पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अरविंद पांडे पर प्रशासन का शिकंजा,, विधायक अरविंद पांडेय के घर पर चस्पा हुआ ध्वस्तीकरण नोटिस, 15 दिन में खाली करने के निर्देश,, अदालत के आदेशों पर कार्रवाई, 128 बीघा सीलिंग भूमि पर सरकारी कब्जा दर्ज

इन्तजार रजा हरिद्वार- पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक अरविंद पांडे पर प्रशासन का शिकंजा,,
विधायक अरविंद पांडेय के घर पर चस्पा हुआ ध्वस्तीकरण नोटिस, 15 दिन में खाली करने के निर्देश,,
अदालत के आदेशों पर कार्रवाई, 128 बीघा सीलिंग भूमि पर सरकारी कब्जा दर्ज

बाजपुर/केलाखेड़ा (उधम सिंह नगर), 20 जनवरी 2026।
उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचाने वाला मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक अरविंद पांडे पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कराने के आरोप अब प्रशासनिक कार्रवाई में तब्दील हो गए हैं। तहसील प्रशासन ने न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में विधायक पांडे के आवास पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा कर दिया है। नोटिस में 15 दिनों के भीतर सरकारी भूमि खाली करने और अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दबाव या निर्णय का परिणाम नहीं, बल्कि अदालत के आदेशों का सीधा पालन है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। एक बुजुर्ग विधवा द्वारा लगाए गए भूमि हड़पने के आरोपों के बाद प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा, जहां विभिन्न स्तरों पर सुनवाई के बाद सीलिंग भूमि से अवैध कब्जा हटाने के आदेश पारित हुए। इन्हीं आदेशों के तहत अब प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की है।
नोटिस चस्पा होते ही क्षेत्र में हड़कंप
शुक्रवार को एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा के नेतृत्व में राजस्व, चकबंदी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ केलाखेड़ा क्षेत्र के गांव बिजपुरी और गुमसानी पहुंची। अधिकारियों के पहुंचते ही इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टीम ने सीलिंग के दायरे में आने वाली करीब 128 बीघा भूमि पर सरकारी कब्जा दर्ज करते हुए संबंधित स्थलों पर नोटिस चस्पा किए। इसी कार्रवाई के तहत विधायक अरविंद पांडे के आवास पर भी नोटिस लगाया गया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया।
सीलिंग भूमि पर बड़े-बड़े निर्माण
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि सीलिंग सीमा के अंतर्गत आने वाली भूमि पर कई बड़े निर्माण खड़े हैं। इनमें चार बीएड कॉलेज, विद्या ज्योति कॉलेज, एक निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज सहित अन्य व्यावसायिक और आवासीय संरचनाएं शामिल हैं। इसी क्षेत्र में वह भूमि भी आती है, जिस पर बुजुर्ग विधवा परमजीत कौर ने कब्जा किए जाने का आरोप लगाया था। राजस्व और चकबंदी कर्मियों ने अभिलेखों के आधार पर जमीन की पैमाइश और हदबंदी की, जिसमें स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि राज्य सरकार की संपत्ति है।
अदालत के आदेशों का हवाला
तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में दायर सिविल अपील संख्या 662/1995 तथा हाईकोर्ट में योजित रिट याचिका संख्या 2037/2000 में पारित आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। अपर जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा सीलिंग वाद में दिए गए निर्णय के तहत गांव बिजपुरी के खाता संख्या 17, खसरा संख्या 6/2 (कुल 4.047 हेक्टेयर/64 बीघा) और गांव गुमसानी के खाता संख्या 93, खसरा संख्या 334/4 मिन (4.047 हेक्टेयर/64 बीघा) भूमि को अतिरिक्त सीलिंग भूमि घोषित किया गया है। इसी भूमि पर अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
15 दिन का अल्टीमेटम
प्रशासन ने भूमि पर काबिज सभी हितबद्ध व्यक्तियों—जिनमें रघुवीर सिंह, जसवीर सिंह, राजपाल सिंह, परमजीत कौर, रणजीत सिंह, अवतार सिंह, सतवंत सिंह समेत अन्य शामिल हैं—को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर स्वयं कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा के बाद यदि कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक अरविंद पांडे बीते समय में कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ बयान देकर सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में उनके आवास पर ध्वस्तीकरण नोटिस चस्पा होना राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि प्रशासन और एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा ने दो टूक कहा है कि इस कार्रवाई में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है और न ही किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह से न्यायालय के आदेशों का पालन है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें अगले 15 दिनों पर टिकी हैं। यदि तय अवधि में अवैध कब्जे नहीं हटाए गए, तो प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक दृढ़ता का संकेत दे रहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर रहा है कि अदालत के आदेशों के सामने पद और राजनीतिक हैसियत भी आड़े नहीं आएगी। उत्तराखंड में यह कार्रवाई आने वाले दिनों में एक बड़ी नजीर के रूप में देखी जा रही है।



