बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर अनिवार्य होगा ग्रीन सेस,, हरिद्वार शहर व चिड़ियापुर बॉर्डर सहित तीनों चेक पोस्ट पर एएनपीआर से होगी वसूली,, परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन, तकनीक से ग्रीन सेस चोरी पर लगेगा पूर्ण विराम,, हरिद्वार शहर में भी डिजिटल निगरानी

इन्तजार रजा हरिद्वार- बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर अनिवार्य होगा ग्रीन सेस,,
हरिद्वार शहर व चिड़ियापुर बॉर्डर सहित तीनों चेक पोस्ट पर एएनपीआर से होगी वसूली,,
परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन, तकनीक से ग्रीन सेस चोरी पर लगेगा पूर्ण विराम,,
हरिद्वार शहर में भी डिजिटल निगरानी
हरिद्वार। उत्तराखंड में अब बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए ग्रीन सेस से बच निकलना नामुमकिन होने जा रहा है। राज्य सरकार और परिवहन विभाग ने ग्रीन सेस (Green Cess) वसूली को लेकर अब पूरी तरह सख्त, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने का फैसला कर लिया है। इस फैसले के तहत अब सिर्फ एक बॉर्डर नहीं, बल्कि हरिद्वार जिले के सभी प्रमुख बॉर्डर चेक पोस्टों पर एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली की जाएगी।
अब तक यह व्यवस्था केवल नारसन बॉर्डर तक सीमित थी, लेकिन लगातार सामने आ रही टैक्स चोरी, मैनुअल वसूली में लापरवाही और बाहरी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही को देखते हुए परिवहन विभाग ने दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत हरिद्वार शहर, चिड़ियापुर बॉर्डर और भगवानपुर चेक पोस्ट को भी एएनपीआर आधारित ग्रीन सेस वसूली व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है।
अब एक नहीं, तीन-तीन चेक पोस्ट पर एक कटेगा ग्रीन सेस
परिवहन विभाग के अनुसार हरिद्वार जिले में मौजूद तीनों प्रमुख बॉर्डर चेक पोस्टों पर एएनपीआर कैमरे पहले से ही लगाए जा चुके हैं। अब इन्हीं कैमरों के जरिए बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली की जाएगी।
अब व्यवस्था यह होगी कि जैसे ही कोई बाहरी राज्य का वाहन उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेगा, उसकी नंबर प्लेट स्वतः स्कैन हो जाएगी। वाहन की पहचान होते ही सिस्टम के माध्यम से ग्रीन सेस की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप लगभग शून्य होगा, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं बचेगी।
नारसन बॉर्डर पर ट्रायल रहा सफल
परिवहन विभाग का कहना है कि नारसन चेक पोस्ट पर एएनपीआर कैमरों के जरिए ग्रीन सेस वसूली का ट्रायल पूरी तरह सफल रहा है। यहां लंबे समय से यह प्रणाली फंक्शनल है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
जहां पहले मैनुअल वसूली के कारण कई वाहन बिना सेस चुकाए निकल जाते थे, वहीं अब डिजिटल सिस्टम के चलते हर बाहरी वाहन रिकॉर्ड में आ रहा है। टैक्स चोरी पर सीधी चोट पड़ी है और राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी वजह से विभाग ने इस मॉडल को अन्य चेक पोस्टों पर भी लागू करने का फैसला किया है।
भगवानपुर और चिड़ियापुर में भी शुरू होगी प्रक्रिया
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि भगवानपुर चेक पोस्ट पर भी एएनपीआर कैमरों के जरिए ग्रीन सेस वसूली का ट्रायल पूरा हो चुका है और जल्द ही वहां भी यह प्रक्रिया पूरी तरह शुरू कर दी जाएगी।
इसी तरह चिड़ियापुर बॉर्डर, जहां से बड़ी संख्या में बाहरी वाहन हरिद्वार जिले में प्रवेश करते हैं, वहां भी एएनपीआर कैमरों के जरिए ग्रीन सेस वसूली की जाएगी। इससे उन वाहन चालकों पर सीधा शिकंजा कसेगा जो अब तक वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेकर ग्रीन सेस से बचते रहे हैं।

हरिद्वार शहर में भी डिजिटल निगरानी
हरिद्वार धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील शहर है। रोजाना हजारों की संख्या में बाहरी राज्यों के वाहन शहर में प्रवेश करते हैं। अब तक शहर के भीतर ग्रीन सेस को लेकर कोई ठोस निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर कई वाहन बिना शुल्क चुकाए बेधड़क घूमते रहे।
अब हरिद्वार शहर में गुरुकुल कांगड़ी के पास एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की तैयारी है, जिससे शहर में प्रवेश करने वाले हर बाहरी वाहन की रियल टाइम डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। परिवहन विभाग का साफ कहना है कि अब शहर के भीतर भी ग्रीन सेस से बचने की कोई चाल काम नहीं आएगी।
केवल बाहरी राज्यों के वाहनों पर ही लगेगा सेस
इस पूरे मामले पर एआरटीओ प्रशासन हरिद्वार निखिल शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह ग्रीन सेस केवल बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर ही लगाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि—
“इस समय नारसन चेक पोस्ट पर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू है। हमारे सभी बॉर्डर चेक पोस्टों पर एएनपीआर कैमरे पहले से लगे हुए हैं। नारसन में इसका ट्रायल हो चुका है और वहां यह पूरी तरह फंक्शनल है। भगवानपुर चेक पोस्ट पर भी ट्रायल पूरा हो चुका है और वहां जल्द ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हमारे तीनों चेक पोस्ट—नारसन, भगवानपुर और चिड़ियापुर—पर इन्हीं एएनपीआर कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली होगी। यह सेस केवल बाहरी राज्यों के वाहनों पर ही लगाया जाएगा।”
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सख्त संदेश
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन सेस केवल राजस्व बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, जिसका असर हवा, पानी और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
ग्रीन सेस से प्राप्त धनराशि का उपयोग प्रदूषण नियंत्रण, हरित परियोजनाओं और पर्यावरण सुधार कार्यों में किया जाता है। ऐसे में ग्रीन सेस की चोरी को न केवल आर्थिक अपराध, बल्कि पर्यावरण के खिलाफ लापरवाही के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पूरी तरह डिजिटल, पूरी तरह पारदर्शी
परिवहन विभाग का लक्ष्य साफ है—मानव हस्तक्षेप खत्म करना, पारदर्शिता बढ़ाना और हर बाहरी वाहन से ग्रीन सेस की 100 प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करना। एएनपीआर कैमरों की मदद से यह लक्ष्य काफी हद तक हासिल होता नजर आ रहा है।
आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य जिलों और बॉर्डर क्षेत्रों में भी इसी तरह की तकनीकी व्यवस्था लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
स्पष्ट चेतावनी: अब कोई रियायत नहीं
परिवहन विभाग की इस सख्त और तकनीक आधारित कार्रवाई से एक बात बिल्कुल साफ हो गई है—अब उत्तराखंड में ग्रीन सेस से बचने की कोई गुंजाइश नहीं है।
बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को तय नियमों के तहत ग्रीन सेस चुकाना ही होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर न केवल आर्थिक कार्रवाई होगी, बल्कि आगे चलकर कानूनी शिकंजा कसने से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
सरकार और परिवहन विभाग ने साफ संकेत दे दिया है—नियमों से समझौता नहीं, अब तकनीक बोलेगी और सेस कटेगा।



