उत्तराखंड में वर्दी घोटाले पर बड़ा एक्शन,, DIG अमिताभ श्रीवास्तव सस्पेंड, सीएम धामी ने दिखाई सख्ती,, होमगार्ड्स वर्दी खरीद में करोड़ों की गड़बड़ी, संयुक्त जांच समिति गठित

इन्तजार रजा हरिद्वार- उत्तराखंड में वर्दी घोटाले पर बड़ा एक्शन,,
DIG अमिताभ श्रीवास्तव सस्पेंड, सीएम धामी ने दिखाई सख्ती,,
होमगार्ड्स वर्दी खरीद में करोड़ों की गड़बड़ी, संयुक्त जांच समिति गठित

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन नीति एक बार फिर जमीन पर उतरती दिखाई दी है। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़े बड़े घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा कदम उठाते हुए निदेशक होमगार्ड्स (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की परतें खोलने के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए वर्दी, जूते, बेल्ट, कैप, बैज और अन्य एक्सेसरीज़ की खरीद में करोड़ों रुपये का बजट जारी किया गया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में टेंडर नियमों की अनदेखी, मनपसंद फर्मों को लाभ और बाजार से कहीं अधिक दरों पर खरीद की गई।
घोटाले की परतें कैसे खुलीं
जांच में पाया गया कि टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया ताकि योग्य कंपनियां बाहर हो जाएं और एक ही सप्लायर को बार-बार फायदा मिले। कई मामलों में टेंडर की शर्तें बदली गईं, तकनीकी योग्यता के फर्जी दस्तावेज लगाए गए और कम गुणवत्ता की सामग्री को उच्च गुणवत्ता बताकर बिल पास कराए गए।
रिकॉर्ड के अनुसार खरीदी गई वर्दी का स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता में भारी अंतर मिला। कुछ सामान कागजों में खरीदा दिखाया गया, लेकिन विभाग तक पहुंचा ही नहीं, जबकि भुगतान पूरे कर दिए गए।
शिकायतों के बाद शासन तक पहुंचा मामला
जब विभागीय स्तर पर शिकायतें बढ़ीं तो महानिदेशक होमगार्ड्स ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजी। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि पूरी खरीद प्रक्रिया नियमों के विपरीत और पारदर्शिता से दूर रही। कई स्तरों पर जानबूझकर नियमों का उल्लंघन हुआ, जिसमें डिप्टी कमांडेंट अमिताभ श्रीवास्तव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसी आधार पर मुख्यमंत्री ने तत्काल निलंबन का आदेश दिया।
सीएम धामी का साफ संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त जांच समिति टेंडर फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड, सप्लायरों की भूमिका और जिम्मेदार अधिकारियों की गहन जांच करेगी। दोष सिद्ध होने पर विभागीय ही नहीं, कानूनी कार्रवाई भी तय मानी जाएगी।
इस कार्रवाई को प्रशासनिक गलियारों में कड़ा और उदाहरणात्मक कदम माना जा रहा है। साफ संकेत है कि उत्तराखंड में अब सरकारी खरीद में खेल करने वालों के लिए कोई जगह नहीं—चाहे पद कितना ही बड़ा क्यों न हो।



