घटिया कानून देश को खोखला कर रहे हैं : भदोरिया अधिवक्ताओं का मुख्यमंत्री को पत्र,, फर्जी दस्तावेज़ बनाने पर नागरिकता समाप्त, संपत्ति ज़ब्त और आजीवन कारावास की मांग,, फर्जी अफवाहों से राजनीतिक छवि धूमिल करने के मामलों में भी कड़े कानून की जरूरत,, मुख्यमंत्री से गंभीरता से विचार करने की अपील

इन्तजार रजा हरिद्वार- घटिया कानून देश को खोखला कर रहे हैं : भदोरिया अधिवक्ताओं का मुख्यमंत्री को पत्र,,
फर्जी दस्तावेज़ बनाने पर नागरिकता समाप्त, संपत्ति ज़ब्त और आजीवन कारावास की मांग,,
फर्जी अफवाहों से राजनीतिक छवि धूमिल करने के मामलों में भी कड़े कानून की जरूरत,,
मुख्यमंत्री से गंभीरता से विचार करने की अपील

हरिद्वार। देश में लगातार बढ़ते फर्जी दस्तावेज़ों, झूठी अफवाहों और मनगढ़ंत आरोपों को लेकर हरिद्वार के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण भदोरिया एडवोकेट एवं कमल भदोरिया एडवोकेट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत पत्र भेजकर कठोर कानून बनाने की जनहित में मांग की है। पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि कमजोर और लचीले कानून किसी भी राष्ट्र को धीरे-धीरे समाप्त कर देते हैं, जबकि कठोर कानून व्यवस्था देश को मजबूत बनाती है।
पत्र में अधिवक्ताओं ने जापान, अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में फर्जी दस्तावेज़ बनाना लगभग असंभव है और यदि कोई ऐसा अपराध करता भी है तो कड़ी से कड़ी सजा तय है। इसी कारण वहां कानून का भय बना रहता है और व्यवस्था मजबूत है। इसके विपरीत भारत में कानूनों की ढिलाई के कारण फर्जी आधार कार्ड, फर्जी राशन कार्ड, फर्जी वोटर लिस्ट, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, फर्जी वाहन दस्तावेज़ और फर्जी भूमि दस्तावेज़ बेहद आसानी से तैयार हो जाते हैं।
अधिवक्ताओं ने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि ₹2000 में आधार कार्ड, ₹1000 में राशन कार्ड और ₹2000 में ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज़ बन जाना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। उनका कहना है कि दस्तावेज़ बनाने वालों और बनवाने वालों — दोनों के खिलाफ कठोर दंड का अभाव इस पूरे तंत्र को बढ़ावा दे रहा है।
नागरिकता समाप्ति और संपत्ति ज़ब्ती जैसी सख्त सजा की मांग
अरुण भदोरिया और कमल भदोरिया एडवोकेट ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि फर्जी दस्तावेज़ों से जुड़े अपराधों में केवल जुर्माना या हल्की सजा नहीं, बल्कि
- नागरिकता समाप्त,
- संपत्ति ज़ब्त,
- और आजीवन कारावास
जैसी सख्त सजा का प्रावधान किया जाए।
उनका कहना है कि जब तक सजा का भय नहीं होगा, तब तक न तो फर्जी दस्तावेज़ बनना रुकेगा और न ही बाहरी लोग देश में आकर फर्जी पहचान के सहारे बसने से रुकेंगे।
फर्जी अफवाहों और झूठे ब्यानों से छवि धूमिल करने का मुद्दा भी उठाया
पत्र में अधिवक्ताओं ने एक फिल्म एक्टर द्वारा स्वयं को प्रचारित करने के लिए फर्जी व सुनी-सुनाई बातों के आधार पर बयानबाजी का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि बिना ठोस प्रमाणों के दिए गए ऐसे बयान राजनीतिक और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे न केवल व्यक्ति बल्कि संस्थाएं और राजनीतिक दल भी बदनाम होते हैं।
पत्र में कहा गया है कि एक मृतक युवती के नाम पर राजनीति कर अपने नाम को चमकाने और लाभ कमाने जैसी प्रवृत्तियां बेहद खतरनाक हैं। इससे निर्दोष लोगों को आम जनता की नजरों में अपराधी बना दिया जाता है, जो कानून और न्याय की भावना के खिलाफ है।
राज्य स्तर पर विशेष कठोर कानून की मांग
अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उत्तराखंड में
- फर्जी दस्तावेज़ बनाना,
- फर्जी अफवाह फैलाना,
- झूठे बयान देकर किसी की सामाजिक-राजनीतिक छवि खराब करना

जैसे मामलों के लिए राज्य स्तर पर विशेष और कठोर कानून बनाया जाए। साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को तत्काल कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य किया जाए।
मुख्यमंत्री से गंभीरता से विचार करने की अपील
पत्र के अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपेक्षा जताई गई है कि वे इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दे के रूप में देखें और कठोर निर्णय लें। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि फर्जी दस्तावेज़ और फर्जी अफवाहों पर सख्ती से लगाम लगती है, तो न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक विश्वास भी कायम रहेगा।
फिलहाल यह पत्र कानून व्यवस्था पर बहस को फिर से तेज करने वाला माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर कितनी गंभीरता से कदम उठाती है, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर देश की सुरक्षा, लोकतंत्र और कानून के सम्मान से जुड़ा है।



