चाहे वह यातायात का दबाव हो, जल निकासी की समस्या या पर्यावरणीय असंतुलन।
ऐसे में HRDA की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सचिव मनीष कुमार सिंह की पहल से यह संकेत मिल रहा है कि विकास को नियमों के दायरे में रखकर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
अवैध निर्माण पर सख्ती, लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण, डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा और टीम आधारित प्रशासन — ये सभी कदम मिलकर एक ऐसे मॉडल की ओर इशारा करते हैं जहां विकास और अनुशासन साथ-साथ चलें।
इसी संतुलन और सक्रियता के चलते वे इस समय “ऑफिसर ऑफ द मंथ” के रूप में चर्चा में हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गति कितनी स्थायी साबित होती है, लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि HRDA में बदलाव की बयार महसूस की जा रही है।



