जनसेवा केन्द्र की आड़ में फर्जीवाड़े का साम्राज्य ध्वस्त,, कप्तान नवनीत सिंह की सख्ती से पिरान कलियर में बड़ा खुलासा,, कूटरचित जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाला आरोपी गिरफ्तार

इन्तजार रजा हरिद्वार- जनसेवा केन्द्र की आड़ में फर्जीवाड़े का साम्राज्य ध्वस्त,,
कप्तान नवनीत सिंह की सख्ती से पिरान कलियर में बड़ा खुलासा,,
कूटरचित जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाला आरोपी गिरफ्तार
हरिद्वार में चल रहे सघन सत्यापन अभियान के बीच एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अभियान के दौरान कोतवाली पिरान कलियर पुलिस ने जनसेवा केन्द्र की आड़ में चल रहे फर्जी दस्तावेज़ों के कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया। आरोपी युवक न सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र बल्कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य कागजात भी कूटरचित तरीके से तैयार कर रहा था।
होटल के कमरे में चल रहा था ‘फर्जीवाड़े’ का दफ्तर
दिनांक 19 फरवरी 2026 को पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई की संयुक्त टीम ने पिरान कलियर क्षेत्र में चारमीनार के पीछे स्थित अलीशान होटल में छापेमारी की। यहां “शाहिदा मानवाधिकार जनसेवा केन्द्र” के बोर्ड लगे कमरे में एक युवक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया गया।मौके पर युवक विभिन्न राज्यों के लोगों के जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र तैयार करता मिला। पूछताछ में उसने खुद को बिहार के थाना साहिबगंज क्षेत्र का निवासी बताया और स्वयं को मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष होने का दावा किया।
लेकिन जब पुलिस ने उसके द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। सभी प्रमाण पत्रों पर सीरियल नंबर “1” अंकित था और उन पर उत्तराखण्ड सरकार का लोगो छपा हुआ था। कई प्रमाण पत्र हरिद्वार में निवासरत व्यक्तियों के नाम पर थे, जबकि लेटर पैड चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग नगर निगम रूद्रपुर का इस्तेमाल किया गया था।नगर पंचायत पिरान कलियर के अधिशासी अधिकारी से व्हाट्सएप के माध्यम से सत्यापन कराया गया तो स्पष्ट हो गया कि प्रमाण पत्रों पर लगे हस्ताक्षर और मोहरें पूरी तरह फर्जी हैं। मानवाधिकार आयोग का पहचान पत्र भी जांच में नकली पाया गया।
गूगल और ऑनलाइन माध्यम से बनाता था फर्जी दस्तावेज
कड़ी पूछताछ में आरोपी शहनवाज पुत्र मौ0 प्यारे (उम्र 24 वर्ष), निवासी ग्राम दाउदपुर थाना साहिबगंज जिला मुजफ्फरपुर बिहार, ने स्वीकार किया कि वह कुछ दस्तावेज गूगल के माध्यम से ऑनलाइन तैयार करता था और कुछ ऑनलाइन मंगवाकर प्रिंट निकालता था।
जानकारी के अनुसार आरोपी अब तक लगभग एक हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र और अन्य कागजात बना चुका है। यह फर्जी दस्तावेज भविष्य में गंभीर आपराधिक गतिविधियों का आधार बन सकते थे।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में सामान बरामद किया, जिसमें शामिल हैं:
- 45 कूटरचित जन्म प्रमाण पत्र
- एक लैपटॉप व चार्जर
- एक माउस
- एक मोबाइल फोन (Redmi)
- 06 आधार कार्ड
- 07 अलग-अलग मोहरें
- मानवाधिकार आयोग का फर्जी पहचान पत्र
इस मामले में कोतवाली पिरान कलियर में मु0अ0सं0-29/2026 धारा 336(3), 338, 339 बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
कप्तान की सख्ती से अपराधियों में खलबली
हरिद्वार में चल रहे इस सघन सत्यापन अभियान की कमान एसएसपी नवनीत सिंह के हाथों में है। उनके निर्देश पर जिलेभर में लगातार चेकिंग और सत्यापन की कार्रवाई की जा रही है।
कोतवाली पिरान कलियर पुलिस टीम, जिसमें एसओ रविन्द्र कुमार, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुनील पंत, उपनिरीक्षक उपेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल रविन्द्र वालियान, कांस्टेबल जितेन्द्र सिंह, चालक नीरज राणा और स्थानीय अभिसूचना इकाई की टीम शामिल रही, ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
मुख्यमंत्री और डीजीपी के निर्देशों के अनुरूप चल रहे इस अभियान ने साफ कर दिया है कि हरिद्वार पुलिस अब किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

बड़ा सवाल: कितने लोग बने इस जाल का शिकार?
सबसे गंभीर पहलू यह है कि आरोपी द्वारा बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज किन-किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हुए होंगे? क्या इन कागजातों के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया गया? क्या किसी आपराधिक गतिविधि में इनका प्रयोग हुआ?
यह जांच का विषय है और पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की तैयारी में है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।
हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी तंत्र को चूना लगाने वालों पर अब कड़ी नजर है। जनसेवा की आड़ में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ यह कार्रवाई एक चेतावनी है—कानून के लंबे हाथ देर-सवेर अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।
पिरान कलियर में हुआ यह भंडाफोड़ न सिर्फ पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि सख्ती और निरंतर निगरानी बनी रहे तो संगठित फर्जीवाड़े की जड़ें भी उखाड़ी जा सकती हैं।



