हरिद्वार–देहरादून में ट्रांसपोर्ट क्रांति की तैयारी,, पोड कार, रोपवे और ई-बीआरटीएस परियोजनाओं को फिर मिली रफ्तार,, आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा, शहरी यातायात के नए मॉडल पर जोर
हरिद्वार और देहरादून में लंबे समय से चर्चा में रही पोड कार (पीआरटी), रोपवे और ई-बीआरटीएस परियोजनाओं को नई गति देने के संकेत मिल गए हैं। आवास सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन सभी परियोजनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर

इन्तजार रजा हरिद्वार- हरिद्वार–देहरादून में ट्रांसपोर्ट क्रांति की तैयारी,,
पोड कार, रोपवे और ई-बीआरटीएस परियोजनाओं को फिर मिली रफ्तार,,
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा, शहरी यातायात के नए मॉडल पर जोर

हरिद्वार/देहरादून, 17 फरवरी 2026।
उत्तराखंड में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और एकीकृत बनाने की दिशा में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया गया है। हरिद्वार और देहरादून में लंबे समय से चर्चा में रही पोड कार (पीआरटी), रोपवे और ई-बीआरटीएस परियोजनाओं को नई गति देने के संकेत मिल गए हैं। आवास सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन सभी परियोजनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया और समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
हरिद्वार में पोड कार परियोजना पूर्व में व्यापारियों के विरोध के चलते ठंडे बस्ते में चली गई थी, लेकिन अब इसे नए दृष्टिकोण और तकनीकी व्यवहार्यता के साथ आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि तीर्थनगरी में तीर्थ सीजन के दौरान बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए पीआरटी सिस्टम प्रभावी समाधान साबित हो सकता है।
हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम पर जोर
बैठक में हरिद्वार शहर के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना पर भी चर्चा हुई। यह परियोजना डीडीयू पार्किंग से चंडी देवी और मनसा देवी तक मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस परियोजना की डीएफसी प्रक्रिया 18 फरवरी 2026 से प्रारंभ की जाएगी और फिजिबिलिटी रिपोर्ट को पीपीपी सेल से वेटिंग कराई जाएगी।
हरिद्वार में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत चार प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं—
- सीतापुर से भारत माता मंदिर
- सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर
- लालतारा चौक से भूपतवाला
- गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल
इन कॉरिडोर में कुल 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं और परियोजना की कुल लंबाई 20.73 किलोमीटर होगी। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो कांवड़ मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सचिव ने स्पष्ट किया कि परियोजना को केवल परिवहन सुविधा तक सीमित न रखते हुए इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल से जोड़ा जाए, ताकि शहर का विस्तार सुनियोजित ढंग से हो सके।
त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे को मिली अहम स्वीकृति
बैठक में यह भी बताया गया कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी और अनुमोदन मिल चुके हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के स्टेज-1 के लिए आवेदन भी कर दिया गया है। यह परियोजना श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है और पर्वतीय मार्गों पर ट्रैफिक दबाव को कम करेगी।
सचिव ने 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को भविष्य की परियोजनाओं में बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश को आकर्षित किया जा सके और वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत हो सके। 
देहरादून में 31.52 किमी का ई-बीआरटीएस मेगा कॉरिडोर
राजधानी देहरादून में ई-बीआरटीएस परियोजना के तहत दो बड़े कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। पहला कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक 31.52 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें 35 स्टेशन बनाए जाएंगे। समीक्षा बैठक के बाद सचिव ने अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण भी किया और निर्माण कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर शहर के प्रमुख आवागमन मार्गों को कवर करेगा और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करेगा। देहरादून में लगातार बढ़ती आबादी और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है।
देहरादून में पीआरटी के तीन प्रमुख कॉरिडोर
देहरादून में पीआरटी सिस्टम के अंतर्गत तीन मुख्य कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
- क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
- पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
- गांधी पार्क से आईएसबीटी
इन कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। सचिव ने निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को शहरी विकास की दीर्घकालिक रणनीति से जोड़ा जाए।
संयुक्त स्थलीय निरीक्षण और भूमि हस्तांतरण पर चर्चा
बैठक के बाद प्रथम कॉरिडोर (आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन) के 17 प्रस्तावित स्टेशनों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन के निर्माण के लिए 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है, जो मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। संबंधित शासकीय भूमि को शीघ्र हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके।
पार्किंग पॉलिसी और समन्वित विकास पर विशेष बल
सचिव ने उत्तराखंड की कार पार्किंग पॉलिसी-2022 का गहन अध्ययन कर भविष्य की सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि बिना सुदृढ़ पार्किंग प्रबंधन के कोई भी ट्रांजिट सिस्टम प्रभावी नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाएं केवल परिवहन साधन नहीं हैं, बल्कि ये पर्यटन संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने का माध्यम बनेंगी।
धामी सरकार के विजन से जुड़ा विकास मॉडल
सचिव ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को आधुनिक, सुरक्षित और सतत शहरी परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। पीपीपी मॉडल को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा।
शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत
समीक्षा बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड सरकार शहरी परिवहन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं, तो हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
पोड कार और ई-बीआरटीएस जैसी आधुनिक प्रणालियां प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर स्मार्ट ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के मानचित्र पर स्थापित कर सकती हैं। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। उत्तराखंड में परिवहन के नए युग की यह शुरुआत भविष्य में तीर्थाटन, पर्यटन और शहरी जीवन को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।



