देहरादून में अवैध शस्त्र लाइसेंसों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई,, आयुध (संशोधन) नियम-2019 के तहत 827 लाइसेंस निरस्त, प्रशासन का सख़्त संदेश,, नियमों से बाहर हथियार रखने वालों और UIN विहीन लाइसेंसों पर चला प्रशासन का चाबुक

इन्तजार रजा हरिद्वार- देहरादून में अवैध शस्त्र लाइसेंसों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई,,
आयुध (संशोधन) नियम-2019 के तहत 827 लाइसेंस निरस्त, प्रशासन का सख़्त संदेश,,
नियमों से बाहर हथियार रखने वालों और UIN विहीन लाइसेंसों पर चला प्रशासन का चाबुक

देहरादून।
जिला प्रशासन देहरादून ने अवैध, नियमविरुद्ध और पोर्टल पर अपंजीकृत शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए कुल 827 शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई आयुध (संशोधन) नियम-2019 के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को दो से अधिक हथियार रखने की अनुमति नहीं है। प्रशासन की इस निर्णायक पहल को जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और हथियारों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख़्ती
जिला प्रशासन द्वारा की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि कई शस्त्र लाइसेंसधारक वर्षों से नियमों की अनदेखी कर रहे थे। जांच के दौरान 54 ऐसे लाइसेंसधारक पाए गए, जिनके पास निर्धारित सीमा से अधिक हथियार मौजूद थे। प्रशासन द्वारा इन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन नोटिस के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए इन सभी के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आयुध नियमों का उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हथियारों का उपयोग कानून के दायरे में और सार्वजनिक सुरक्षा के हित में ही हो। तय सीमा से अधिक हथियार रखना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सामाजिक और सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ते हैं।
UIN के बिना चल रहे थे 773 लाइसेंस
इस कार्रवाई का दूसरा और सबसे बड़ा पहलू UIN (Unique Identification Number) से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि 773 शस्त्र लाइसेंस ऐसे थे जिनमें UIN जनरेट ही नहीं था। जबकि स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी वैध शस्त्र लाइसेंसों का राष्ट्रीय पोर्टल पर पंजीकरण और UIN अनिवार्य है।
प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना UIN के कोई भी शस्त्र लाइसेंस मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे लाइसेंस न केवल अवैध की श्रेणी में आते हैं, बल्कि इनके माध्यम से हथियारों की ट्रैकिंग भी संभव नहीं हो पाती, जिससे कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी होती हैं।
पोर्टल आधारित व्यवस्था को किया गया अनिवार्य
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब केवल वही शस्त्र लाइसेंस वैध माने जाएंगे, जो सरकारी पोर्टल पर पूरी तरह पंजीकृत होंगे और जिनमें सभी नियमों का पालन किया गया होगा। इसमें हथियारों की संख्या, विवरण, नवीनीकरण की स्थिति और UIN की अनिवार्यता शामिल है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल आधारित व्यवस्था से शस्त्र लाइसेंसों की पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। इससे अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ अपराधों में हथियारों के दुरुपयोग को भी रोका जा सकता है।
कानून-व्यवस्था को लेकर सख़्त रुख
देहरादून जिला प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि शस्त्र लाइसेंस कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक नियंत्रित और सशर्त अनुमति है, जिसे केवल नियमों का पालन करने वालों को ही दिया जाना चाहिए।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में भी शस्त्र लाइसेंसों की निरंतर समीक्षा और जांच की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही, लाइसेंसधारकों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपने लाइसेंस का पोर्टल पर पंजीकरण कराएं और नियमों के अनुरूप ही हथियार रखें।
जनहित में लिया गया बड़ा फैसला
प्रशासन की इस कार्रवाई को आमजन की सुरक्षा के लिहाज से एक सकारात्मक और साहसिक निर्णय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख़्त कार्रवाइयों से न केवल अवैध हथियारों पर नियंत्रण होगा, बल्कि समाज में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।
देहरादून जिला प्रशासन ने अंत में यह दोहराया कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में भी अवैध गतिविधियों के खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
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