अपराधअलर्टअवैध कब्जाइन्वेस्टिगेशनउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंऑपरेशन कालनेमिखुलासागबनघोटालाधर्म और आस्थानिलंबितनोटिस जारीपॉलिटिकल तड़काप्रतिबंधितप्रशासन

दरगाह पिरान कलियर की संपत्ति संसाधनों पर अवैध कब्जों के जाल का खेल कन्नी काट गए जिम्मेदार अफ़सर,, नए सीईओ से थी उम्मीद, पर कार्रवाई में दिखी सुस्ती,,  सर्वे शुरू हुआ, लेकिन क्या वाकई हटेंगे अतिक्रमण या फिर चलेगा दिखावा? बाहरी लोगों का कब्जा, दरगाह के संसाधनों की खुली लूट,, अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल ? बाहरी लोगों की नियुक्ति को लेकर दरगाह कार्यालय से क्यों हो गया पत्र जारी 

इन्तजार रजा हरिद्वार- दरगाह पिरान कलियर की संपत्ति संसाधनों पर अवैध कब्जों के जाल का खेल कन्नी काट गए जिम्मेदार अफ़सर,,

नए सीईओ से थी उम्मीद, पर कार्रवाई में दिखी सुस्ती,, 

सर्वे शुरू हुआ, लेकिन क्या वाकई हटेंगे अतिक्रमण या फिर चलेगा दिखावा?

बाहरी लोगों का कब्जा, दरगाह के संसाधनों की खुली लूट,,

अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल ? बाहरी लोगों की नियुक्ति को लेकर दरगाह कार्यालय से क्यों हो गया पत्र जारी 

विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक की पवित्र ज़मीन आज अवैध कब्जों, मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही की शिकार बनती जा रही है। दरगाह की संपत्ति पर वर्षों से बाहरी लोगों द्वारा कब्जा कर न सिर्फ दुकानें और ढांचे खड़े कर लिए गए हैं, बल्कि दरगाह के बिजली और पानी का खुलेआम दुरुपयोग भी किया जा रहा है। इसका सीधा बोझ दरगाह के राजस्व और व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि दरगाह प्रशासन अब तक इन अवैध कब्जों को हटाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

दरगाह में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मोहम्मद आरिफ की नियुक्ति के बाद आम जायरीनों और स्थानीय लोगों को यह उम्मीद जगी थी कि वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं पर अब सख्त कार्रवाई होगी। शुरुआत में सीईओ साहब ने दरगाह क्षेत्र का निरीक्षण भी किया, लेकिन निरीक्षण के बाद भी अवैध कब्जों पर कोई ठोस एक्शन न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

दरगाह परिसर की संपत्ति संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा, दरगाह के संसाधनों की खुली लूट

स्थानीय लोगों का आरोप है कि दरगाह की संपत्ति पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग कब्जा जमाए बैठे हैं, जिनका दरगाह से कोई वैध संबंध नहीं है। ये लोग बिना अनुमति के अस्थाई दुकानों और ढांचों के जरिए व्यापार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन दुकानों में दरगाह की बिजली और पानी का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसका भुगतान दरगाह प्रशासन को ही करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इन अवैध कब्जों को नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और बदतर हो सकते हैं। जायरीनों की आवाजाही पहले ही संकरी गलियों और बेतरतीब दुकानों के कारण प्रभावित हो रही है। भीड़ के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि किसी आपात स्थिति में बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

सर्वे शुरू, लेकिन नतीजों पर संदेह

वक्फ बोर्ड के निर्देश पर दरगाह क्षेत्र में अस्थाई दुकानों का सर्वे जरूर शुरू किया गया है। सर्वे के दौरान दुकानदारों का नाम, पिता का नाम और दुकान की स्थिति दर्ज की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि सर्वे पूरा होने के बाद दुकानों को व्यवस्थित किया जाएगा और अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई होगी।

लेकिन स्थानीय लोगों को इस सर्वे के नतीजों पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि इससे पहले भी कई बार ऐसे सर्वे और अभियान चलाए गए, लेकिन वे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए। आज भी वही पुराने कब्जेदार जस के तस जमे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सर्वे वाकई अतिक्रमण हटाने के लिए है या फिर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।

 अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी उठे सवाल ? बाहरी लोगों की नियुक्ति को लेकर दरगाह कार्यालय से क्यों हो गया पत्र जारी 

दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल सिर्फ अतिक्रमण तक सीमित नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, क्या  दरगाह में ऐसे अस्थाई रूप के कर्मचारियों के नाम पर भी रिकॉर्ड मौजूद हैं जिनका अब इंतकाल हो चुका है, जबकि वे कभी स्थाई कर्मचारी थे ही नहीं। इसके बावजूद उनकी जगह नए अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जब पत्र दरगाह कार्यालय से जारी किए जाते हैं, तो संदेह और गहरा जाता है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर दरगाह प्रशासन पारदर्शिता से काम कर रहा है, तो उसे कर्मचारियों की नियुक्ति और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने चाहिए। इससे यह साफ हो सकेगा कि दरगाह की संपत्ति और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।

नए सीईओ से थी उम्मीद, अब बढ़ रही निराशा

नए सीईओ मोहम्मद आरिफ से लोगों को खासी उम्मीदें थीं। माना जा रहा था कि वे सख्त फैसले लेकर दरगाह की बिगड़ी व्यवस्था को पटरी पर लाएंगे। लेकिन अब तक की कार्रवाई को देखकर कई लोग यह कहने लगे हैं कि सीईओ साहब ने भी अवैध कब्जों के मामले में आंखें मूंद ली हैं।

हालांकि प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि सर्वे के बाद सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन ज़मीन पर अभी तक कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया है। यही वजह है कि आम जायरीन और स्थानीय निवासी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अब सवाल साफ है: कार्रवाई होगी या सिर्फ दिखावा?

दरगाह साबिर पाक सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल पर अवैध कब्जे और संसाधनों की लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अगर वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रशासन वास्तव में गंभीर है, तो सर्वे के बाद बिना भेदभाव के कार्रवाई करनी होगी।

अब देखना यह है कि यह अभियान इतिहास के पन्नों में एक और अधूरी कोशिश बनकर रह जाता है या फिर पहली बार अवैध कब्जेदारों पर सच में गाज गिरती है। फिलहाल दरगाह के संसाधनों पर जारी यह “लूट का खेल” प्रशासन की नीयत और क्षमता – दोनों की कड़ी परीक्षा ले रहा है।

Related Articles

Back to top button