जनता के सुझावों के आधार पर बनेगा राज्य का बजट,, सरकार ने शुरू की भागीदारी आधारित बजट प्रक्रिया, हर वर्ग से मांगे गए सुझाव,, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले – “जनभावनाओं के अनुरूप होगा विकास का खाका”

इन्तजार रजा हरिद्वार- जनता के सुझावों के आधार पर बनेगा राज्य का बजट,,
सरकार ने शुरू की भागीदारी आधारित बजट प्रक्रिया, हर वर्ग से मांगे गए सुझाव,,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले – “जनभावनाओं के अनुरूप होगा विकास का खाका”
देहरादून/हरिद्वार।
राज्य सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के बजट को लेकर एक नई पहल की शुरुआत की है। इस बार बजट केवल सरकारी फाइलों और विभागीय बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता के सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता, सहभागिता और जन-अपेक्षाओं के अनुरूप विकास सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा।
ने स्पष्ट कहा कि “राज्य का बजट जनता की आकांक्षाओं का दस्तावेज होता है। जब तक इसमें आम नागरिक की आवाज शामिल नहीं होगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले से सुझाव एकत्र कर प्राथमिकता के आधार पर बजट में शामिल किए जाएं।
ग्राम पंचायत से लेकर शहर तक – हर स्तर पर संवाद
सरकार ने बजट निर्माण प्रक्रिया को सहभागी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल, ई-मेल, जिला स्तरीय बैठकों और जनसंवाद कार्यक्रमों की व्यवस्था की है। ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, व्यापारिक संगठनों, महिला समूहों, युवाओं, किसानों और उद्योगपतियों से अलग-अलग श्रेणियों में सुझाव मांगे जा रहे हैं।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, स्वरोजगार, बुनियादी ढांचा और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आम नागरिक सड़क, पेयजल, बिजली, अस्पताल, स्कूल, रोजगार और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं पर अपने सुझाव दे सकते हैं।
सरकार की मंशा है कि हर वर्ग की जरूरतों को समझते हुए एक संतुलित और दूरदर्शी बजट तैयार किया जाए। इसके लिए जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ बैठक कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करें।
युवाओं और महिलाओं पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बजट में युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। स्वरोजगार योजनाओं, स्टार्टअप नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूती देने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि यदि युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर मिलें तो पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों के विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी बजट में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधे जुड़ रही जनता
राज्य सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाया है। ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव सीधे वित्त विभाग तक पहुंचा सकता है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के माध्यम से भी सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त सुझावों का विश्लेषण कर उन्हें श्रेणियों में बांटा जाएगा और व्यवहारिक तथा जनहित से जुड़े प्रस्तावों को बजट में शामिल किया जाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि जनता का सरकार पर विश्वास भी मजबूत होगा।
विकास का रोडमैप तैयार करने की कवायद
राज्य सरकार आगामी वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक विकास योजना भी तैयार कर रही है। बजट को केवल वार्षिक वित्तीय दस्तावेज न मानकर इसे विकास का रोडमैप बनाने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो राज्य में सुशासन की नई मिसाल स्थापित हो सकती है। जनता की भागीदारी से तैयार बजट योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहयोग बढ़ेगा।
जनभागीदारी से सशक्त होगा लोकतंत्र
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता की भागीदारी में निहित है। जब सरकार बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आम नागरिकों से सुझाव लेती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपील की है कि अधिक से अधिक लोग अपने सुझाव दें ताकि राज्य का बजट वास्तव में “जनता का बजट” बन सके।
अब देखना यह होगा कि जनता से प्राप्त सुझावों को किस हद तक बजट में स्थान मिलता है और आने वाला बजट राज्य के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
राज्य की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह पहल केवल घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि धरातल पर भी सार्थक परिणाम दे।



