चरित्र हनन की साजिश पर दुष्यंत गौतम का ‘विस्फोटक’ प्रहार,, अंकिता भंडारी प्रकरण की आड़ में झूठा प्रचार करने वालों पर FIR,, पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर पर मुकदमा, विपक्ष भी निशाने पर, ‘साजिश को हवा देने’ का आरोप,, हरिद्वार से देहरादून तक सियासी उबाल

इन्तजार रजा हरिद्वार- चरित्र हनन की साजिश पर दुष्यंत गौतम का ‘विस्फोटक’ प्रहार,,
अंकिता भंडारी प्रकरण की आड़ में झूठा प्रचार करने वालों पर FIR,,
पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर पर मुकदमा,
विपक्ष भी निशाने पर, ‘साजिश को हवा देने’ का आरोप,,
हरिद्वार से देहरादून तक सियासी उबाल

उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से चल रहे अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भ्रामक प्रचार और कथित ऑडियो–वीडियो के ज़रिये चरित्र हनन की कोशिश अब कानूनी शिकंजे में फंसती दिख रही है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है और सीधे तौर पर इसके सूत्रधारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को देहरादून के थाना डालनवाला में दर्ज मुकदमे ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। इस FIR में पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर को नामजद किया गया है। साथ ही आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई है।
मुकदमा दर्ज, IT एक्ट की सख्त धाराएं लागू
दुष्यंत गौतम की शिकायत पर दर्ज FIR में आईटी एक्ट की धारा 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी), 66E (निजता का उल्लंघन) और BNS की कई गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं। शिकायत में साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी, भ्रामक और छेड़छाड़ किए गए ऑडियो–वीडियो वायरल कर एक सार्वजनिक जीवन जीने वाले नेता की छवि को जानबूझकर धूमिल करने की कोशिश की गई।
भाजपा प्रदेश प्रभारी का आरोप है कि यह पूरा मामला राजनीतिक लाभ और सोची-समझी बदनाम करने की मुहिम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अंकिता भंडारी प्रकरण की संवेदनशीलता का दुरुपयोग कर भ्रम फैलाना है।
विपक्ष भी निशाने पर, ‘साजिश को हवा देने’ का आरोप
दुष्यंत गौतम ने अपनी शिकायत में सिर्फ आरोपियों तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी इस कथित साजिश को हवा देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ राजनीतिक दल बिना तथ्यों की जांच किए, सोशल मीडिया के जरिए झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे थे।
गौतम ने दो टूक कहा—
“47 साल की बेदाग सार्वजनिक और राजनीतिक ज़िंदगी को बदनाम करने की कोशिश की गई। झूठ के पैर नहीं होते, और अब कानून अपना काम करेगा।”
हरिद्वार से देहरादून तक सियासी उबाल
आरोप सामने आने के बाद 04 जनवरी 2026 को हरिद्वार में माहौल गरमा गया। साधु–संतों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दुष्यंत गौतम के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे हिंदू समाज और भाजपा नेतृत्व को बदनाम करने की साजिश बताते हुए उर्मिला सनावर और सुरेश राठौड़ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसके अगले ही दिन 05 जनवरी 2026 की सुबह दुष्यंत गौतम खुद देहरादून पहुंचे और पुलिस को विस्तृत शिकायत सौंपी। शाम होते-होते FIR दर्ज हो गई, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
ऑडियो–वीडियो की फॉरेंसिक जांच शुरू
पुलिस ने वायरल ऑडियो–वीडियो क्लिप को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि क्लिप के साथ डिजिटल छेड़छाड़ या AI-जेनरेटेड तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि वायरल ऑडियो AI से तैयार किया गया है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, उर्मिला सनावर को लेकर पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
अंकिता भंडारी प्रकरण: फिर क्यों उठा ‘VIP’ का मुद्दा?
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के वनन्तरा रिजॉर्ट में अंकिता भंडारी की हत्या के बाद जांच के दौरान एक कथित ‘VIP’ का मुद्दा उछाला गया था। उस समय भी इस नाम को लेकर राजनीति चरम पर रही थी। हालांकि जांच एजेंसियों ने कई बार साफ किया कि मामले में जो भी तथ्य हैं, वे चार्जशीट में दर्ज हैं।
अब एक बार फिर उसी प्रकरण की आड़ में कथित ऑडियो–वीडियो वायरल कर नया विवाद खड़ा किया गया, जिसे भाजपा नेतृत्व सीधे तौर पर राजनीतिक षड्यंत्र बता रहा है।
साफ संदेश: ‘झूठ के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में यह साफ कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अफवाह और चरित्र हनन को लेकर अब सख्त रुख अपनाया जाएगा। दुष्यंत गौतम ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह इस मामले को अंजाम तक पहुंचाएंगे, चाहे इसके तार कितनी भी ऊंची सियासत से क्यों न जुड़ें।
अब निगाहें पुलिस की जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। एक बात तय है—
उत्तराखंड की सियासत में यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े सियासी भूचाल का कारण बन सकता है।



