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पहाड़ों की बेटी तृप्ति भट्ट की अद्भुत उड़ान,, 16 सरकारी नौकरियाँ छोड़कर IPS के रुप में देश की सेवा चुनी,, आज हरिद्वार की साहसी SP GRP, युवाओं की सबसे बड़ी प्रेरणा

इन्तजार रजा हरिद्वार- पहाड़ों की बेटी तृप्ति भट्ट की अद्भुत उड़ान,,

16 सरकारी नौकरियाँ छोड़कर IPS के रुप में देश की सेवा चुनी,,

आज हरिद्वार की साहसी SP GRP, युवाओं की सबसे बड़ी प्रेरणा

उत्तराखंड के शांत, سرसराते देवदार के जंगलों और स्वच्छ हवा से भरे अल्मोड़ा की पहाड़ियों में जन्मी-पली एक साधारण-सी लड़की… लेकिन सपने बिल्कुल असाधारण। यह कहानी है तृप्ति भट्ट की—उस बेटी की, जिसने अपने जज़्बे, हिम्मत और अटूट इच्छाशक्ति से वह हासिल किया, जिसे लाखों युवा सिर्फ सपना ही देख पाते हैं।

जिस उम्र में लोग एक सरकारी नौकरी के लिए सालों संघर्ष करते हैं, परीक्षा पर परीक्षा देते हैं, चयन होने पर जीवनभर उसी पर निर्भर रह जाते हैं, उसी उम्र में तृप्ति भट्ट ने कर दिखाया वो, जो किसी के लिए भी आसान नहीं—16 सरकारी नौकरियाँ ठुकराई, सिर्फ इसलिए… क्योंकि उनका सपना नौकरी नहीं, देश की वर्दी पहन सेवा करने का था।

✦ बचपन से ही ऊँचे सपनों वाली तृप्ति

अल्मोड़ा में पढ़ाई की शुरुआत बेर्शेबा स्कूल से और आगे की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई। पढ़ाई में हमेशा तेज, अनुशासित और आगे बढ़ने वाली तृप्ति ने अपनी लगन से पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग में प्रवेश पाया।

यहीं वह मुकाम आया जहां उनकी क्षमताओं ने बड़ी कंपनियों का ध्यान खींचा—मारुति सुज़ुकी, टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियों ने तृप्ति को कैंपस प्लेसमेंट में बेहतरीन पैकेज ऑफर किए।
लेकिन तृप्ति का जवाब था—“नहीं… मुझे कुछ और करना है।” किसी लड़की के लिए इतने बड़े पैकेज ठुकराना आसान नहीं, लेकिन तृप्ति ने कभी अपने लक्ष्य से नज़र नहीं हटाई।

✦ NTPC, ISRO… और फिर भी मन में सिर्फ एक आवाज़: “IPS बनना है”

इंजीनियरिंग के बाद तृप्ति NTPC जैसी प्रतिष्ठित संस्था में असिस्टेंट मैनेजर बनीं। स्थायी नौकरी, शानदार वेतन, सब कुछ था—लेकिन तृप्ति के मन में सिर्फ एक ही आग जल रही थी—UPSC की।

इसके कुछ समय बाद आया एक ऐसा ऑफर, जिसे लाखों युवा जिंदगी का सबसे बड़ा अवसर मानते—
ISRO में सैटेलाइट ऑफिसर का ऑफर।
यह नौकरी अपने आप में सम्मान, प्रतिष्ठा और स्थायित्व का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन तृप्ति भट्ट ने फिर वही किया—
“सपनों को नौकरी पर भारी रखा!”

✦ UPSC परीक्षा—पहले ही प्रयास में कमाल

साल 2013…
तृप्ति ने UPSC की परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में शानदार सफलता पाते हुए AIR 165 हासिल किया।
यह सिर्फ सफलता नहीं थी, यह उस दृढ़ निश्चय, उस मेहनत और उस त्याग का परिणाम था, जिसने एक युवती को असंभव को संभव करने का साहस दिया। तृप्ति को उत्तराखंड कैडर मिला—अपने ही पहाड़ों की सेवा करने का सौभाग्य। यह वही क्षण था, जब उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना साकार होते देखा—“IPS तृप्ति भट्ट”

✦ सेवा का सफर—हर पद पर मिसाल

तृप्ति भट्ट की पहली तैनाती देहरादून में हुई। शांत स्वभाव, लेकिन जब बात कानून और जनता की सुरक्षा की हो, तो सख्त और निर्णायक—यही उनकी पहचान बनी।

इसके बाद वे चमोली की एसपी रहीं, जहाँ कठोर भौगोलिक परिस्थितियों में पुलिसिंग करना आसान काम नहीं। लेकिन तृप्ति ने इसे चुनौती की तरह स्वीकार किया।

फिर वे SDRF टिहरी गढ़वाल की कमांडर बनीं—आपदा के समय सबसे पहले पहुंचने वाली टीम की कमान तृप्ति जैसी अधिकारी के हाथों में होना अपने आप में जनता के लिए भरोसा था। देहरादून में उन्होंने SP इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी के रूप में भी शानदार काम किया।
और आज— तृप्ति भट्ट हरिद्वार की SP GRP हैं, जहाँ रेलवे पुलिस की कमान संभालते हुए यात्रियों की सुरक्षा, संवेदनशील मामलों की जांच और टीम को मजबूत नेतृत्व देना वे बखूबी निभा रही हैं।

✦ फिटनेस और खेल—तृप्ति हर मैदान की स्टार

तृप्ति भट्ट सिर्फ एक बेहतरीन अधिकारी ही नहीं, बल्कि खेलों और फिटनेस की भी मिसाल हैं।

  • मैराथन गोल्ड मेडलिस्ट
  • राज्य स्तरीय बैडमिंटन चैंपियन
  • ताइक्वांडो और कराटे में प्रशिक्षित

IPS की कठोर ड्यूटी के बावजूद वे फिटनेस को लेकर बेहद अनुशासित हैं और युवाओं को भी प्रेरित करती हैं कि—“फिट रहना ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी कुंजी है।”

✦ तृप्ति भट्ट—एक नाम, एक प्रेरणा, एक साहस

आज जब युवा असफलताओं, दबाव और अस्थिरता से जूझते हैं, तृप्ति भट्ट जैसी कहानियाँ उन्हें यह भरोसा देती हैं कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, मेहनत सच्ची हो और हिम्मत अटूट हो—
तो कोई भी मंज़िल असंभव नहीं।

उनकी कहानी सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि एक संदेश है—
“जब दिल में देश हो… तब हर नौकरी छोटी पड़ जाती है।”हरिद्वार से लेकर पूरे उत्तराखंड और देशभर के युवाओं की जुबान पर आज एक ही नाम है—
IPS तृप्ति भट्ट। उनके जज़्बे को सलाम।
वे सिर्फ एक अधिकारी नहीं, एक प्रेरणा, एक उदाहरण और उत्तराखंड की शान हैं।

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