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– दादुपुर गोविंदपुर में जमीन खरीदी, नाम दर्ज, फिर भी  कब्जे का लगातार बढ़ रहा खतरा!,,  हरिद्वार में दबंगों का तांडव: प्रशासनिक आदेश बेअसर, कानून को खुली चुनौती,, जिलाधिकारी से गुहार: “मेरी जमीन चिन्हित कराइए, जान-माल की रक्षा कराइए”,, चकबंदी प्रक्रिया का बहाना, कब्जे की साजिश!,, क्या दबंगों पर कार्रवाई होगी या एक बार फिर कागजों में दर्ज हक, जमीन पर कुचला जाएगा?

इन्तजार रजा हरिद्वार- दादुपुर गोविंदपुर में जमीन खरीदी, नाम दर्ज, फिर भी  कब्जे का लगातार बढ़ रहा खतरा!,, 

हरिद्वार में दबंगों का तांडव: प्रशासनिक आदेश बेअसर, कानून को खुली चुनौती,,

जिलाधिकारी से गुहार: “मेरी जमीन चिन्हित कराइए, जान-माल की रक्षा कराइए”,,

चकबंदी प्रक्रिया का बहाना, कब्जे की साजिश!,, क्या दबंगों पर कार्रवाई होगी या एक बार फिर कागजों में दर्ज हक, जमीन पर कुचला जाएगा?

 

हरिद्वार जनपद के ग्राम दादूपुर गोविन्दपुर से सामने आया मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या वैध दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक आदेश भी दबंगों के सामने बौने साबित हो रहे हैं? मोती बाजार हरिद्वार निवासी संजय अग्रवाल पुत्र सत्यप्रकाश अग्रवाल ने जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी कानूनी रूप से खरीदी गई भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है और खुलेआम जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं।

प्रार्थी के अनुसार, उन्होंने ग्राम दादूपुर गोविन्दपुर स्थित खसरा संख्या 130/1, कुल रकबा 1.536 हेक्टेयर में से 0.2132 हेक्टेयर भूमि को 28 मई 2012 को विधिवत बिक्री विलेख (बैनामा) के माध्यम से खरीदा था। यह भूमि पूर्व में डॉ. जुल्फीकार पुत्र असगर अली के नाम संक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर के रूप में दर्ज थी। पूरा प्रतिफल प्राप्त करने के बाद डॉ. जुल्फीकार ने न केवल बैनामा किया, बल्कि मौके पर कब्जा भी सौंप दिया था।

चकबंदी प्रक्रिया का बहाना, कब्जे की साजिश लगातार जारी!

शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्र में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन धारा 52 जोत चकबंदी अधिनियम का प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है। इसके बावजूद गफ्फार अली नामक व्यक्ति कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बिना किसी अधिकार के खसरा संख्या 130/1 में जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। प्रार्थी का आरोप है कि इन लोगों का उक्त भूमि से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है, फिर भी दबंगई के बल पर जमीन हथियाने की कोशिश की जा रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि डॉ. जुल्फीकार का निधन हो चुका है और उनके वैध वारिस शाहनवाज अली एवं श्रीमती आशीया बेगम हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक रिकॉर्ड में संजय अग्रवाल के नाम अमलदरामद हो चुका है। सहायक चकबंदी अधिकारी भगवानपुर ने 31 दिसंबर 2024 को आदेश पारित कर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कर दिया। सवाल यह है कि जब कागज पूरे हैं, आदेश मौजूद हैं, तो फिर दबंगों का दुस्साहस क्यों?

भूमि चिन्हांकन न होने से बना विवाद, दबंगों के हौसले बुलंद

प्रार्थी का कहना है कि उनकी भूमि का स्थल पर स्पष्ट चिन्हांकन नहीं हो पाया है, जिसके कारण आए दिन विवाद की स्थिति बनी रहती है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर गफ्फार अली और उसके साथी मौके पर पहुंचकर जबरन कब्जा करने की कोशिश करते हैं। जब प्रार्थी ने इसका विरोध किया तो उसे माँ-बहन की गंदी गालियाँ दी गईं और साफ शब्दों में धमकी दी गई—
“अगर जान प्यारी है तो इधर मत आना, वरना जान से हाथ धो बैठोगे।”

यह कोई सामान्य विवाद नहीं, बल्कि खुलेआम कानून को चुनौती देने का मामला है। प्रार्थी खुद को शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाला नागरिक बताता है, जबकि आरोपियों को वह मुठमर्द और दबंग किस्म के लोग करार देता है, जिन्हें न प्रशासन का डर है और न कानून का।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि यह पूरा मामला थाना रानीपुर क्षेत्र का है। प्रार्थी ने पुलिस चौकी पर शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि कथित आरोपियों के हौसले और ज्यादा बुलंद हो गए। जब पुलिस निष्क्रिय हो और प्रशासनिक आदेश जमीन पर लागू न हों, तो आम नागरिक आखिर जाए तो जाए कहाँ?

इसी मजबूरी में संजय अग्रवाल ने जिलाधिकारी हरिद्वार से मांग की है कि उनकी भूमि का तत्काल स्थल पर चिन्हांकन कराया जाए, ताकि वह अपनी खरीदी गई जमीन की सुरक्षा कर सकें और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

जिलाधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग

प्रार्थी ने मांग की है कि गफ्फार अली निवासी आशियाना होटल सराय, थाना कोतवाली ज्वालापुर, एवं उसके अन्य साथी जो ग्राम दादूपुर गोविन्दपुर थाना रानीपुर के निवासी बताए गए हैं, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि वे प्रार्थी की भूमि पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या कब्जे का प्रयास न करें

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की जमीन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस की भूमिका और कानून के राज की साख से जुड़ा है। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी हरिद्वार इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं—
क्या दबंगों पर कार्रवाई होगी या एक बार फिर कागजों में दर्ज हक, जमीन पर कुचला जाएगा?

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