दरगाह पिरान कलियर की गोलक गिनती में हुई थी गबन गड़बड़ी! क्यों भाग रहे जिम्मेदार दरगाह के दिग्गज और ऊंचे रसुखदार सुपरवाइजर पर जेब में पैसे डालने का आरोप, लेकिन कार्रवाई अब भी अधर में लटकी,, मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला, लेकिन प्रशासनिक चुप्पी क्यों?,, स्पष्टीकरण असंतोषजनक, कार्रवाई को लेकर लिखित ठोस दलील फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं एक सवाल?,, क्या नये सीईओ अब पुरानी गबन की फाइलों से ताल्लुक नहीं रखेंगे,, जनता पूछ रही है जवाब-कार्रवाई या विश्वास पर संकट?,, अब डीएम कार्यालय पर टिकी इंसाफ की निगाहें,, क्या रुड़की से देहरादून तक चरमरा गया विश्वास
पवित्र दरगाह के साबरी गेस्ट हाउस में गोलक (दानपात्र) की गिनती के दौरान कथित रूप से धनराशि जेब में डालने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने स्पष्ट आरोपों और गवाहों के बयानों के बावजूद अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं

इन्तजार रजा हरिद्वार- दरगाह पिरान कलियर की गोलक गिनती में हुई थी गबन गड़बड़ी! क्यों भाग रहे जिम्मेदार
दरगाह के दिग्गज और ऊंचे रसुखदार सुपरवाइजर पर जेब में पैसे डालने का आरोप, लेकिन कार्रवाई अब भी अधर में लटकी,,
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला, लेकिन प्रशासनिक चुप्पी क्यों?,,
स्पष्टीकरण असंतोषजनक, कार्रवाई को लेकर लिखित ठोस दलील फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं एक सवाल?,,
क्या नये सीईओ अब पुरानी गबन की फाइलों से ताल्लुक नहीं रखेंगे,,
जनता पूछ रही है जवाब-कार्रवाई या विश्वास पर संकट?,,
अब डीएम कार्यालय पर टिकी इंसाफ की निगाहें,, क्या रुड़की से देहरादून तक चरमरा गया विश्वास

हरिद्वार जनपद के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल कर्मचारी विवादों में है। पवित्र दरगाह के साबरी गेस्ट हाउस में गोलक (दानपात्र) की गिनती के दौरान कथित रूप से धनराशि जेब में डालने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने स्पष्ट आरोपों और गवाहों के बयानों के बावजूद अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।

दिनांक 11 जुलाई 2025 को साबरी गेस्ट हाउस में गोलक गिनती का कार्य चल रहा था। आरोप है कि उसी दौरान सुपरवाइजर राव सिकन्दर हुसैन ने गिनी जा रही धनराशि में से कुछ पैसे उठाकर अपनी जेब में रख लिए। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार, लेखाकार सद्दाम और अमीन राहुल द्वारा उन्हें तलाशी के लिए रोका गया, लेकिन वे कथित रूप से वहां से तुरंत चले गए।
प्रबंधक द्वारा मौके पर पहुंचकर पूछताछ करने पर स्वयं राव सिकन्दर हुसैन ने यह स्वीकार किया कि “मेरी जेब में पैसे थे, इसलिए मैं वहां नहीं रुका।” जबकि नियम स्पष्ट है कि गिनती स्थल पर कोई भी व्यक्ति निजी धनराशि लेकर नहीं जा सकता। यह स्वयं में गंभीर प्रशासनिक उल्लंघन है।

स्पष्टीकरण असंतोषजनक, कार्रवाई को लेकर लिखित ठोस दलील फिर भी ठोस कार्रवाई नहीं एक सवाल?
कार्यालय पत्रांक 2527 दिनांक 11.07.2025 के माध्यम से स्पष्टीकरण तलब किया गया। 13.07.2025 को प्रस्तुत स्पष्टीकरण को जांच अधिकारियों ने असंतोषजनक माना। 14.07.2025 को पूरी आख्या मुख्य कार्यपालक अधिकारी/उपजिलाधिकारी/जिलाधिकारी हरिद्वार को भेजी गई।
मौके पर मौजूद गवाहों ने स्पष्ट किया कि सुपरवाइजर द्वारा ही यह कृत्य किया गया। इसके विपरीत केवल आरोपी इस एक व्यक्ति सुपरवाइजर राव सिकंदर ने तहसील कर्मीयों पर भी गबन का आरोप लगाकर मामले को मोड़ने की कोशिश की। ऐसे में सवाल उठता है—जब जांच में स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं तो मुकदमा दर्ज करने में देरी क्यों?
मानवाधिकार आयोग तक पहुंची है कलियर शरीफ दरगाह गोलक गबन कांड की शिकायत
इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार भदौरिया द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग, उत्तराखण्ड देहरादून में वाद संख्या 1444/35/6/2025 के तहत याचिका दायर की गई है। मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन सहित संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है।

