महिला सशक्तिकरण की नई रसोई,, सीडीओ हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल से क्लाउड किचन प्रशिक्षण की शुरुआत,, डीपीएम संजय सक्सेना के मार्गदर्शन में 25 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठोस पहल
जनपद हरिद्वार में महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की शुरुआत की गई है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र के नेतृत्व और जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) संजय सक्सेना के समन्वय से क्लाउड किचन प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। ग्रामीण व्यवसाय इन्क्यूबेटर सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन सीडीओ डॉ. मिश्र ने दीप प्रज्वलन कर किया।

इन्तजार रजा हरिद्वार- महिला सशक्तिकरण की नई रसोई,,
सीडीओ हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल से क्लाउड किचन प्रशिक्षण की शुरुआत,,
डीपीएम संजय सक्सेना के मार्गदर्शन में 25 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठोस पहल
जनपद हरिद्वार में महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की शुरुआत की गई है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र के नेतृत्व और जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) संजय सक्सेना के समन्वय से क्लाउड किचन प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। ग्रामीण व्यवसाय इन्क्यूबेटर सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन सीडीओ डॉ. मिश्र ने दीप प्रज्वलन कर किया।
उत्तराखंड राज्य की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर जनपद की 25 महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विशेष रूप से चयनित कर क्लाउड किचन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि हरिद्वार उत्तराखंड का पहला ऐसा जनपद बन गया है, जहां महिलाओं को क्लाउड किचन मॉडल पर संगठित, व्यावसायिक और संरचित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र की सोच: जरूरत को अवसर में बदलने का प्रयास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीओ हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि हरिद्वार एक प्रमुख औद्योगिक जनपद है, जहां सिडकुल सहित कई औद्योगिक क्षेत्र स्थित हैं। यहां बड़ी संख्या में कामगार विभिन्न कंपनियों में कार्यरत हैं, जिन्हें प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण और घर जैसा भोजन उपलब्ध होना एक बड़ी चुनौती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए क्लाउड किचन की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं पारंपरिक रूप से खाना बनाने में दक्ष होती हैं। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिल जाए तो वे अपने घर से ही कम लागत में सफल व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। क्लाउड किचन मॉडल महिलाओं के लिए सुरक्षित, व्यावहारिक और लाभकारी स्वरोज़गार का माध्यम बन सकता है।
सीडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत महिलाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ऋण सुविधा, फूड लाइसेंस और व्यवसाय से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कराई जाएंगी। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और शुद्धता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यही किसी भी खाद्य व्यवसाय की सबसे बड़ी पहचान होती है।
डीपीएम संजय सक्सेना की भूमिका: प्रशिक्षण से लेकर स्थायी रोजगार तक
जिला परियोजना प्रबंधक आजीविका मिशन (डीपीएम) संजय सक्सेना ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने की एक ठोस योजना है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्वरोज़गार प्रशिक्षण संस्थान और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें मास्टर ट्रेनर रचित द्वारा महिलाओं को क्लाउड किचन के तकनीकी, व्यावसायिक और प्रबंधन संबंधी सभी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
संजय सक्सेना ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को बाजार से जोड़ने, ऑर्डर प्राप्त करने और व्यवसाय को निरंतर चलाने में भी विभागीय स्तर पर सहयोग किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि महिलाएं प्रशिक्षण के बाद आत्मविश्वास के साथ अपना क्लाउड किचन शुरू कर सकें और नियमित आय अर्जित कर सकें।
बैंकों और प्रशासन का भरोसा
कार्यक्रम में उपस्थित एलडीएम दिनेश गुप्ता ने कहा कि सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र के निर्देशन में महिलाओं को स्वरोज़गार से जोड़ने के लिए बैंक पूरी तरह सहयोग करेंगे। महिलाओं को जैसे ही ऋण की आवश्यकता होगी, उसे प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत किया जाएगा ताकि उनका व्यवसाय समय पर शुरू हो सके।
सहायक परियोजना निदेशक डीआरडीए नलिनीत घिल्डियाल ने भी इस पहल को महिलाओं की आर्थिकी मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर बताया और कहा कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य ब्लॉकों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
महिला प्रशिक्षुओं में दिखा नया आत्मविश्वास
मंजू, महिला प्रशिक्षु, ब्लॉक बहादराबाद
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। बहादराबाद ब्लॉक की महिला प्रशिक्षु मंजू ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं केवल घर तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब वे भी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आय में योगदान दे सकेंगी।
अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाया कार्यक्रम का महत्व
कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला निदेशक शिव कुमार सिंह, डीपीएम संजय सक्सेना, जिला परियोजना प्रबंधक (आरआईपी) संजय सक्सेना, आचार्य दीप्ति भट्ट, मास्टर ट्रेनर रचित सहित अनेक अधिकारी, कर्मचारी और महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं मौजूद रहीं।
कुल मिलाकर, सीडीओ हरिद्वार डॉ. ललित नारायण मिश्र की दूरदर्शी सोच और डीपीएम संजय सक्सेना के प्रभावी क्रियान्वयन से शुरू हुई यह क्लाउड किचन पहल हरिद्वार की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है। यह योजना न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बनेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी।



