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देहरादून में फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रही तीन विदेशी महिलाएं गिरफ्तार,, ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नेटवर्क की जांच शुरू,, नेपाल बॉर्डर से भारत में घुसपैठ और दिल्ली में बने फर्जी दस्तावेज, कई राज खुलने की संभावना

इन्तजार रजा हरिद्वार- देहरादून में फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रही तीन विदेशी महिलाएं गिरफ्तार,,

ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नेटवर्क की जांच शुरू,,

नेपाल बॉर्डर से भारत में घुसपैठ और दिल्ली में बने फर्जी दस्तावेज, कई राज खुलने की संभावना

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अवैध रूप से रह रही तीन विदेशी महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर एक बड़े फर्जी दस्तावेज नेटवर्क का खुलासा किया है। दून पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन क्रैकडाउन” के तहत की गई इस कार्रवाई में किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की तीन महिलाओं को पकड़ा गया है, जो लंबे समय से फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रही थीं।

पुलिस के अनुसार यह मामला सिर्फ अवैध रूप से रहने का नहीं बल्कि एक ऐसे संगठित नेटवर्क का संकेत भी देता है, जो विदेशी नागरिकों के लिए भारत में फर्जी पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करता है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए जांच को आगे बढ़ा रही है और कई संदिग्ध लोगों की तलाश की जा रही है।


सत्यापन के दौरान फ्लैट में मिली तीन विदेशी महिलाएं

देहरादून पुलिस द्वारा शहर में किरायेदारों और बाहरी लोगों के सत्यापन अभियान के दौरान यह मामला सामने आया। 28 मार्च को थाना रायपुर पुलिस टीम क्षेत्र में नियमित सत्यापन कर रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम को सांई कॉम्प्लेक्स के तीसरे फ्लोर पर स्थित एक फ्लैट में तीन विदेशी महिलाएं संदिग्ध परिस्थितियों में रहती हुई मिलीं।

जब पुलिस ने उनसे उनके दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी तो वे कोई वैध भारतीय या विदेशी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं। उनकी गतिविधियां भी संदिग्ध प्रतीत हो रही थीं, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।

थाने लाकर की गई पूछताछ में महिलाओं ने अपनी पहचान ईरीका (29 वर्ष, किर्गिस्तान), करीना (30 वर्ष, उज्बेकिस्तान) और निगोरा नीम (32 वर्ष, उज्बेकिस्तान) के रूप में बताई।

पुलिस ने जब उनके कमरे की तलाशी ली तो कई चौंकाने वाले दस्तावेज और सामान बरामद हुए। तलाशी के दौरान एक पासपोर्ट, तीन आधार कार्ड, दो पैन कार्ड, किर्गिस्तान का एक पहचान पत्र, एसबीआई बैंक की पासबुक, सात मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा बरामद की गई।

इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और अलग-अलग पहचान पत्र मिलने के बाद पुलिस को शक हुआ कि मामला सिर्फ अवैध निवास का नहीं बल्कि किसी बड़े नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।


वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रह रही थी किर्गिस्तान की महिला

पुलिस जांच में सामने आया कि किर्गिस्तान की रहने वाली ईरीका वर्ष 2023 में भारत आई थी। उसे एक साल का वीजा मिला हुआ था, लेकिन वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह भारत से वापस अपने देश नहीं गई।

वीजा समाप्त होने के बावजूद वह लगातार भारत में रह रही थी और बाद में उसने अपने परिचितों की मदद से फर्जी भारतीय दस्तावेज भी बनवा लिए थे।

वहीं दूसरी ओर उज्बेकिस्तान की रहने वाली करीना और निगोरा ने तो और भी अलग तरीका अपनाया। पुलिस के अनुसार ये दोनों महिलाएं नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थीं।

नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश करना कई विदेशी नागरिकों के लिए आसान रास्ता बन चुका है क्योंकि वहां सीमा पर निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है। इसी का फायदा उठाकर कई लोग बिना वैध वीजा या पासपोर्ट के भारत में घुसपैठ कर लेते हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तीनों महिलाओं की मुलाकात दिल्ली में हुई थी और वहीं पर उन्हें कुछ ऐसे लोग मिले जिन्होंने उन्हें फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाने में मदद की।

दिल्ली में ही उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्र तैयार किए गए थे ताकि वे भारत में आसानी से रह सकें और किसी को शक न हो।


पहले भी फर्जी दस्तावेज मामले में जेल जा चुकी है एक आरोपी

जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार उज्बेकिस्तान की रहने वाली निगोरा नीम पहले भी भारत में फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में गिरफ्तार हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि बिहार पुलिस ने उसे पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में जमानत पर रिहा होने के बाद भी वह भारत में ही रह रही थी और फिर से अवैध गतिविधियों में शामिल हो गई।

इस तथ्य ने पुलिस की जांच को और गंभीर बना दिया है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि इन विदेशी महिलाओं के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये महिलाएं सिर्फ अवैध रूप से रह रही थीं या फिर किसी अन्य गतिविधि में भी शामिल थीं।

सात मोबाइल फोन मिलने के बाद पुलिस उनके कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका संपर्क किन लोगों से था।


फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की तलाश में जुटी पुलिस

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर इन विदेशी महिलाओं के लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज किसने तैयार किए।

पुलिस को शक है कि दिल्ली और अन्य शहरों में ऐसा एक संगठित गिरोह सक्रिय है जो विदेशी नागरिकों को फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक दस्तावेज उपलब्ध कराता है।

इसी गिरोह की मदद से ये महिलाएं भारत में रह रही थीं और सामान्य नागरिकों की तरह अपनी पहचान बना चुकी थीं।

देहरादून पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन महिलाओं को किराए पर फ्लैट दिलाने और दस्तावेज बनवाने में मदद की।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है और जल्द ही बड़े खुलासे होने की संभावना है।


बीएनएस और इमिग्रेशन एक्ट के तहत दर्ज हुआ मुकदमा

थाना रायपुर पुलिस ने तीनों महिलाओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस अब उनसे गहन पूछताछ कर रही है और उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को कई एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।


ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत जारी है सत्यापन अभियान

देहरादून पुलिस द्वारा इन दिनों शहर में ऑपरेशन क्रैकडाउन चलाया जा रहा है। इसके तहत किरायेदारों, बाहरी लोगों और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करना और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मकान मालिकों से भी अपील की है कि वे अपने किरायेदारों का सत्यापन अवश्य कराएं और बिना दस्तावेज जांचे किसी को भी मकान किराए पर न दें।


जांच से खुल सकते हैं बड़े राज

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। मोबाइल फोन, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच से कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हो सकता है।

देहरादून में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अवैध तरीके से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों और उन्हें संरक्षण देने वाले नेटवर्क पर अब पुलिस की पैनी नजर है।

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