दरगाह साबिर दरबार में जिम्मेदारी पर सवाल,, दानपात्र गबन के आरोपी सुपरवाइजर को सौंपी गई व्यवस्था, दोस्ती निभा रहे साहब,, पहले ही दिन दरगाह साबिर दरबार मेन गेट की चाबी गुम, छैनी-हथौड़े से ताले तोड़ने पड़े

इन्तजार रजा हरिद्वार- दरगाह साबिर दरबार में जिम्मेदारी पर सवाल,,
दानपात्र गबन के आरोपी सुपरवाइजर को सौंपी गई व्यवस्था, दोस्ती निभा रहे साहब,,
पहले ही दिन दरगाह साबिर दरबार मेन गेट की चाबी गुम, छैनी-हथौड़े से ताले तोड़ने पड़े
पिरान कलियर/हरिद्वार। विश्वप्रसिद्ध एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। दरगाह के दानपात्र से कथित चोरी के आरोपी रहे एक सुपरवाइजर को वक्फ बोर्ड के सीईओ द्वारा दरगाह में होने वाले समस्त कार्यों की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद सवालों का तूफान खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह रही कि नई जिम्मेदारी संभालने के पहले ही दिन दरगाह के मुख्य द्वार की चाबी गुम हो गई और गेट के ताले छैनी-हथौड़े से तोड़कर खोले गए।
पहले दिन ही बड़ा कांड, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह जब दरगाह के मेन गेट को खोलने का समय हुआ तो संबंधित सुपरवाइजर चाबी प्रस्तुत नहीं कर पाया। काफी तलाश के बाद भी जब चाबी नहीं मिली तो कर्मचारियों ने मजबूरन छैनी-हथौड़े से ताले तोड़कर गेट खोला।, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
दरगाह जैसी संवेदनशील धार्मिक स्थल पर इस प्रकार की लापरवाही को गंभीर सुरक्षा चूक माना जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आरोपी पर पहले से दानपात्र गबन के आरोप रहे हैं तो उसे इतनी अहम जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई?
दानपात्र गबन कांड की फाइल बंद, मेहरबानी क्यों?
सूत्रों के मुताबिक संबंधित सुपरवाइजर पर पूर्व में दानपात्र से धनराशि गबन करने के आरोप लगे थे। मामला चर्चा में आने के बाद जांच शुरू हुई, लेकिन बाद में फाइल बंद कर दी गई। अब उसी व्यक्ति को दरगाह के समस्त कार्यों—दान व्यवस्था, सफाई, सुरक्षा समन्वय और प्रशासनिक देखरेख—की जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय खिदमतगारों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यह निर्णय पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। लोगों का आरोप है कि “दोस्ती निभाने” के तहत यह नियुक्ति की गई है। हालांकि बोर्ड प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
श्रद्धालुओं में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग
दरगाह साबिर दरबार देश-विदेश से आने वाले हजारों अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दानपात्र से जुड़े आरोपों वाले व्यक्ति को प्रमुख जिम्मेदारी देना और पहले ही दिन चाबी गुम होने जैसी घटना से श्रद्धालुओं का भरोसा डगमगाया है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि दानपात्र गबन प्रकरण की फाइल दोबारा खोली जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दरगाह की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि बोर्ड प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है। क्या दानपात्र गबन मामले की सच्चाई सामने आएगी या यह प्रकरण भी अन्य विवादों की तरह समय के साथ दब जाएगा? फिलहाल दरगाह परिसर में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और जवाबदेही की मांग तेज होती जा रही है।



