डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में राजस्व लोक अदालत का सफल आयोजन,, 1911 मामलों का मौके पर निस्तारण, वादकारियों को मिली त्वरित राहत,, लगभग 63 लाख रुपये की राजस्व वसूली व अर्थदंड, प्रशासन की पहल से बढ़ा जनता का भरोसा

इन्तजार रजा हरिद्वार- डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में राजस्व लोक अदालत का सफल आयोजन,,
1911 मामलों का मौके पर निस्तारण, वादकारियों को मिली त्वरित राहत,,
लगभग 63 लाख रुपये की राजस्व वसूली व अर्थदंड, प्रशासन की पहल से बढ़ा जनता का भरोसा
हरिद्वार, 28 मार्च।
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जनपद हरिद्वार में आमजन को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने और लंबित राजस्व वादों के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में राजस्व लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित मामलों की सुनवाई करते हुए कुल 1911 राजस्व वादों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। प्रशासन की इस पहल से वादकारियों को वर्षों से लंबित मामलों से राहत मिली और उन्हें न्याय के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष राजस्व लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों को सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया। इनमें कई मामलों का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते, त्वरित सुनवाई तथा प्रशासनिक हस्तक्षेप के माध्यम से किया गया। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से लंबित राजस्व वादों का तेजी से समाधान संभव हो पाता है।
डीएम मयूर दीक्षित ने कहा— आमजन को त्वरित व पारदर्शी न्याय देना प्रशासन की प्राथमिकता
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने इस आयोजन की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आमजन को सुलभ, पारदर्शी और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राजस्व लोक अदालत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से सरल प्रक्रिया और आपसी सहमति के आधार पर वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है।
डीएम ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल लंबित मामलों में कमी आती है बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास और पारदर्शिता भी मजबूत होती है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में भी जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इसी तरह सक्रियता के साथ कार्य करें।
स्टाम्प, आबकारी और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के मामलों में भी हुई कार्रवाई
राजस्व लोक अदालत में विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत लंबित मामलों की सुनवाई करते हुए उनका निस्तारण किया गया। स्टाम्प अधिनियम के अंतर्गत 19 मामलों का निस्तारण करते हुए लगभग 60,88,442 रुपये की धनराशि अर्थदंड के रूप में आरोपित की गई।
वहीं आबकारी अधिनियम के तहत 21 मामलों का निस्तारण करते हुए लगभग 96 हजार रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के अंतर्गत 7 मामलों का निस्तारण करते हुए 1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड वसूला गया।
इस प्रकार कुल मिलाकर लोक अदालत में लगभग 61 लाख रुपये का अर्थदंड आरोपित किया गया, जबकि 2 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की वसूली की गई। प्रशासन के अनुसार यह लोक अदालत राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई है।
अपर जिलाधिकारी समेत कई अधिकारी रहे मौजूद
राजस्व लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे और अपने मामलों का समाधान कराया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी पी.आर. चौहान, जनपद के सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल संचालन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की लोक अदालतों का आयोजन कर जनता को त्वरित न्याय और प्रशासनिक राहत प्रदान करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी रहेंगे।



