जंगल की कहानी बच्चों की जुबानी! वन्यजीव सप्ताह के समापन पर चमकी नन्हीं प्रतिभाएं, चित्रों में दिखा प्रकृति प्रेम….. हाथी से तेंदुए तक और गंगा से जंगल तक—नन्हे कलाकारों ने रंगों में सजाया वन्यजीव संरक्षण का संदेश, DFO स्वप्निल अनिरुद्ध ने विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और पुरस्कार देकर किया सम्मानित
समापन समारोह में उप प्रभागीय वन अधिकारी पूनम कैथोला, ज्वाला प्रसाद, रेंजर शीशपाल सिंह, महेश शर्मा, विवेक जोशी, राजेश राठौर, ईशा सेठी, आरती पंत, विनीत पांडे, शैलजा और राहुल नेगी सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

जंगल की कहानी बच्चों की जुबानी! वन्यजीव सप्ताह के समापन पर चमकी नन्हीं प्रतिभाएं, चित्रों में दिखा प्रकृति प्रेम…..
हाथी से तेंदुए तक और गंगा से जंगल तक—नन्हे कलाकारों ने रंगों में सजाया वन्यजीव संरक्षण का संदेश, DFO स्वप्निल अनिरुद्ध ने विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और पुरस्कार देकर किया सम्मानित

हरिद्वार, 8 अक्टूबर। जंगल खामोश जरूर है, लेकिन उसकी कहानी आज हरिद्वार के नन्हे कलाकारों ने रंगों के जरिए बयां कर दी। कहीं कागज पर विशाल हाथी नजर आया तो कहीं तेंदुए की तस्वीर ने वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। किसी चित्र में बारहसिंगा और हिरण दिखाई दिए तो किसी में गंगा की अविरल धारा और हरियाली से घिरा जंगल नजर आया। रंगों और कल्पना से सजे इन चित्रों ने लोगों को प्रकृति के करीब ला दिया।
हिलबाई पास मार्ग स्थित प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में गुरुवार को वन्यजीव सप्ताह का भव्य समापन हुआ। समारोह में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश गूंजा। कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण वन्यजीव सप्ताह के तहत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता रही, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता में कक्षा छह से आठ तथा कक्षा नौ और दस के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग वर्ग बनाए गए थे। नन्हे कलाकारों ने अपनी कल्पनाओं को कागज पर उतारते हुए वन्यजीवों और प्रकृति की खूबसूरती को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। किसी ने जंगल को अपना कैनवास बनाया तो किसी ने वन्यजीवों के संरक्षण की पुकार को रंगों में ढाल दिया।
रंगों से निकली संरक्षण की पुकार, विजेताओं को मिला सम्मान
समापन समारोह में प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने चित्रकला प्रतियोगिता के सफल छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र, स्मृति चिह्न और नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पुरस्कार मिलते ही बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। अभिभावकों और शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।इस मौके पर DFO स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल एक सप्ताह तक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज और विशेषकर बच्चों के भीतर वन्यजीवों एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना है।
उन्होंने बताया कि वन्यजीव सप्ताह के दौरान चित्रकला प्रतियोगिता के अलावा जागरूकता रैली, विद्यार्थियों को संरक्षित वनों का भ्रमण और वन विभाग की कार्यप्रणाली से परिचित कराने जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण के बीच के रिश्ते को समझाने का प्रयास किया गया।
स्वप्निल अनिरुद्ध ने प्रतियोगिता में शामिल सभी विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की भागीदारी वन्यजीव संरक्षण के अभियान को नई ऊर्जा देती है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के पर्यावरण प्रहरी बनेंगे।
प्रकृति से जुड़ेंगे बच्चे, तभी सुरक्षित रहेगा जंगल
मुख्य अतिथि पार्षद सचिन कुमार और पार्षद निशा नौडियाल ने कहा कि बच्चों में वन्यजीव और पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाने का शानदार मंच भी प्रदान करती हैं।
ग्रीनमैन विजय पाल बघेल ने कहा कि वन्यजीव और पेड़-पौधे हमारी प्राकृतिक विरासत हैं। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। उन्होंने बच्चों से प्रकृति संरक्षण का संदेश अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
समारोह में विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों ने मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। चित्रों में वन्यजीवों के प्रति प्रेम, जंगलों की हरियाली, गंगा की निर्मलता और पर्यावरण बचाने की चिंता साफ दिखाई दी। बच्चों की कल्पना ने यह संदेश भी दिया कि यदि जंगल सुरक्षित रहेगा तो वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे तो पर्यावरण का संतुलन भी कायम रहेगा।
समापन समारोह में उप प्रभागीय वन अधिकारी पूनम कैथोला, ज्वाला प्रसाद, रेंजर शीशपाल सिंह, महेश शर्मा, विवेक जोशी, राजेश राठौर, ईशा सेठी, आरती पंत, विनीत पांडे, शैलजा और राहुल नेगी सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
वन्यजीव सप्ताह का यह समापन समारोह सिर्फ पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा। बच्चों के रंगों में सजे चित्रों ने एक बड़ा संदेश दिया—प्रकृति को बचाना है तो वन्यजीवों को बचाना होगा, और वन्यजीवों को बचाने की शुरुआत जागरूकता से होगी।



