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एआरटीओ नेहा झा की पहल से सड़क सुरक्षा को नई दिशा,, पतंजलि यूनिवर्सिटी में NCC–NDRF के साथ फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण,, युवाओं को जीवन रक्षक कौशल सिखाकर दुर्घटनाओं पर अंकुश का प्रयास

इन्तजार रजा हरिद्वार- एआरटीओ नेहा झा की पहल से सड़क सुरक्षा को नई दिशा,,

पतंजलि यूनिवर्सिटी में NCC–NDRF के साथ फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण,,

युवाओं को जीवन रक्षक कौशल सिखाकर दुर्घटनाओं पर अंकुश का प्रयास

हरिद्वार | 06 जनवरी 2026

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग हरिद्वार द्वारा एक सराहनीय और प्रभावी पहल की गई। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) नेहा झा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में पतंजलि यूनिवर्सिटी, औरंगाबाद में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम एवं फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम National Cadet Corps (NCC) एवं National Disaster Response Force (NDRF) के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसे व्यावहारिक कौशल से लैस करना रहा, जिससे वे दुर्घटना के समय प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले (First Responder) बनकर किसी की जान बचा सकें।

एआरटीओ नेहा झा बोलीं— सड़क सुरक्षा जनभागीदारी से ही संभव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एआरटीओ नेहा झा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन विभाग या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा यानी गोल्डन आवर बेहद महत्वपूर्ण होता है और यदि इस दौरान सही सहायता मिल जाए, तो कई अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

नेहा झा ने कहा कि युवाओं को फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में प्रशिक्षित करना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे सबसे अधिक सक्रिय, जागरूक और संवेदनशील वर्ग हैं, जो आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेकर सही कदम उठा सकते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं के कारणों पर गहन मंथन

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों—ओवरस्पीडिंग, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, मोबाइल फोन का उपयोग, नशे की हालत में वाहन चलाना तथा हेलमेट व सीट बेल्ट न पहनना—पर विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि अधिकतर दुर्घटनाएं मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं, जिन्हें जागरूकता और प्रशिक्षण से काफी हद तक रोका जा सकता है।

NDRF ने दिया व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण

NDRF के प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को फर्स्ट एड, सीपीआर (CPR), अत्यधिक रक्तस्राव रोकने, घायल को सुरक्षित बाहर निकालने, स्ट्रेचर के सही उपयोग सहित कई महत्वपूर्ण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही आपदा और सड़क दुर्घटनाओं के दौरान अपनाए जाने वाले स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने बेहद उपयोगी बताया।

प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया कि गलत तरीके से मदद करने से घायल की स्थिति और गंभीर हो सकती है, इसलिए सही प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।

NCC कैडेट्स और छात्रों में दिखा जबरदस्त उत्साह

कार्यक्रम में NCC कैडेट्स एवं पतंजलि यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं में सीखने और समाज के लिए कुछ करने का उत्साह साफ नजर आया। प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं यातायात नियमों का पालन करेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे।

सुरक्षित यातायात की शपथ के साथ समापन

कार्यक्रम के समापन पर एआरटीओ नेहा झा की उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों को हेलमेट व सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, ओवरस्पीडिंग से बचने, नशे में वाहन न चलाने और यातायात नियमों के पूर्ण पालन की शपथ दिलाई गई।

नेहा झा ने कहा कि परिवहन विभाग भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार करेगा, ताकि हरिद्वार को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श जनपद बनाया जा सके।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत कदम

यह आयोजन न केवल एक जागरूकता कार्यक्रम रहा, बल्कि युवाओं को जिम्मेदार नागरिक और प्रशिक्षित प्रथम सहायक के रूप में तैयार करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ। एआरटीओ नेहा झा की सक्रिय भूमिका और नेतृत्व ने इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया।

साफ है कि यदि ऐसे प्रयास लगातार जारी रहे, तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और अनमोल जिंदगियों को बचाना संभव हो सकेगा।

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