शिक्षा विभाग के ‘होनहार’ अधिकारी पर विजिलेंस का शिकंजा,, RTE फीस प्रतिपूर्ति के बिल पास कराने के नाम पर मांगी रिश्वत,, डोईवाला में उप शिक्षा अधिकारी और सहयोगी 1 लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

इन्तजार रजा हरिद्वार- शिक्षा विभाग के ‘होनहार’ अधिकारी पर विजिलेंस का शिकंजा,,
RTE फीस प्रतिपूर्ति के बिल पास कराने के नाम पर मांगी रिश्वत,,
डोईवाला में उप शिक्षा अधिकारी और सहयोगी 1 लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के बिल पास कराने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद विजिलेंस ने जाल बिछाया और उप शिक्षा अधिकारी तथा उनकी सहयोगी को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
RTE के नाम पर रिश्वत का खेल उजागर
मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब छात्रों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाती है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को शिक्षा विभाग में बिल प्रस्तुत करना होता है। इन्हीं बिलों को पास कराने के नाम पर अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत सतर्कता विभाग को प्राप्त हुई थी।
शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को बताया कि डोईवाला क्षेत्र में उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात धनवीर सिंह बिष्ट और उनकी सहयोगी पुष्पांजलि RTE फीस प्रतिपूर्ति के बिल पास कराने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत में यह भी बताया गया कि बिना पैसे दिए बिल पास नहीं किए जा रहे थे।
इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सतर्कता विभाग ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाने पर विजिलेंस सेक्टर देहरादून की ट्रैप टीम को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विजिलेंस टीम ने बिछाया जाल, रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
जांच पूरी होने के बाद सतर्कता विभाग ने 1 अप्रैल को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। शिकायतकर्ता को तय रकम लेकर आरोपियों के पास भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की राशि आरोपियों को दी, पहले से तैनात विजिलेंस टीम ने तुरंत छापा मारकर दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार ट्रैप के दौरान उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला धनवीर सिंह बिष्ट और उनकी सहयोगी पुष्पांजलि को शिकायतकर्ता से 1,00,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की पूरी रकम मौके से बरामद कर ली गई।
कार्रवाई के दौरान विजिलेंस टीम ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक साक्ष्य भी जुटाए। दोनों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिस विभाग पर बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वहीं के अधिकारी अगर रिश्वतखोरी में लिप्त पाए जाएं तो यह पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करता है।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो नागरिक तुरंत इसकी शिकायत सतर्कता विभाग से कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर गोपनीय तरीके से जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार जैसी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का अवसर देने के लिए बनाई गई हैं। लेकिन जब इन्हीं योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार घुसपैठ कर जाता है तो इसका सीधा नुकसान उन बच्चों को होता है जिनके लिए यह योजनाएं बनाई गई हैं।
भ्रष्टाचार पर लगातार कसता शिकंजा
पिछले कुछ समय से उत्तराखंड में विजिलेंस विभाग लगातार भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई कर रहा है। सरकारी विभागों में रिश्वत लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई बढ़ने से यह स्पष्ट संकेत दिया जा रहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डोईवाला में हुई यह कार्रवाई भी इसी मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रिश्वतखोरी कैसे पनप रही है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद विभाग के भीतर क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं और क्या ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी बढ़ाई जाती है।



