पथरी क्षैत्र के जंगलों में खैर के कीमती पेड़ों की चोरी से हड़कंप,, बीते दिनों रातों-रात काट ले गए लाखों की लकड़ी, जंगल में मिले सिर्फ ठूंठ वन विभाग ने दर्ज किया मुकदमा, ग्रामीणों में रोष – सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की उठी मांग,, तस्करों ने खैर के लगभग 3 से 4 बड़े पेड़ों को काटा, जिनका अनुमानित वजन करीब 50 से 60 कुंतल बताया जा रहाइनकी कीमत करीब 5 से 6 लाख रुपये आंकी जा रही

इन्तजार रजा हरिद्वार- पथरी क्षैत्र के जंगलों में खैर के कीमती पेड़ों की चोरी से हड़कंप,,
बीते दिनों रातों-रात काट ले गए लाखों की लकड़ी, जंगल में मिले सिर्फ ठूंठ
वन विभाग ने दर्ज किया मुकदमा, ग्रामीणों में रोष – सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की उठी मांग,,
तस्करों ने खैर के लगभग 3 से 4 बड़े पेड़ों को काटा, जिनका अनुमानित वजन करीब 50 से 60 कुंतल बताया जा रहाइनकी कीमत करीब 5 से 6 लाख रुपये आंकी जा रही
हरिद्वार। जनपद हरिद्वार के पथरी क्षेत्र स्थित जंगल में खैर के कीमती पेड़ों की अवैध कटाई और चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि 14 मार्च की रात अज्ञात लकड़ी तस्करों ने जंगल में घुसकर खैर के कई पेड़ों को काट लिया और उन्हें मौके से चोरी कर फरार हो गए। सुबह जब स्थानीय ग्रामीण जंगल की ओर पहुंचे तो वहां केवल कटे हुए पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दिए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तस्करों ने खैर के लगभग 3 से 4 बड़े पेड़ों को काटा, जिनका अनुमानित वजन करीब 50 से 60 कुंतल बताया जा रहा है। बाजार में इनकी कीमत करीब 5 से 6 लाख रुपये आंकी जा रही है। इस घटना से जहां सरकार को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंची है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल में इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी काटकर ले जाना बिना किसी संगठित गिरोह के संभव नहीं है। इस कारण क्षेत्र में सक्रिय लकड़ी तस्करों के बड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश, पहले भी हो चुकी हैं कई घटनाएं
पथरी और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि जंगल में कीमती पेड़ों की चोरी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार खैर और चंदन जैसे बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई के मामले सामने आ चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद वन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे लकड़ी तस्करों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जंगल में नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत होती तो इतनी बड़ी चोरी संभव नहीं थी।
इस घटना के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जंगल केवल सरकार की संपत्ति ही नहीं बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर भी है। यदि इस तरह पेड़ों की कटाई जारी रही तो आने वाले समय में जंगल और पर्यावरण को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता ने DFO को दी शिकायत, जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मौ. सलीम, निवासी ग्राम घिस्सुपुरा, पोस्ट धनपुरा, थाना पथरी ने प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) हरिद्वार को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है।
शिकायत पत्र में उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने जंगल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, नियमित गश्त बढ़ाने और लकड़ी तस्करों के खिलाफ अभियान चलाने की भी मांग की है।
मौ. सलीम का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि खैर जैसे कीमती पेड़ पर्यावरण और वन संपदा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिनकी अवैध कटाई पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।
वन विभाग ने दर्ज किया मुकदमा, आरोपियों की तलाश जारी
इस मामले में शिशपाल सिंह, रेंजर हरिद्वार ने बताया कि खैर के पेड़ काटे जाने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में पेड़ों की अवैध कटाई की पुष्टि हुई है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। वन विभाग की टीम तस्करों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
रेंजर शिशपाल सिंह ने कहा कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जंगल में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की भी योजना बनाई जा रही है।
पर्यावरण और वन संपदा के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि खैर के पेड़ केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। खैर की लकड़ी औषधीय और औद्योगिक उपयोग में आती है, इसलिए इसकी बाजार में भारी मांग रहती है। यही कारण है कि लकड़ी तस्कर अक्सर खैर और चंदन जैसे पेड़ों को निशाना बनाते हैं।
यदि जंगलों में इस तरह की अवैध कटाई पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इससे पर्यावरण संतुलन पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। पेड़ों की कटाई से जंगलों का क्षेत्र घटता है, वन्यजीवों का आवास प्रभावित होता है और जलवायु संतुलन पर भी असर पड़ता है।
जल्द कार्रवाई की मांग
पथरी जंगल में खैर के पेड़ों की चोरी ने एक बार फिर वन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जंगलों को बचाने के लिए सख्त निगरानी, नियमित गश्त और लकड़ी तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
अब सभी की निगाहें वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस मामले में दोषियों तक कब पहुंचा जाता है और जंगलों को तस्करों से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।



