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वायरल वीडियो पर घमासान! उर्मिला सनावर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग, एसएसपी हरिद्वार को सौंपा प्रार्थना पत्र…. सीबीआई कोर्ट देहरादून के बाहर दिए गए कथित बयानों पर उठे सवाल, भाजपा नेताओं और महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप; वीडियो के प्रसार पर रोक और फंडिंग की जांच की मांग

वायरल वीडियो पर घमासान! उर्मिला सनावर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग, एसएसपी हरिद्वार को सौंपा प्रार्थना पत्र….

सीबीआई कोर्ट देहरादून के बाहर दिए गए कथित बयानों पर उठे सवाल, भाजपा नेताओं और महिलाओं के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप; वीडियो के प्रसार पर रोक और फंडिंग की जांच की मांग

हरिद्वार। देहरादून स्थित सीबीआई न्यायालय के बाहर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर विवाद गहरा गया है। वीडियो में कथित तौर पर फिल्म अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, एक महिला और राज्य के एक राज्यपाल को लेकर दिए गए बयानों पर आपत्ति जताते हुए हरिद्वार के तीन लोगों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपा है। प्रार्थना पत्र में वीडियो के प्रसार पर तत्काल रोक लगाने, कथित बयानों की जांच कराने और उर्मिला सनावर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।

प्रार्थना पत्र देने वालों में जगजीतपुर निवासी अधिवक्ता अरुण भदौरिया, अधिवक्ता कमल भदौरिया और एलएलबी के अध्ययनरत छात्र चेतन भदौरिया शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में बिना किसी न्यायालय के आदेश अथवा प्रमाण के संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक व्यक्तिगत आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे न केवल संबंधित व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है, बल्कि उत्तराखंड की छवि को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के माध्यम से कथित तौर पर समाज में भ्रम, आक्रोश और वैमनस्य फैलने की आशंका है। ऐसे में वीडियो के प्रसारण को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि उर्मिला सनावर द्वारा मीडिया के कैमरों और माइक के सामने भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष, महिला आरती गौड़ और एक राज्य के राज्यपाल को लेकर कथित आपत्तिजनक बयान दिए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इन बयानों की निष्पक्ष जांच कर संबंधित तथ्यों को सामने लाने की मांग की है।

सरकार गिराने के कथित बयान और फंडिंग की जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि उर्मिला सनावर ने देहरादून में सीबीआई न्यायालय के बाहर वर्तमान सरकार को गिराने के प्रयास किए जाने संबंधी बयान दिया था।

इस बयान को लेकर शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि बयान दिलवाने वाले व्यक्ति और इस पूरे घटनाक्रम में कथित रूप से फंडिंग करने वाले लोगों की भी जांच की जाए। उनका कहना है कि वीडियो के पीछे किसी प्रकार की साजिश या दबाव बनाने की मंशा है या नहीं, इसकी जांच तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि भाजपा नेताओं पर कथित झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट हासिल करने की कथित मंशा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फिल्म अभिनेत्री होने के दावे की भी जांच की मांग

प्रार्थना पत्र में उर्मिला सनावर द्वारा स्वयं को फिल्म अभिनेत्री बताकर प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए यह भी मांग की गई है कि उनके द्वारा किसी फिल्म का निर्माण अथवा अभिनय किए जाने के संबंध में तथ्यों की जांच की जाए।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो के माध्यम से महिलाओं का अपमान करने और भाजपा नेताओं के विरुद्ध कथित आपत्तिजनक बयान प्रसारित करने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड को बताया संवेदनशील मामला

प्रार्थना पत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा है कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा मामले की जांच कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया तथा अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में पैरवी की गई। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त जेल में बंद हैं और संबंधित रिजॉर्ट को भी बंद कर दिया गया है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उर्मिला सनावर द्वारा पूर्व विधायक सुरेश राठौर को अपना पति बताने के आधार पर दोनों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद सामने आया। उनका कहना है कि कथित तौर पर आपसी संबंध खराब होने के बाद इस रिकॉर्डिंग के आधार पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध वीआईपी से संबंधित आरोप प्रसारित किए गए।

प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकरण की जांच वर्तमान में सीबीआई द्वारा भी की जा रही है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के नए आरोप अथवा रिकॉर्डिंग की जांच तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाए।

आरती गौड़ की निजता का मुद्दा भी उठाया

शिकायतकर्ताओं ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ के विरुद्ध देहरादून में दिए गए कथित अपमानजनक बयान पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार के बयान महिलाओं के सम्मान और निजता को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि कथित बयानों से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कोतवाली प्रभारी को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश देने की मांग

दिनांक 26 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वायरल वीडियो और उसमें दिए गए कथित बयानों की जांच कराई जाए। साथ ही वीडियो को प्रसारित करने वाले व्यक्तियों, कथित फंडिंग और बयान दिलवाने के पीछे की भूमिका की भी पड़ताल की जाए।

शिकायतकर्ताओं ने प्रभारी निरीक्षक कोतवाली कनखल को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पारित करने की मांग की है।

अब इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की सत्यता, उनकी पृष्ठभूमि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के कथन हैं। उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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