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इक्कड़ कलां में सजा ‘न्याय का दरबार’! जनपद न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की हुंकार—अब गरीब की चौखट तक पहुंचेगा इंसाफ, DM-SSP की मौजूदगी में सिस्टम का मेगा एक्शन!….. कानून से लेकर इलाज तक, सरकारी योजनाओं से लेकर पेंशन और राशन कार्ड तक… एक ही मंच पर खुला मदद का मोर्चा! 60 दिन के महाअभियान से गांव-गांव पहुंचेगी कानूनी सहायता, जरूरतमंदों को उनके अधिकारों से जोड़ने का बड़ा संकल्प!

इक्कड़ कलां में सजा ‘न्याय का दरबार’! जनपद न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की हुंकार—अब गरीब की चौखट तक पहुंचेगा इंसाफ, DM-SSP की मौजूदगी में सिस्टम का मेगा एक्शन!…..

कानून से लेकर इलाज तक, सरकारी योजनाओं से लेकर पेंशन और राशन कार्ड तक… एक ही मंच पर खुला मदद का मोर्चा! 60 दिन के महाअभियान से गांव-गांव पहुंचेगी कानूनी सहायता, जरूरतमंदों को उनके अधिकारों से जोड़ने का बड़ा संकल्प!

 

हरिद्वार। तस्वीर बदली, अंदाज बदला और जनसेवा का मिशन सीधे गांव की चौखट तक पहुंच गया! कहीं न्याय के अधिकारों की गूंज, कहीं स्वास्थ्य जांच की सुविधा, कहीं सरकारी योजनाओं का रास्ता और कहीं पुलिस की हेल्पलाइन का सुरक्षा कवच। हरिद्वार के ग्राम इक्कड़ कलां में आयोजित विधिक जागरूकता एवं बहुउद्देशीय जनसहायता शिविर ने ग्रामीणों के बीच एक बड़ा संदेश दिया—अब जानकारी के अभाव में किसी का हक नहीं छूटना चाहिए और आर्थिक मजबूरी किसी को न्याय से दूर नहीं रखनी चाहिए!

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार ने 60-दिवसीय मेगा ड्राइव के प्रथम चरण के तहत इस शिविर का आयोजन किया। कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश नरेंद्र दत्त मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे, जबकि जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ और फिर शुरू हुआ अधिकारों, सुरक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण का संदेश देने का सिलसिला।

न्यायाधीश नरेंद्र दत्त का बड़ा संदेश—इंसाफ अब अंतिम व्यक्ति की चौखट तक!

शिविर का सबसे अहम संदेश जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र दत्त के संबोधन से सामने आया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना ही विधिक सेवा प्राधिकरण का संकल्प है।

उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र लोगों को मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और निर्धन वर्ग सहित पात्र व्यक्तियों को बताया गया कि वे किस प्रकार कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

नालसा की शिक्षा योजना-2026, स्पृहा (SPRUHA) योजना, मानव-वन्यजीव संघर्ष सहायता योजना, वीर परिवार सहायता योजना और बाल विवाह रोकथाम से जुड़ी ‘आशा’ (ASHA) एसओपी के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।संदेश बिल्कुल साफ था—कानून की जानकारी केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हर उस व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए जिसे इसकी जरूरत है।

DM मयूर दीक्षित का प्रशासनिक मोर्चा—जनता की परेशानी दूर करना प्राथमिकता!

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन प्रत्येक व्यक्ति की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी तथा जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रियाओं में सहायता उपलब्ध कराई।

राशन कार्ड, आधार कार्ड, श्रम कार्ड, पेंशन, विभिन्न प्रमाण-पत्र और परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने जैसी जरूरतों को लेकर ग्रामीणों को मार्गदर्शन दिया गया। पात्र लोगों के आवेदन भरवाने और आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में भी सहयोग किया गया।यानी जिस काम के लिए ग्रामीणों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, उसके लिए शिविर में एक ही स्थान पर संबंधित विभागों तक पहुंचने का अवसर मिला। हालांकि, अंतिम राहत का पैमाना आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण से तय होगा।

SSP नवनीत भुल्लर ने बताया—मुसीबत में कौन-सा नंबर बनेगा मददगार!

जनसुरक्षा के मोर्चे पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने लोगों को आपातकालीन पुलिस सहायता नंबर 112, महिला हेल्पलाइन 1090 और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी एवं साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता अपराधों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही मोटर वाहन अधिनियम, नए आपराधिक कानूनों और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की।शिविर में पुलिस का संदेश भी स्पष्ट रहा—किसी आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें और समय रहते सहायता प्राप्त करें।

बीमारी से बचाव का मोर्चा भी तैयार—जांच के साथ मुफ्त दवाइयां!

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह की देखरेख में सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया। ग्रामीणों की जांच की गई, निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं और मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए गए।

स्वास्थ्य, समाज कल्याण, राजस्व, पंचायती राज, शिक्षा और बाल विकास विभाग ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। मुख्य विकास अधिकारी/परियोजना निदेशक, जिला पूर्ति अधिकारी और खंड विकास अधिकारी बहादराबाद सहित संबंधित अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी देकर लोगों को लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई।परिवार न्यायालय रुड़की के न्यायाधीश बी.बी. पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि हरिद्वार जिले में न्यायिक अधिकारी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे न्यायपालिका के प्रति समाज का विश्वास मजबूत हुआ है।

60 दिन का मिशन—अब गांव-गांव होगी अधिकारों की दस्तक!

इस आयोजन की असली ताकत सिर्फ एक दिन का शिविर नहीं, बल्कि इसके पीछे शुरू किया गया 60-दिवसीय मेगा ड्राइव अभियान है। इसके तहत विलेज लीगल एड क्लीनिक और पराविधिक स्वयंसेवक (PLVs) घर-घर संपर्क स्थापित कर पात्र लोगों की पहचान करेंगे। उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर लाभ प्राप्त करने का रास्ता दिखाया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर ने अधिकारियों, विभागीय प्रतिनिधियों और ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।

अब नजर नतीजों पर—कितनों तक पहुंचेगा मदद का हाथ?

इक्कड़ कलां का शिविर एक दिन का आयोजन भर नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके अधिकारों से जोड़ने की कोशिश है। न्यायपालिका, प्रशासन, पुलिस और सरकारी विभागों की संयुक्त भागीदारी ने सहायता के कई रास्ते एक मंच पर उपलब्ध कराए।

लेकिन इस अभियान की असली सफलता तब सामने आएगी, जब पात्र लोगों के आवेदन समय पर निस्तारित होंगे, जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ मिलेगा और कानूनी सहायता के लिए भटकने वालों को सही मार्गदर्शन मिल सकेगा।

क्योंकि असली जीत मंच सजाने में नहीं, बल्कि उस जरूरतमंद के चेहरे पर राहत लाने में है, जिसकी वर्षों से अटकी समस्या का समाधान हो जाए। यही इक्कड़ कलां के इस जनसहायता अभियान की सबसे बड़ी कसौटी है।

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