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अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की एंट्री,, दिल्ली में दर्ज हुआ पहला केस, ‘अज्ञात VIP’ की तलाश में उत्तराखंड पहुंची टीम,, सरेश- उर्मिला प्रकरण वायरल ऑडियो–वीडियो से फिर सुलगा था मामला, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी तपिश

इन्तजार रजा हरिद्वार- अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की एंट्री,,

दिल्ली में दर्ज हुआ पहला केस, ‘अज्ञात VIP’ की तलाश में उत्तराखंड पहुंची टीम,,

सरेश- उर्मिला प्रकरण वायरल ऑडियो–वीडियो से फिर सुलगा था मामला, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी तपिश

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। लगभग साढ़े तीन साल पुराने इस सनसनीखेज मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पहली बार औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है। CBI ने दिल्ली स्थित CBI थाना SC-2 में मुकदमा पंजीकृत करते हुए जांच की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। केस दर्ज होने के साथ ही CBI की विशेष टीम देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है और सबूतों की नए सिरे से पड़ताल शुरू कर दी गई है।

CBI की जांच का केंद्र इस बार केवल सजा पाए तीन दोषी नहीं, बल्कि वह ‘अज्ञात VIP’ है, जिसका नाम बीते दिनों वायरल ऑडियो और वीडियो के जरिए सामने आया था। यही VIP अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।

वनंत्रा रिजॉर्ट से शुरू हुई थी दर्दनाक कहानी

सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, उसका मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता इस जघन्य अपराध में शामिल थे। तीनों को बाद में गिरफ्तार किया गया और सत्र न्यायालय ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

हालांकि, सजा के बावजूद अंकिता के परिजनों और आम जनता के मन में एक सवाल लगातार बना रहा—
👉 क्या इस हत्या के पीछे कोई और भी ताकतवर चेहरा था?

वायरल ऑडियो ने फिर खोल दिया ‘VIP’ का अध्याय

मामला एक बार फिर तब गरमा गया जब ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के ऑडियो–वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन क्लिप्स में हत्या से जुड़े एक VIP का जिक्र किया गया, जिससे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया।

इन वायरल सामग्री के बाद यह आरोप जोर पकड़ने लगे कि जांच के दौरान एक प्रभावशाली व्यक्ति को बचाया गया और पूरी सच्चाई सामने नहीं आने दी गई। यही कारण रहा कि प्रदेशभर में CBI जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए।

जनदबाव के आगे झुकी सरकार, CM धामी की सिफारिश

लगातार बढ़ते जनदबाव और सड़कों पर उतरते आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले की CBI जांच की संस्तुति की। इसके बाद केंद्र से अनुमति मिलने पर CBI ने अब औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, CBI टीम पुराने केस डायरी, कॉल डिटेल्स, डिजिटल साक्ष्य और वायरल ऑडियो–वीडियो की फॉरेंसिक जांच पर विशेष ध्यान दे रही है। साथ ही उन अधिकारियों और गवाहों से भी पूछताछ की तैयारी है, जो पहले की जांच का हिस्सा रहे थे।

2027 चुनाव से पहले सियासी तापमान हाई

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंकिता भंडारी मामला एक बार फिर राजनीतिक हथियार बनता दिख रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस, यूकेडी और वामपंथी दलों ने सरकार पर तीखे हमले तेज कर दिए हैं।

विपक्ष का आरोप है कि—

  • राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है
  • प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच प्रभावित की गई
  • कई संगीन मामलों में उत्तराखंड पुलिस पर लापरवाही के आरोप हैं

इन दलों का कहना है कि यदि CBI निष्पक्ष जांच करती है, तो कई “बड़े नाम” सामने आ सकते हैं।

अब सबकी निगाहें CBI पर

CBI की एंट्री के बाद एक बार फिर उम्मीद जगी है कि— ✔️ अज्ञात VIP की पहचान होगी
✔️ जांच में किसी भी दबाव को जगह नहीं मिलेगी
✔️ अंकिता और उसके परिजनों को पूरा न्याय मिलेगा

प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि CBI अपनी जांच में कितनी गहराई तक जाती है और क्या वह उस VIP तक पहुंच पाती है, जिसका नाम लंबे समय से पर्दे के पीछे बताया जा रहा है।

अंकिता भंडारी की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की कसौटी बन चुकी है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दोषी कौन है, बल्कि यह है कि क्या सिस्टम सच में पीड़ित के साथ खड़ा होगा?

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