स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि जांच के नाम पर समय बिताया जा रहा है। इतना ही नहीं, संबंधित कर्मचारियों को पुनः बहाल करने की कवायद भी चल रही है। अगर यह सच है तो यह न केवल प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल है, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़े दान की पारदर्शिता पर भी सीधा प्रहार है।
दरगाह की गोलक में आने वाला पैसा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यदि उसी में गड़बड़ी के आरोपों पर पर्दा डाला जाए तो यह आस्था के साथ विश्वासघात माना जाएगा। 
क्या नये सीईओ भी अब पुरानी गबन की फाइलों से ताल्लुक नहीं रखेंगे
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा पिछले गोलक गबन प्रकरण की फाइल से दूरी क्यों बनाई जा रही है? कलियर से लेकर रुड़की और देहरादून तक इस मामले की चर्चा है कि कार्रवाई की रफ्तार अचानक धीमी क्यों पड़ गई। क्या किसी दबाव में फाइल ठंडी की जा रही है? या फिर कोई “तुगलकी फरमान” लाकर मामले को रफा-दफा करने की तैयारी है?
यदि जांच निष्पक्ष है तो मुकदमा दर्ज करने और निलंबन जैसी कार्रवाई में देरी क्यों? और यदि आरोप निराधार हैं तो स्पष्ट सार्वजनिक रिपोर्ट जारी क्यों नहीं की जा रही?
जनता पूछ रही है जवाब
हरिद्वार की जनता और दरगाह से जुड़े अकीदतमंद यह जानना चाहते हैं कि—
- क्या गोलक गिनती की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है?
- क्या संबंधित अधिकारियों के ब्यान विधिवत दर्ज हुए?
- क्यों अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई?
- क्या दोषियों को बचाने का प्रयास हो रहा है?
धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि गिनती स्थल पर ही नियमों का उल्लंघन हो रहा है और आरोपी स्वयं स्वीकार कर रहा है कि उसकी जेब में पैसे थे, तो यह साधारण चूक नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है।
कार्रवाई या विश्वास पर संकट?
दरगाह पिरान कलियर जैसे पवित्र स्थल की साख दांव पर है। प्रशासन की चुप्पी और देरी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। यदि जल्द और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला केवल एक कर्मचारी की अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न बन जाएगा।
अब निगाहें जिलाधिकारी हरिद्वार और शासन पर टिकी हैं। क्या वे निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे, या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
जनता जवाब चाहती है—और वह भी जल्द। अब डीएम कार्यालय पर टिकी इंसाफ की निगाहें
🎙️एडवोकेट अरुण भदौरिया, हरिद्वार
“दरगाह पिरान कलियर कोई साधारण स्थान नहीं है, यह करोड़ों अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र है। अगर गोलक गिनती जैसे पवित्र और संवेदनशील कार्य में ही अनियमितता सामने आ रही है और जांच अधिकारी स्वयं लिखित में यह दर्ज कर रहे हैं कि सुपरवाइजर ने गिनती की रकम से पैसे उठाकर जेब में रखे, तो फिर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
मैंने यह मामला राज्य मानवाधिकार आयोग में इसलिए उठाया क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर लगातार टालमटोल की जा रही है। यदि कोई निर्दोष है तो सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दी जाए, और यदि दोषी है तो तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जांच के नाम पर समय बिताया जा रहा है और अंदरखाने कर्मचारियों को बहाल करने की चर्चाएं चल रही हैं। यह सीधे-सीधे जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं—यदि शीघ्र निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो हम उच्च न्यायालय की शरण लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे। दरगाह की पवित्रता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।”
अधिवक्ता भदौरिया का यह बयान मामले को और गंभीर बना रहा है। अब जनता भी जानना चाहती है कि—
•जब जांच आख्या में स्पष्ट उल्लेख है तो कार्रवाई में देरी क्यों?
•क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच पूरी हो चुकी है?
•क्या संबंधित कर्मचारियों को संरक्षण मिल रहा है?
दरगाह की गोलक श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में यदि आरोपों के बावजूद सख्त कदम नहीं उठाए जाते तो यह पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।
अब देखना यह है कि हरिद्वार प्रशासन इस बयान और उठते सवालों के बाद क्या कदम उठाता है।



