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वायरल वीडियो से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल,, भाजपा नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप, उर्मिला सनावर को कानूनी नोटिस,, नोटिस में तीन दिन का अल्टीमेटम, नहीं हटे वीडियो तो दर्ज होगा मुकदमा चेतावनी

इन्तजार रजा हरिद्वार- वायरल वीडियो से उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल,,

भाजपा नेताओं की छवि धूमिल करने का आरोप, उर्मिला सनावर को कानूनी नोटिस,,

नोटिस में तीन दिन का अल्टीमेटम, नहीं हटे वीडियो तो दर्ज होगा मुकदमा चेतावनी 

हरिद्वार/देहरादून।
उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर सोशल मीडिया के ज़रिये गरमा गई है। फिल्म एक्टर उर्मिला सनावर द्वारा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लगातार वायरल किए जा रहे वीडियो अब कानूनी दायरे में आ गए हैं। हरिद्वार के अधिवक्ता कमल भदोरिया ने उर्मिला सनावर को एक सख़्त कानूनी नोटिस भेजते हुए आरोप लगाया है कि उनके द्वारा वायरल किए गए वीडियो और ऑडियो ने न सिर्फ़ समाज में भ्रम और उन्माद की स्थिति पैदा की है, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की जान तक को ख़तरे में डाल दिया है।

वायरल ऑडियो पर बड़ा सवाल—ना अभियुक्त, ना गवाह, फिर क्यों फैलाया गया भ्रम?

कानूनी नोटिस में विशेष रूप से उस वायरल ऑडियो का ज़िक्र किया गया है, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम और भाजपा उत्तराखंड के संगठन मंत्री अजय कुमार के नाम लिए गए हैं। नोटिस के अनुसार, जिस ऑडियो को उर्मिला सनावर ने अपने वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक किया, उसमें शामिल व्यक्ति न तो अंकित भंडारी हत्याकांड के अभियुक्त हैं, न गवाह और न ही मामले से किसी भी प्रकार से संबंधित हैं।

इसके बावजूद, कथित आपसी बातचीत को ऑडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे समाज में नफ़रत, आक्रोश और भाईचारे को तोड़ने वाला माहौल बन गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इस वायरल सामग्री के कारण उत्तराखंड की जनता में इतना गुस्सा फैल गया कि दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के विरुद्ध मारपीट और हत्या तक की धमकियां दी जाने लगीं।

“ऑडियो एक माह पुरानी थी, तो उसी दिन प्रशासन को क्यों नहीं दी?”

कमल भदोरिया एडवोकेट ने नोटिस में उर्मिला सनावर से कई तीखे सवाल पूछे हैं। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि उर्मिला ने स्वयं अपने वीडियो में यह कहा कि संबंधित ऑडियो एक माह पुरानी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि—

  • यदि ऑडियो गंभीर थी, तो उसे उसी दिन प्रशासन या जांच एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया?
  • किस कारण से जानबूझकर सूचना को रोका गया?
  • क्यों न कभी विवेचक के समक्ष उपस्थित होकर कोई बयान दर्ज कराया गया?

नोटिस में यह भी रेखांकित किया गया है कि उर्मिला सनावर का नाम न तो केस डायरी में दर्ज है और न ही उन्होंने अब तक कोई ऐसा तथ्य सार्वजनिक किया है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया गया हो।

आपसी रंजिश में भाजपा को बदनाम करने का आरोप

कानूनी नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह पूरा प्रकरण उर्मिला सनावर और ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के बीच की आपसी बातचीत और व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम है। नोटिस के अनुसार, आपसी बातों और सुनी-सुनाई अफ़वाहों को भाजपा के शीर्ष नेताओं से जोड़कर जानबूझकर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।

भाजपा नेताओं के सामाजिक कार्यों का हवाला

नोटिस में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के सामाजिक और संगठनात्मक योगदान का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि—

  • कोरोना काल में दोनों नेताओं ने पीड़ित मरीजों की यथासंभव मदद की
  • गरीब कन्याओं के विवाह, बच्चों की शिक्षा और न्याय से वंचित लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
  • दुष्यंत गौतम राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में अहम जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं
  • अजय कुमार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में संगठन को मज़बूत करने का कार्य किया

नोटिस में यह भी कहा गया है कि इन नेताओं से न केवल अधिवक्ता कमल भदोरिया, बल्कि उत्तराखंड की बड़ी आबादी भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई है, और उनकी छवि को धूमिल करना जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।

वायरल वीडियो से जान का ख़तरा, गाड़ी रोककर अनर्थ का प्रयास

नोटिस में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वायरल वीडियो के बाद कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े कुछ लोग खुलेआम दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के खिलाफ हिंसा की बातें कर रहे हैं। हाल ही में उनकी गाड़ी को रोककर अनर्थ करने का प्रयास भी किया गया, जिसे सीधे तौर पर वायरल वीडियो से जोड़ा गया है।

तीन दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो कोर्ट का रास्ता

कमल भदोरिया एडवोकेट ने नोटिस के माध्यम से उर्मिला सनावर को तीन दिन का समय दिया है। इस अवधि में—

  • सभी आपत्तिजनक वीडियो फेसबुक, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने
  • इसकी लिखित सूचना कार्यालय में देने
  • और यह स्पष्ट करने कि क्यों न उनके विरुद्ध मानसिक आघात और सामाजिक तनाव फैलाने के आरोप में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाए

यदि तय समयसीमा में नोटिस का पालन नहीं किया गया, तो सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की स्पष्ट चेतावनी भी नोटिस में दी गई है।

सोशल मीडिया बनाम कानून—अब होगा फैसला

यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में बिना प्रमाण और अधिकार के किसी की छवि को धूमिल किया जा सकता है? या अब कानून ऐसे मामलों में सख़्ती से जवाब देगा?
फ़िलहाल, उर्मिला सनावर की प्रतिक्रिया और नोटिस का जवाब ही तय करेगा कि यह विवाद सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा या अदालत की चौखट तक पहुंचेगा।

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