मिशन ज्ञान गंगा: डिजिटल शिक्षा की नई धारा,, समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन ने की सराहना,, विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और परिणामों में दिख रहा सकारात्मक बदलाव

इन्तजार रजा हरिद्वार- मिशन ज्ञान गंगा: डिजिटल शिक्षा की नई धारा,,
समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन ने की सराहना,,
विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और परिणामों में दिख रहा सकारात्मक बदलाव

रुडकी/हरिद्वार।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कठिन विषयों की सरल, सुलभ और प्रभावी पढ़ाई उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित “मिशन ज्ञान गंगा” लगातार शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर रहा है। इसी कड़ी में आज आयोजित समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने इस अभिनव डिजिटल शैक्षिक पहल की खुले दिल से सराहना की और इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक परिवर्तनकारी शैक्षिक मॉडल बताया।
समीक्षा बैठक में मिशन के अंतर्गत तैयार किए जा रहे विषय–आधारित डिजिटल वीडियो कंटेंट, उसकी पहुँच, उपयोगिता और विद्यार्थियों पर पड़ रहे प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि यह पहल न केवल परीक्षा–उन्मुख है, बल्कि विद्यार्थियों में अवधारणात्मक समझ, आत्मविश्वास और निरंतर अध्ययन की आदत विकसित कर रही है।
“डिजिटल शिक्षा समय की आवश्यकता” — डीएम मयूर दीक्षित
समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि मिशन ज्ञान गंगा विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री को सहज रूप से उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा—
“डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कठिन विषयों को सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत करना आज के समय की आवश्यकता है। मिशन ज्ञान गंगा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ा रहा है और उनकी परीक्षा तैयारी को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बना रहा है। सामूहिक सहभागिता से यह अभियान और भी व्यापक रूप लेगा।”
डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन इस तरह की नवाचारपूर्ण पहलों को हरसंभव सहयोग देगा, ताकि शिक्षा को हर विद्यार्थी तक समान रूप से पहुँचाया जा सके।
“यह केवल परीक्षा नहीं, समझ का मिशन है” — सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने मिशन ज्ञान गंगा को एक दूरदर्शी शैक्षिक पहल बताते हुए कहा कि यह प्रयास केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की मौलिक समझ और सोच विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा—
“व्हाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक पेज और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए शैक्षिक वीडियो का प्रसार यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर विद्यार्थी तक ज्ञान समान रूप से पहुँचे। इस मिशन से जुड़े शिक्षक और स्वयंसेवी टीम की प्रतिबद्धता वास्तव में प्रशंसनीय है।”
सीडीओ ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के सही उपयोग से शिक्षा को आधुनिक, रुचिकर और परिणामकारी बनाया जा सकता है, जिसका जीवंत उदाहरण मिशन ज्ञान गंगा है।
डायट रुड़की की भूमिका, स्थानीय संदर्भों से जुड़ा कंटेंट
डायट रुड़की के प्राचार्य मेराज अहमद ने बैठक में जानकारी दी कि मिशन के तहत गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे विषयों के जटिल अध्यायों को विशेष रूप से चुना गया है।
उन्होंने बताया—
“विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंटेंट तैयार किया जा रहा है। स्थानीय संदर्भ, दृश्य–श्रव्य प्रस्तुति और सरल व्याख्या के माध्यम से अध्यायों को रोचक बनाया जा रहा है। शुरुआती प्रतिक्रियाएँ अत्यंत उत्साहजनक हैं।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि मिशन ज्ञान गंगा जमीनी स्तर पर प्रभाव डाल रहा है।
स्वयंसेवी शिक्षकों के प्रयासों की खुलकर सराहना
समीक्षा बैठक में मिशन से स्वयंसेवी रूप से जुड़े शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों और सहयोगी टीम के प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की गई। अधिकारियों ने माना कि बिना किसी आर्थिक लाभ के शिक्षा के लिए किया गया यह सामूहिक प्रयास समाज के प्रति जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि डिजिटल कंटेंट के नियमित उपयोग से विद्यार्थियों में विषय की पकड़ मजबूत हुई है और परीक्षा को लेकर पहले जो डर या भ्रम था, उसमें उल्लेखनीय कमी आई है।
यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर्स से सहयोग की अपील
जिला प्रशासन ने जनपद के सभी शिक्षकों, शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों एवं यूट्यूबर कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की कि वे कक्षा–आधारित, उपयोगी और पाठ्यक्रम–अनुकूल शैक्षिक वीडियो तैयार कर डायट रुड़की को उपलब्ध कराएं, ताकि मिशन को और व्यापक बनाया जा सके।
अधिकारियों ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों और डिजिटल नवाचार के माध्यम से मिशन ज्ञान गंगा शिक्षा को अधिक समावेशी, रोचक और परिणामकारी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।



