अपराधअलर्टइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

कलियर दरगाह में चढ़ावे का गबन,, सुपरवाइजर दोषी, फिर भी कार्रवाई निलंबन के बाद गायब,, मानवाधिकार आयोग ने डीएम हरिद्वार से 18 दिसंबर तक सख्त रिपोर्ट मांगी,, 18 दिसंबर बनेगा निर्णायक—प्रशासन की परीक्षा शुरू

इन्तजार रजा हरिद्वार- कलियर दरगाह में चढ़ावे का गबन,,

सुपरवाइजर दोषी, फिर भी कार्रवाई निलंबन के बाद गायब,,

मानवाधिकार आयोग ने डीएम हरिद्वार से 18 दिसंबर तक सख्त रिपोर्ट मांगी,,

18 दिसंबर बनेगा निर्णायक—प्रशासन की परीक्षा शुरू

हरिद्वार—पवित्र कलियर साहब साबिर पाक की दरगाह में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे की धनराशि में हुए गबन ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात ये कि जिस सुपरवाइजर पर चढ़ावे की रकम हड़पने का आरोप साबित हो चुका है, उसी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। धार्मिक आस्था के इस बड़े मामले में प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। इसी गम्भीरता को देखते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी हरिद्वार से 18 दिसंबर 2025 तक कड़ी और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।आयोग ने यह भी साफ संदेश दे दिया है कि यदि तय तारीख तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं दिखाई दी, तो वह अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए कड़े आदेश जारी करेगा। यह चेतावनी हरिद्वार प्रशासन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

दरगाह की पवित्रता पर चोट, प्रशासन की चुप्पी बेहद संदिग्ध

कलियर दरगाह में रोजाना हजारों श्रद्धालु चढ़ावा चढ़ाते हैं। श्रद्धा और विश्वास से जुड़े इस स्थान पर पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोच्च होनी चाहिए। लेकिन आरोप है कि दरगाह का ही एक सुपरवाइजर लंबे समय से चढ़ावे की रकम में हेराफेरी कर रहा था। आंतरिक जांच में उसकी लिप्तता साबित भी हो चुकी है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सबूत सामने आने के बाद भी न उसे हटाया गया, न उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई। इससे बड़ा सवाल उठ रहा है—क्या प्रशासन किसी दबाव में है?
क्या किसी का संरक्षण आरोपी को बचा रहा है?
या फिर प्रशासन को इस पवित्र स्थल की प्रतिष्ठा की कोई परवाह नहीं?इस लापरवाही ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

भदौरिया परिवार की शिकायत पर हिला आयोग

इस पूरे मामले को सामने लाने का श्रेय अरुण भदौरिया एडवोकेट, कमल भदौरिया एडवोकेट और चेतन भदौरिया (LLB छात्र) को जाता है। जगजीतपुर, हरिद्वार के ये तीनों सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से दरगाह में हो रही अनियमितताओं पर नजर बनाए हुए थे।

इन्होंने 16 अक्टूबर 2025 को उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में एक विस्तृत शिकायत दाखिल की। शिकायत में कहा गया कि पवित्र दरगाह की आस्था से कमाई गई धनराशि से गबन करना सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं का अपमान है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने तुरंत जिलाधिकारी हरिद्वार से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर दी। आयोग ने रिपोर्ट में तथ्य, सबूत और अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।

आयोग का सख्त अल्टीमेटम—कार्रवाई नहीं तो आदेश पक्के

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने 18 दिसंबर 2025 तक

  • ठोस कार्रवाई,
  • आरोपी के खिलाफ कदम,
  • और गबन की पूरी जांच रिपोर्ट

नहीं भेजी, तो आयोग स्वयं दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर देगा।

आयोग की यह सख्ती साफ करती है कि अब इस मामले को न दबाया जा सकेगा, न ही अनदेखा। कलियर जैसे बड़े धार्मिक स्थल की पवित्रता से खिलवाड़ को आयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने को तैयार नहीं।

शिकायतकर्ताओं की मांग—गिरफ्तारी तक होनी चाहिए कार्रवाई

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपी सुपरवाइजर पर केवल विभागीय नहीं बल्कि आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गबन जैसे गंभीर अपराध में बचाव की कोई गुंजाइश ही नहीं है।

उनका आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई के चलते आरोपी आराम से घूम रहा है, जबकि उसके खिलाफ तुरंत निलंबन, गिरफ्तारी और विस्तृत आर्थिक ऑडिट जरूरी था।

18 दिसंबर बनेगा निर्णायक—प्रशासन की परीक्षा शुरू

कलियर दरगाह में हुए चढ़ावे के गबन का मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है। धार्मिक आस्था से जुड़े इस पवित्र स्थान पर भ्रष्टाचार की बू समाज के लिए शर्मनाक है।

अब सबकी नजरें 18 दिसंबर 2025 पर हैं। उसी दिन पता चलेगा कि हरिद्वार प्रशासन

  • आरोपी पर कार्रवाई करेगा
    या
  • मामले को टालता रहेगा

यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो मानवाधिकार आयोग द्वारा कड़े आदेश लगभग तय माने जा रहे हैं।

यह मामला बताता है कि जहां लाखों लोग सिर झुकाकर श्रद्धा अर्पित करते हैं, वहां भ्रष्टाचार की एक छोटी-सी भी दरार विश्वास को तोड़ने वाली होती है। कलियर की पवित्र जमीन पर हुए गबन ने न सिर्फ धार्मिक आस्था को आहत किया है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि आने वाली तारीखें इस पवित्र स्थल के सम्मान को वापस दिला पाएंगी या नहीं।

Related Articles

Back to top button