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वन तस्करों के खिलाफ हरिद्वार वन विभाग का बड़ा एक्शन!, वन विभाग का ‘ऑपरेशन बाज’ शुरू!, 10 वर्षों का रिकॉर्ड खंगालकर तैयार हुई निगरानी सूची, अब आदतन वन अपराधियों की हर गतिविधि पर रहेगी पैनी नजर डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध बोले—’सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे तस्करी नेटवर्क पर होगा प्रहार’, आमजन से हेल्पलाइन 1926 पर सूचना देने की अपील

वन तस्करों के खिलाफ हरिद्वार वन विभाग का बड़ा एक्शन!,

वन विभाग का ‘ऑपरेशन बाज’ शुरू!,

10 वर्षों का रिकॉर्ड खंगालकर तैयार हुई निगरानी सूची, अब आदतन वन अपराधियों की हर गतिविधि पर रहेगी पैनी नजर

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध बोले—’सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे तस्करी नेटवर्क पर होगा प्रहार’, आमजन से हेल्पलाइन 1926 पर सूचना देने की अपील

इन्तजार रजा हरिद्वार.. हरिद्वार के जंगलों में अब वन तस्करों, वन्यजीव शिकारियों और अवैध कटान करने वालों के लिए बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। वन्यजीवों और वन संपदा की लगातार हो रही तस्करी तथा संगठित वन अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए हरिद्वार वन प्रभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए निगरानी आधारित नई रणनीति लागू कर दी है। अब वन विभाग केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदतन वन अपराधियों की गतिविधियों पर पहले से ही लगातार नजर रखेगा, ताकि किसी भी अवैध गतिविधि को समय रहते विफल किया जा सके।

हरिद्वार वन प्रभाग ने पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड का गहन अध्ययन कर वन्यजीव तस्करी, अवैध कटान और अन्य वन अपराधों में संलिप्त रहे आरोपितों की विस्तृत निगरानी सूची तैयार की है। विभाग ने ऐसे 12 से अधिक आदतन वन अपराधियों को चिह्नित किया है, जिनकी गतिविधियों, संपर्कों, संभावित ठिकानों और आवाजाही वाले क्षेत्रों पर अब विशेष निगरानी रखी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि अधिकांश मामलों में वही लोग बार-बार वन अपराधों में शामिल पाए जाते हैं, इसलिए केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से निगरानी करना अधिक प्रभावी रणनीति साबित होगी।

वन विभाग की नई रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब कार्रवाई किसी घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले शुरू होगी। पहले वन विभाग के पास आदतन वन अपराधियों की सतत निगरानी की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी। किसी वन्यजीव के शिकार, अवैध कटान या तस्करी की घटना सामने आने के बाद ही जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू होती थी। लेकिन अब संदिग्ध गतिविधियों पर पहले से नजर रखकर अपराध होने से पहले ही उसे रोकने का प्रयास किया जाएगा।

इसके लिए वन विभाग ने अपने फील्ड स्टाफ को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र और मुखबिर नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे वन अपराधों की जानकारी समय रहते विभाग तक पहुंच सके।

बाघ शावकों की हत्या बनी चेतावनी

वन विभाग की इस नई रणनीति के पीछे मई माह में श्यामपुर रेंज में हुई बाघ के दो शावकों की हत्या की घटना भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है। इस मामले में तस्करों ने जहरीला पदार्थ देकर दोनों शावकों की हत्या कर दी थी। वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन अब तक शावकों के पंजे बरामद नहीं हो सके हैं। जांच में आशंका जताई गई कि पंजों को वन्यजीव तस्करी के उद्देश्य से कहीं छिपा दिया गया।

इस घटना ने वन विभाग को यह सोचने पर मजबूर किया कि केवल गिरफ्तारी से वन अपराधों पर स्थायी रोक नहीं लगाई जा सकती। जब तक अपराधियों की गतिविधियों और उनके पूरे नेटवर्क पर लगातार नजर नहीं रखी जाएगी, तब तक ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।

‘गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क तोड़ना है लक्ष्य’ : डीएफओ

प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि वन विभाग अब वन अपराधियों की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी करेगा। केवल किसी आरोपी को जेल भेज देना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कई मामलों में वही लोग दोबारा सक्रिय होकर वन्यजीवों और वन संपदा को नुकसान पहुंचाते हैं।

उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता अब अपराधियों के पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे ध्वस्त करना है। इसके लिए तकनीकी निगरानी, स्थानीय सूचना तंत्र, फील्ड इंटेलिजेंस और पुराने रिकॉर्ड का समन्वित उपयोग किया जाएगा। इससे वन्यजीवों के शिकार, अवैध कटान और वन संपदा की तस्करी जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

जनता बनेगी वन विभाग की सबसे बड़ी ताकत

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध पेड़ कटान, वन्यजीव शिकार, वन तस्करी या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन चौकी, डीएफओ कार्यालय या वन विभाग की हेल्पलाइन 1926 पर दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जंगल और वन्यजीव केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा धरोहर हैं। यदि जनता सतर्क रहे और समय पर सूचना दे तो वन अपराधियों के लिए हरिद्वार में सक्रिय रहना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

वन तस्करों के लिए स्पष्ट संदेश

हरिद्वार वन प्रभाग की नई रणनीति वन अपराधियों के लिए साफ संदेश है कि अब जंगलों में उनकी हर गतिविधि पर विभाग की नजर रहेगी। पुराने रिकॉर्ड, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, मजबूत सूचना तंत्र और स्थानीय सहयोग के दम पर वन विभाग संगठित वन तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है।

वन विभाग का मानना है कि यह नई व्यवस्था केवल हरिद्वार ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण और वन संपदा की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकती है। अब वन तस्करों के खिलाफ कार्रवाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी हर गतिविधि पर ‘बाज़’ जैसी पैनी नजर रखी जाएगी।

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