बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खिलाफ संत समाज का आक्रोश,, आईपीएल में पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश पर भी बैन लगाने की मांग,, माया देवी प्रांगण में साधु-संतों और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

इन्तजार रजा हरिद्वार- बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खिलाफ संत समाज का आक्रोश,,
आईपीएल में पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश पर भी बैन लगाने की मांग,,
माया देवी प्रांगण में साधु-संतों और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन
लक्सर (हरिद्वार)। आईपीएल में बांग्लादेशी क्रिकेट खिलाड़ियों की खरीद-फरोख्त और उन्हें मैचों में खिलाए जाने के विरोध में हरिद्वार के संत समाज, श्री अखंड परशुराम अखाड़ा और विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं ने शनिवार को माया देवी प्रांगण में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिस प्रकार पाकिस्तान के खिलाड़ियों को आईपीएल से पूरी तरह दूर रखा गया है, उसी तरह बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर भी प्रतिबंध लगाया जाए।
संत समाज का कहना है कि बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, हिंसा और हमलों की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे में भारत में आयोजित होने वाले आईपीएल जैसे बड़े खेल मंच पर बांग्लादेशी खिलाड़ियों को न सिर्फ खेलने दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें मोटी रकम भी दी जा रही है, जो हिंदू समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
“हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार बर्दाश्त नहीं” – संत समाज
प्रदर्शन के दौरान संत जूना अखाड़ा से जुड़े भास्कर पूरी ने तीखे शब्दों में कहा कि बांग्लादेश में जिस तरह से हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, मारपीट, आगजनी और हत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि जब एक ओर बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी देश के खिलाड़ियों को भारत में सम्मान और पैसा दिया जा रहा है, यह दोहरा मापदंड है।
भास्कर पूरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को खेलने से नहीं रोका गया तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा। जहां-जहां बांग्लादेशी खिलाड़ी खेलने जाएंगे, वहां-वहां संत समाज और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
“पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश पर भी प्रतिबंध लगे”
श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भावनात्मक कारणों से पाकिस्तान के खिलाड़ियों को आईपीएल से बाहर रखा है। उसी तरह बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए वहां के खिलाड़ियों को भी आईपीएल में खेलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आईपीएल के दौरान बांग्लादेशी खिलाड़ियों को न सिर्फ टीमों में शामिल किया जाता है, बल्कि उन्हें बड़ी धनराशि भी दी जाती है, जो अत्याचार झेल रहे हिंदू समाज के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। पंडित अधीर कौशिक ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जल्द ही इस पर निर्णय नहीं लिया गया तो संत समाज चरणबद्ध आंदोलन करेगा।
सामाजिक संगठनों का समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन में कई सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखने की बात जरूर की जाती है, लेकिन जब किसी देश में एक विशेष समुदाय पर लगातार अत्याचार हो रहे हों, तो नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि उसके खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध दर्ज कराया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, बीसीसीआई और आईपीएल प्रबंधन से मांग की कि वे इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करें और बांग्लादेशी खिलाड़ियों की भागीदारी पर तत्काल रोक लगाएं।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संत समाज और अखाड़ा परिषद से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह विरोध केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहेगा। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन लगातार और प्रभावी होगा।
प्रदर्शन के अंत में संतों ने एक स्वर में कहा कि हिंदू समाज पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना उनका धर्म है और जब तक बांग्लादेश में हालात नहीं सुधरते, तब तक भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को किसी भी बड़े मंच पर खेलने नहीं दिया जाना चाहिए।



