ग्रीन सेस को लेकर परिवहन विभाग तैयार,, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगेगा तय शुल्क, RFID और कैमरों से होगी निगरानी,, पर्यावरण संरक्षण के साथ ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रखने पर सरकार का फोकस

इन्तजार रजा हरिद्वार- ग्रीन सेस को लेकर परिवहन विभाग तैयार,,
बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगेगा तय शुल्क, RFID और कैमरों से होगी निगरानी,,
पर्यावरण संरक्षण के साथ ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रखने पर सरकार का फोकस
पर्यावरण संरक्षण और प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार का ग्रीन सेस लागू करने का फैसला अब धरातल पर उतरने को तैयार है। दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर स्थित नारसन बॉर्डर को इस योजना के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यह बॉर्डर उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चेकपोस्ट माना जाता है, जहां से रोजाना हजारों की संख्या में कार, ट्रक, डंपर और भारी वाहन गुजरते हैं।
ग्रीन सेस के तहत अब उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों को निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। इसका उद्देश्य न केवल पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई करना है, बल्कि सड़कों के रखरखाव और यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाना भी है।
RFID और कैमरों से होगा ऑटोमैटिक सेस कलेक्शन
परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसी की ओर से नारसन बॉर्डर पर अत्याधुनिक तकनीक का सेटअप किया गया है। यहां RFID रीडर, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम इंस्टॉल किए गए हैं। इनकी मदद से वाहन की पहचान होते ही ग्रीन सेस की प्रक्रिया अपने आप पूरी हो सकेगी।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सिस्टम की टेस्टिंग लगातार की जा रही है। सॉफ्टवेयर के रिस्पॉन्स टाइम, डेटा कलेक्शन और भुगतान प्रक्रिया को परखा जा रहा है ताकि जब सेस की कटौती शुरू हो, तो किसी भी वाहन चालक को अनावश्यक परेशानी न हो। खासतौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि बॉर्डर पर लंबी कतारें न लगें और यातायात सुचारू बना रहे।
फास्टैग और डिजिटल माध्यम से होगा भुगतान
ग्रीन सेस का भुगतान पूरी तरह डिजिटल रखा गया है। अधिकांश वाहनों के लिए फास्टैग के माध्यम से सेस की कटौती की जाएगी, जबकि अन्य डिजिटल विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
परिवहन विभाग का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से नकद लेन-देन की जरूरत खत्म होगी और राजस्व सीधे सरकारी खाते में पहुंचेगा। साथ ही, इससे किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश भी कम हो जाएगी।
पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अहम कदम
उत्तराखंड जैसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में बाहरी वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक बड़ी चुनौती रहा है। भारी वाहनों के कारण सड़कों पर दबाव बढ़ता है, प्रदूषण फैलता है और रखरखाव की लागत भी अधिक होती है। ग्रीन सेस के जरिए सरकार इस अतिरिक्त बोझ की भरपाई करना चाहती है।
सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुधार, यातायात प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय लोगों को बेहतर सड़कें और सुरक्षित यातायात व्यवस्था मिलेगी।
अधिकारियों की निगरानी, कर्मचारियों को दिए गए निर्देश
नारसन बॉर्डर पर तैनात परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद हैं। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में जाम न लगे और वाहन चालकों के साथ शालीन व्यवहार किया जाए। शुरुआती दिनों में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती भी की जा रही है ताकि सिस्टम को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
कृष्ण चंद्र टलरिया, एआरटीओ, रुड़की
“नारसन बॉर्डर पर ग्रीन सेस को लेकर सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। RFID और कैमरा सिस्टम की टेस्टिंग चल रही है, ताकि वाहन चालकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। हमारा प्रयास है कि फास्टैग और डिजिटल भुगतान के जरिए सेस की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी रहे। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।”
वाहन चालकों से सहयोग की अपील
परिवहन विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने फास्टैग को सक्रिय रखें और डिजिटल भुगतान के नियमों का पालन करें। शुरुआती दिनों में थोड़ी बहुत तकनीकी प्रक्रिया को समझने में समय लग सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य लंबे समय में सभी के लिए सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नारसन बॉर्डर पर ग्रीन सेस की तैयारी उत्तराखंड सरकार की उस नीति को दर्शाती है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जा रहा है। अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटल भुगतान और प्रशासनिक निगरानी के साथ यह व्यवस्था न केवल राजस्व बढ़ाएगी, बल्कि राज्य की सड़कों और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।



