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राजनाथ सिंह, सीएम धामी, सीएम योगी, ऋतु खंडूड़ी समेत कई दिग्गजों का आज हरिद्वार आगमन हरिद्वार में हाईअलर्ट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात,, वीवीआईपी दौरे और भव्य संत सम्मेलन को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- राजनाथ सिंह, सीएम धामी, सीएम योगी, ऋतु खंडूड़ी समेत कई दिग्गजों का आज हरिद्वार आगमन

हरिद्वार में हाईअलर्ट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात,,

वीवीआईपी दौरे और भव्य संत सम्मेलन को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था,,

हरिद्वार शुक्रवार को पूरी तरह हाईअलर्ट मोड पर नजर आया। कारण था एक ओर भव्य धार्मिक आयोजन, दूसरी ओर देश और प्रदेश के शीर्ष वीवीआईपी का आगमन। केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण के जनपद पहुंचने के चलते प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए।

शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक पुलिस, पीएसी, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद रहीं। हरिद्वार के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि प्रशासन किसी भी तरह की चूक के मूड में नहीं है।

सप्तऋषि आश्रम में संत सम्मेलन और मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन

कार्यक्रम के तहत सप्तऋषि आश्रम मैदान, भारत माता मंदिर के निकट स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की मूर्ति स्थापना (प्राण-प्रतिष्ठा) एवं संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से अनेक संत-महात्मा, धर्माचार्य और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।

इस ऐतिहासिक आयोजन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संत सम्मेलन में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्कृति, राष्ट्र चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों पर विचार-विमर्श हुआ। आयोजन स्थल पर धार्मिक उल्लास के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद दिखाई दी।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज: सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना के प्रतीक

संत सम्मेलन में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज को सनातन संस्कृति, राष्ट्र चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन और विचार समाज को एकता, संस्कार और राष्ट्रभाव की दिशा में प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे संतों का मार्गदर्शन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जो समाज को जोड़ने का काम करती है। संतों के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं, जब समाज को नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सख्त जरूरत है।

रायवाला हेलीपैड से जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक कड़ा पहरा

वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए रायवाला हेलीपैड, सप्त सरोवर मार्ग, कार्यक्रम स्थल, भारत माता मंदिर क्षेत्र और जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। हर मार्ग पर बैरिकेडिंग, सघन चेकिंग और पास सिस्टम लागू किया गया।

एसएसपी हरिद्वार के नेतृत्व में पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित किया गया। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए आसमान से लेकर जमीन तक निगरानी रखी गई। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भी तैनात रहे।

डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता और खुफिया एजेंसियां अलर्ट

कार्यक्रम स्थल और वीवीआईपी मार्गों पर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते ने पहले से ही सघन जांच अभियान चलाया। खुफिया एजेंसियों को भी अलर्ट पर रखा गया था, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके।

प्रशासन की ओर से साफ संदेश दिया गया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भी कड़ी निगरानी रखी गई, ताकि अफवाह फैलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन की सख्त चेतावनी, श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि पूरे हरिद्वार को हाईअलर्ट पर रखा गया है। आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था जनहित में है और इसमें सहयोग करने से ही कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न हो सकेगा।

धार्मिक आस्था और सुरक्षा का संतुलन बना उदाहरण

हरिद्वार में यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देता नजर आया कि धार्मिक आस्था और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था साथ-साथ चल सकती हैं। जहां एक ओर संत सम्मेलन और प्राण-प्रतिष्ठा से आध्यात्मिक वातावरण बना, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सख्ती ने सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया।

कुल मिलाकर, हरिद्वार में शुक्रवार का दिन आस्था, अनुशासन और अलर्ट प्रशासन का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

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