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मानसून से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट का रिहर्सल!,, हरकी पैड़ी से भीमगौड़ा और श्यामपुर तक पांच जगह ‘आपदा’ का लाइव अभ्यास, मिनटों में सक्रिय हुआ पूरा प्रशासनिक तंत्र,, डीएम मयूर दीक्षित के नेतृत्व में एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन समेत सभी एजेंसियों ने दिखाई त्वरित कार्रवाई; मॉक ड्रिल में परखी गई राहत-बचाव की असली तैयारी

मानसून से पहले हरिद्वार में हाई अलर्ट का रिहर्सल!,,

हरकी पैड़ी से भीमगौड़ा और श्यामपुर तक पांच जगह ‘आपदा’ का लाइव अभ्यास, मिनटों में सक्रिय हुआ पूरा प्रशासनिक तंत्र,,

डीएम मयूर दीक्षित के नेतृत्व में एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन समेत सभी एजेंसियों ने दिखाई त्वरित कार्रवाई; मॉक ड्रिल में परखी गई राहत-बचाव की असली तैयारी

हरिद्वार, 2 जुलाई।
मानसून और आगामी कांवड़ यात्रा के मद्देनजर हरिद्वार जिला प्रशासन ने गुरुवार को ऐसा व्यापक आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल आयोजित किया, जिसने यह संदेश दिया कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या बड़े हादसे की स्थिति में पूरा प्रशासनिक तंत्र किस तरह कुछ ही मिनटों में सक्रिय होकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर सकता है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस अभ्यास में जनपद की तीन तहसीलों के पांच अलग-अलग स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन, रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त होने और श्रद्धालुओं के बहने जैसी काल्पनिक लेकिन संवेदनशील परिस्थितियां तैयार की गईं।

सुबह करीब 11 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को सबसे पहले सूचना मिली कि अत्यधिक वर्षा के कारण हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया है। अफरा-तफरी के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओवरब्रिज की ओर दौड़ पड़े और 15 से 20 श्रद्धालुओं के तेज बहाव में बहने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) तत्काल सक्रिय कर दिया गया।

इसके बाद दूसरी सूचना भीमगौड़ा रेलवे टनल के समीप रेलवे ट्रैक पर भारी चट्टानें गिरने की मिली। काल्पनिक परिदृश्य में रेलवे लाइन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त दिखाई गई, जिससे रेल यातायात बाधित हो गया। प्रशासन ने इसे भी अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल राहत एवं बचाव दलों को रवाना किया। इसी दौरान तीसरी सूचना श्यामपुर कांगड़ी से मिली, जहां भारी बारिश के कारण बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने का परिदृश्य बनाया गया।

इतना ही नहीं, लक्सर क्षेत्र के गंगदासपुर में तटबंध टूटने और शिवपुरी गांव में बाढ़ का पानी आबादी में घुसने जैसी परिस्थितियों को भी मॉक ड्रिल का हिस्सा बनाया गया। इन पांचों घटनाओं के माध्यम से प्रशासन ने यह परखा कि यदि एक ही समय में जिले के अलग-अलग हिस्सों में आपदा आती है तो विभिन्न विभाग किस तरह समन्वय स्थापित कर राहत कार्यों को अंजाम देते हैं।

जिलाधिकारी के निर्देश पर ऋषिकुल मैदान में स्टेजिंग एरिया बनाया गया, जहां से उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा के नेतृत्व में राहत एवं बचाव दलों को विभिन्न घटनास्थलों के लिए रवाना किया गया। एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, होमगार्ड, पीआरडी, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों ने अपने-अपने संसाधनों के साथ निर्धारित समय सीमा में घटनास्थलों पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किए।

हरकी पैड़ी में डूब रहे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने, भीमगौड़ा रेलवे टनल क्षेत्र में घायलों को प्राथमिक उपचार देने और बाढ़ प्रभावित गांवों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभ्यास किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान हरकी पैड़ी में 16 लोगों को सुरक्षित बचाने का प्रदर्शन किया गया, भीमगौड़ा रेलवे हादसे के काल्पनिक परिदृश्य में 9 घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया, जबकि शिवपुरी गांव में बढ़े जलस्तर के बीच फंसे 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का सफल अभ्यास किया गया।

पूरे अभ्यास के दौरान जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र लगातार सभी घटनास्थलों की निगरानी करता रहा। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पी.आर. चौहान ने जिला स्तर से राहत एवं बचाव कार्यों की कमान संभाली, जबकि संबंधित उप जिलाधिकारी इंसीडेंट कमांडर के रूप में मौके पर मौजूद रहे। प्रत्येक विभाग ने अपनी निर्धारित एसओपी के अनुसार कार्रवाई करते हुए यह प्रदर्शित किया कि वास्तविक आपदा आने पर किस प्रकार समन्वित ढंग से काम किया जाएगा।

मॉक ड्रिल के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कंट्रोल रूम में पूरे अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विभागों और एजेंसियों ने निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आपदा की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण त्वरित निर्णय, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग होता है। यदि यह व्यवस्था मजबूत रहे तो किसी भी बड़ी आपदा में जनहानि और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डीएम ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और राहत-बचाव दलों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के नियमित अभ्यास केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में प्रशासन की तैयारियों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में भी ऐसे अभ्यास लगातार किए जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य बिना किसी देरी के शुरू किए जा सकें।

मॉक ड्रिल में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सरिता पवार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर सहित एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, होमगार्ड, पीआरडी, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

मानसून के दौरान हरिद्वार में बाढ़, गंगा का बढ़ता जलस्तर, भूस्खलन और कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में गुरुवार को आयोजित यह व्यापक मॉक ड्रिल केवल अभ्यास भर नहीं रही, बल्कि इसने यह भरोसा भी दिलाया कि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में प्रशासनिक मशीनरी पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के लिए तैयार है।

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