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कड़ाके की ठंड में इंसानियत की मिसाल बना सहारा दीप ट्रस्ट,, हर की पौड़ी से शांतिकुंज तक देर रात चला सेवा अभियान, बेसहारा लोगों को मिली राहत,, “यह सिर्फ रजाई नहीं, जीवन की ढाल है” — मौ. सलीम, सामाजिक कार्यकर्ता

कड़ाके की ठंड से कांपते हरिद्वार शहर में जब आधी रात के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था, तापमान लगातार गिर रहा था और आम लोग अपने घरों में दुबके हुए थे, उसी वक्त सहारा दीप ट्रस्ट इंसानियत की गर्माहट बनकर सड़कों पर उतरा।

इन्तजार रज़ा हरिद्वार- कड़ाके की ठंड में इंसानियत की मिसाल बना सहारा दीप ट्रस्ट,,
हर की पौड़ी से शांतिकुंज तक देर रात चला सेवा अभियान, बेसहारा लोगों को मिली राहत,,
“यह सिर्फ रजाई नहीं, जीवन की ढाल है” — मौ. सलीम, सामाजिक कार्यकर्ता

हरिद्वार | 20 दिसंबर
कड़ाके की ठंड से कांपते हरिद्वार शहर में जब आधी रात के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था, तापमान लगातार गिर रहा था और आम लोग अपने घरों में दुबके हुए थे, उसी वक्त सहारा दीप ट्रस्ट इंसानियत की गर्माहट बनकर सड़कों पर उतरा।
20 दिसंबर की ठंडी और अंधेरी रात लगभग 11 बजे, ट्रस्ट के समर्पित स्वयंसेवकों ने हर की पौड़ी क्षेत्र, आसपास के घाटों और शांतिकुंज इलाके में एक संवेदनशील रात्रि सेवा अभियान चलाया, जिसने मानवता की सच्ची तस्वीर पेश की।
यह अभियान सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन बेसहारा लोगों के लिए उम्मीद की किरण था, जो खुले आसमान के नीचे सर्द हवाओं से जूझते हुए रात गुजारने को मजबूर हैं। ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने खुद सड़कों, फुटपाथों, मंदिरों के आसपास और खाली स्थानों पर जाकर जरूरतमंद गरीबों, मजदूरों और असहाय लोगों को खोजा और उन्हें गर्म रजाइयाँ वितरित कीं।
रजाई नहीं, ठंड से लड़ने की ढाल बनी मदद
सहारा दीप ट्रस्ट द्वारा दी गई रजाई सिर्फ ठंड से बचाने का साधन नहीं रही, बल्कि वह
सर्द रात में जीवन की ढाल,
भरोसे की चादर
और इंसानियत की सच्ची गर्माहट बनकर सामने आई।
रजाई पाते ही जरूरतमंदों के चेहरों पर जो सुकून, राहत और कृतज्ञता दिखाई दी, वही इस पूरे सेवा अभियान की सबसे बड़ी सफलता रही। कई बुजुर्ग, मजदूर और असहाय लोग भावुक होकर ट्रस्ट के स्वयंसेवकों को दुआएं देते नजर आए। किसी ने कहा—“आज ठंड से जान बच गई”, तो किसी ने इसे “भगवान का भेजा सहारा” बताया।
सर्दी सबसे ज्यादा कमजोर को तोड़ती है
इस सेवा अभियान के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
सर्दी का मौसम सबसे ज्यादा उन्हीं लोगों को प्रभावित करता है, जिनके पास न पक्का मकान होता है और न ही ठंड से बचाव का कोई साधन।
ट्रस्ट का संकल्प है कि हरिद्वार में कोई भी गरीब, मजदूर या बेसहारा व्यक्ति ठंड की वजह से पीड़ा न सहे। इसी सोच के साथ सहारा दीप ट्रस्ट द्वारा लगातार रात के समय सेवा अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता सीधे, बिना भेदभाव और पूरे सम्मान के साथ पहुंचाई जा सके।
बाइट | मौ. सलीम, सामाजिक कार्यकर्ता (धनपुरा, घिस्सुपुरा)
सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम ने सेवा अभियान के दौरान कहा—
“यह सेवा सिर्फ रजाई बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस इंसान को यह एहसास दिलाने का प्रयास है कि वह इस समाज में अकेला नहीं है। जब ठंड अपने चरम पर होती है, तब इंसानियत का साथ ही सबसे बड़ी ताकत बनता है। सहारा दीप ट्रस्ट का यह प्रयास काबिल-ए-तारीफ है।”
उन्होंने समाज के अन्य संगठनों और सक्षम लोगों से भी ऐसे अभियानों में आगे आने की अपील की।
समाज से सहयोग की अपील
सहारा दीप ट्रस्ट ने समाज के संवेदनशील, जागरूक और सक्षम नागरिकों से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि—
“छोटा सा सहयोग भी किसी के लिए बड़ी राहत बन सकता है। जब समाज एकजुट होकर चलता है, तभी अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंच पाती है।”
ट्रस्ट का मानना है कि प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और आम नागरिक यदि मिलकर प्रयास करें, तो ठंड के इस मौसम में किसी की जान जाने से रोकी जा सकती है।
अंधेरी रात में जलता सेवा का दीप
सहारा दीप ट्रस्ट का यह सेवा कार्य केवल ठंड से राहत देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
ठंडी और अंधेरी रात में जलता यह “सेवा का दीप” कई जिंदगियों के लिए उम्मीद की उजली रोशनी बन गया।
हरिद्वार जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक नगर में इस तरह के सेवा अभियान न सिर्फ जरूरतमंदों के लिए सहारा हैं, बल्कि समाज को यह संदेश भी देते हैं कि
जब इंसान इंसान के काम आता है, तभी सच्ची श्रद्धा और मानवता जीवित रहती है।
सहारा दीप ट्रस्ट, हरिद्वार (उत्तराखंड) द्वारा किया गया यह प्रयास निस्संदेह प्रेरणादायक है और आने वाले समय में ऐसे और अभियानों की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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