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आगामी कांवड़ मेला-2026 पर सरकार का मेगा प्लान!,, 21.38 करोड़ रुपये के बजट से दिव्य-भव्य आयोजन की तैयारी, 18.53 करोड़ हरिद्वार के लिए प्रस्तावित; प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दिए निर्देश,, हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा, ड्रोन-सीसीटीवी निगरानी, वाटर व हेली एम्बुलेंस, ट्रैफिक का मास्टर प्लान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता; चारधाम यात्रा के रिकॉर्ड को बताया सफल मॉडल,,

आगामी कांवड़ मेला-2026 पर सरकार का मेगा प्लान!,,

21.38 करोड़ रुपये के बजट से दिव्य-भव्य आयोजन की तैयारी, 18.53 करोड़ हरिद्वार के लिए प्रस्तावित; प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दिए निर्देश,,

हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा, ड्रोन-सीसीटीवी निगरानी, वाटर व हेली एम्बुलेंस, ट्रैफिक का मास्टर प्लान और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता; चारधाम यात्रा के रिकॉर्ड को बताया सफल मॉडल,,

इन्तजार रजा हरिद्वार… आगामी कांवड़ मेला-2026 को देश का सबसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भव्य धार्मिक आयोजन बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को हरिद्वार के सीसीआर सभागार में प्रभारी मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मंडल आयुक्त, जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर तैयारियों का व्यापक आकलन किया। बैठक में सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आपदा प्रबंधन, पार्किंग, श्रद्धालुओं की सुविधा और बजट के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

प्रभारी मंत्री ने स्पष्ट कहा कि 30 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पूरी प्रतिबद्धता के साथ सफल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हरिद्वार आने वाला प्रत्येक शिवभक्त सुरक्षित वातावरण में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचे और किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या लापरवाही देखने को न मिले।

बैठक में बताया गया कि हरिद्वार जनपद के लिए 18 करोड़ 53 लाख 61 हजार रुपये की धनराशि की मांग की गई है, जबकि कुल 21 करोड़ 38 लाख 46 हजार रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस बजट से सड़क मरम्मत, बैरिकेडिंग, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, अस्थायी शौचालय, चिकित्सा शिविर, पार्किंग, नियंत्रण कक्ष, प्रकाश व्यवस्था, सफाई, सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत बजट का उपयोग पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ समयबद्ध ढंग से किया जाए।सतपाल महाराज ने कहा कि इस बार सड़क चौड़ीकरण और एलिवेटेड ट्रैक बनने से ट्रैफिक संचालन पहले की तुलना में अधिक सुगम होगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भीड़ प्रबंधन के लिए पहले से डायवर्जन प्लान लागू किया जाए और आम नागरिकों को भी अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रियों और स्थानीय लोगों दोनों की सुविधा प्रशासन की समान जिम्मेदारी है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार इस बार किसी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे कांवड़ मार्ग, गंगा घाटों और संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और कंट्रोल रूम के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग की जाएगी। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, क्विक रिस्पांस टीम, आपदा राहत दल और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय को भी अंतिम रूप दिया गया है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस बार विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्गों पर पर्याप्त चिकित्सा शिविर, डॉक्टर, एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्र और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही वाटर एम्बुलेंस की व्यवस्था नहर क्षेत्र में की जाएगी, जबकि गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए हेली एम्बुलेंस का भी प्रावधान रखा गया है। अस्पतालों में अतिरिक्त बेड, आपात चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में श्रद्धालुओं के स्वागत को लेकर भी विशेष योजना बनाई गई। प्रभारी मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की ‘अतिथि देवो भव:’ की परंपरा के अनुरूप इस बार शिवभक्तों का हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है और उन्हें बेहतर अनुभव देना प्रशासन का लक्ष्य होना चाहिए।

परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पार्किंग स्थलों, ट्रैफिक डायवर्जन, भारी वाहनों की आवाजाही, आपातकालीन मार्गों और भीड़ नियंत्रण की सभी व्यवस्थाओं का पहले से ड्राई रन किया जाए। उन्होंने कहा कि मेला शुरू होने से पहले हर विभाग अपनी तैयारियों का परीक्षण कर ले, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने विभागवार प्रस्तुतिकरण देते हुए बताया कि सड़क, सफाई, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शौचालय, पार्किंग, कंट्रोल रूम और अन्य व्यवस्थाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सभी विभागों को समयसीमा तय कर जिम्मेदारी सौंपी गई है तथा नियमित समीक्षा के माध्यम से कार्यों की निगरानी की जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर तथा पुलिस अधीक्षक (यातायात) निशा यादव ने सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, आधुनिक संचार व्यवस्था और विशेष निगरानी तंत्र के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई दल चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे।गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग एक टीम की तरह कार्य करें और जिन कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय ही कांवड़ मेले की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने चारधाम यात्रा की सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2 जुलाई 2026 तक चारधाम और हेमकुंड साहिब सहित 42 लाख 72 हजार 40 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इनमें यमुनोत्री में 6,30,567, गंगोत्री में 6,76,902, केदारनाथ में 13,81,307, बद्रीनाथ में 14,46,639 तथा हेमकुंड साहिब में 1,68,825 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के सफल संचालन से मिले अनुभव का पूरा लाभ कांवड़ मेले में भी उठाया जाएगा और इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

बैठक के अंत में सतपाल महाराज ने अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, ट्रैफिक प्रबंधन और सभी मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य कांवड़ मेला-2026 को ऐसा अनुकरणीय आयोजन बनाना है, जिसकी व्यवस्थाएं पूरे देश के लिए मिसाल बनें। सरकार चाहती है कि हरिद्वार आने वाला प्रत्येक शिवभक्त सुरक्षित, संतुष्ट और सुखद अनुभव के साथ अपने घर लौटे तथा उत्तराखंड की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और अतिथि सत्कार की छाप लेकर जाए।

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