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स्कूल बना torture room? बहादराबाद में 7वीं के छात्र को टीचर–मैनेजर ने बेरहमी से पीटा!,, परिजनों की तहरीर के बाद अब बच्चे की सुरक्षा पर मंडराया नया खतरा,, परिजनों को नई चिंता—अब स्कूल प्रबंधन प्रताड़ना न दे! बच्चा फिर से पीड़ित न हो, अभिभावकों में दहशत

इन्तजार रजा हरिद्वार- स्कूल बना torture room?

बहादराबाद में 7वीं के छात्र को टीचर–मैनेजर ने बेरहमी से पीटा!,,

परिजनों की तहरीर के बाद अब बच्चे की सुरक्षा पर मंडराया नया खतरा,,

परिजनों को नई चिंता—अब स्कूल प्रबंधन प्रताड़ना न दे! बच्चा फिर से पीड़ित न हो, अभिभावकों में दहशत

हरिद्वार—गुडविल स्कूल, अतमलपुर बौंगला में 7वीं के 13 वर्षीय छात्र अलमाज के साथ हुई निर्दय पिटाई ने शिक्षा के मंदिर को शर्मसार कर दिया है। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर में पूरे घटनाक्रम का जो खुलासा हुआ है, उसने स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। एक बच्चा सिर्फ शौचालय जाने गया था, लेकिन वापस क्लास में नहीं बल्कि टीचर और स्कूल मैनेजर की मार से लहूलुहान होकर लौटा।

टीचर ने बाल पकड़कर घसीटा, मैनेजर ने भी की बेरहमी—7:45 बजे स्कूल गया, 2:45 बजे घायल होकर लौटा

घटना 17 नवंबर 2025 की है। बहादराबाद निवासी दिलशाद, जो बच्चे के पिता हैं, ने बताया कि उनका बेटा अलमाज रोज की तरह सुबह 7:45 बजे स्कूल बस से गुडविल स्कूल गया था। दोपहर 2:45 बजे जब वह घर पहुंचा तो उसके चेहरे और हाथों पर गंभीर चोटों के निशान देखकर वे स्तब्ध रह गए। जब पिता ने पूछा कि ये चोटें कैसे लगीं, तो बच्चे ने रोते हुए बताया—

  • शौचालय जाने पर अध्यापक उज्जवल ने उसके बाल पकड़कर जोर से खींचा
  • फिर उसे घसीटते हुए स्कूल प्रबंधक विवेक चौहान के पास ले गया
  • जहां विवेक चौहान ने भी बच्चे को जमकर थप्पड़ और घूंसे मारे

यानी एक मासूम बच्चा, जो अभिभावकों की उम्मीदों के साथ स्कूल भेजा गया, वहां दुर्व्यवहार का शिकार हो गया।

अस्पताल पहुंचाया गया बच्चा, मेडिकल रिपोर्ट तहरीर के साथ संलग्न—अब कानूनी कार्रवाई की मांग

परिजनों ने बच्चे की हालत बिगड़ती देख तत्काल उसे सरकारी अस्पताल बहादराबाद ले जाया, जहां उसका इलाज हुआ और मेडिकल रिपोर्ट तैयार की गई। यही मेडिकल रिपोर्ट अब तहरीर के साथ पुलिस को सौंपी गई है। पिता दिलशाद ने थाना बहादराबाद में दी गई तहरीर में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका साफ कहना है—
“मेरे बच्चे के साथ मारपीट करके उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब की गई है। आरोपी टीचर और मैनेजर पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”तहरीर में दर्ज विवरण साफ बताता है कि मामला सिर्फ अनुशासन का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे शारीरिक हिंसा और क्रूरता का है।

परिजनों को नई चिंता—अब स्कूल प्रबंधन प्रताड़ना न दे! बच्चा फिर से पीड़ित न हो, अभिभावकों में दहशत

सबसे बड़ा डर अब यह है कि तहरीर देने के बाद कहीं स्कूल प्रबंधन बच्चे के साथ और अमानवीय व्यवहार न करे। परिजनों का कहना है कि

  • स्कूल प्रबंधन पहले ही बच्चे को पीट चुका है
  • अब पुलिस में मामला जाने के बाद बदले की भावना से बच्चे को फिर परेशान किया जा सकता है
  • उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या टारगेट करने का खतरा बढ़ गया है अभिभावकों ने अन्य परिजनों को भी अलर्ट किया है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके व्यवहार पर विशेष नजर रखें, क्योंकि अक्सर कई बच्चे डर के कारण सच बताने से कतराते हैं। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि ऐसे मामलों में, जब पुलिस कार्रवाई शुरू होती है, तो निजी संस्थान कभी-कभी बच्चे पर दबाव बनाते हैं—इसी कारण अभिभावक अब और ज्यादा चिंतित हैं।

स्कूल प्रबंधन पर गंभीर सवाल—क्या यह शिक्षा या हिंसा का केंद्र? प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए

घटना ने यह सवाल उठा दिया है कि—

  • क्या गुडविल स्कूल में बच्चों की सुरक्षा नाम की कोई व्यवस्था है?
  • क्या वहां अध्यापक और प्रबंधक बच्चों पर हाथ उठाने को अपना अधिकार समझते हैं?
  • क्या बच्चों पर अत्याचार छिपाने के लिए दबाव की संस्कृति विकसित हो चुकी है?

गौर करने वाली बात यह है कि बच्चे को इतनी चोटें आईं, फिर भी स्कूल ने परिजनों को सूचित नहीं किया। यानी घटना को छिपाने की कोशिश भी साफ दिखती है। ऐसे में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और बाल संरक्षण आयोग को तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि

  • आरोपी अध्यापक और प्रबंधक पर तत्काल प्रभाव से निलंबन
  • स्कूल में CCTV फुटेज की जांच
  • बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित
  • और संस्थान के सभी कर्मचारियों की काउंसलिंग
    जैसे कदम उठाए जा सकें।

एक मासूम की चीख पर व्यवस्था जागे—बच्चे की सुरक्षा सर्वोच्च, दोषियों पर कठोर कार्रवाई जरूरी

गुडविल स्कूल में मासूम अलमाज के साथ हुई मारपीट केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
अगर आज आरोपी अध्यापक और प्रबंधक पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कल किसी और मासूम का नंबर होगा।बच्चा डरा हुआ है, परिवार सहमा हुआ है—अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन कमजोरों के साथ खड़ा होगा या स्कूल प्रबंधन के दबाव में मामला रफादफा हो जाएगा?

फिलहाल परिजन एक ही मांग कर रहे हैं—
“हमारे बच्चे को न्याय दो, और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करो।”

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