हरिद्वार में नाबालिग वाहन चालकों पर परिवहन विभाग का ‘एक्शन अटैक’! 50 से 60 वाहन मालिकों को नोटिस, तीन दिन में देना होगा जवाब….. स्कूलों के बाहर खड़ी बाइक-स्कूटी रडार पर, डीएम मयूर दीक्षित के निर्देश पर सिडकुल में चला विशेष चेकिंग अभियान; बच्चों को वाहन देने वाले अभिभावकों की भी बढ़ेंगी मुश्किलें!

हरिद्वार में नाबालिग वाहन चालकों पर परिवहन विभाग का ‘एक्शन अटैक’! 50 से 60 वाहन मालिकों को नोटिस, तीन दिन में देना होगा जवाब…..
स्कूलों के बाहर खड़ी बाइक-स्कूटी रडार पर, डीएम मयूर दीक्षित के निर्देश पर सिडकुल में चला विशेष चेकिंग अभियान; बच्चों को वाहन देने वाले अभिभावकों की भी बढ़ेंगी मुश्किलें!
धर्मनगरी हरिद्वार में अब नाबालिगों के हाथों में बाइक और स्कूटी थमाने वालों की खैर नहीं! सड़कों पर फर्राटा भरते नाबालिग वाहन चालकों पर शिकंजा कसने के लिए परिवहन विभाग ने एक्शन मोड में कदम बढ़ा दिए हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर गुरुवार, 22 अक्टूबर को विद्यालयों के आसपास विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया गया। सिडकुल क्षेत्र में बीएचईएल स्थित विद्यालयों के आसपास हुई इस कार्रवाई ने उन अभिभावकों और वाहन मालिकों की चिंता बढ़ा दी है, जो बच्चों को कम उम्र में ही दोपहिया वाहन चलाने की अनुमति दे देते हैं।
अभियान के दौरान संदिग्ध रूप से खड़ी बाइक और स्कूटी को जांच के दायरे में लिया गया। नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा इन वाहनों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका के आधार पर 50 से 60 वाहन स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब केवल चेतावनी देकर मामला खत्म नहीं होगा। वाहन किसने चलाया, चालक की उम्र क्या थी और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब मांगे जाएंगे।
स्कूलों के बाहर परिवहन विभाग की नजर, संदिग्ध बाइक-स्कूटी की जांच से मचा हड़कंप!
विद्यालयों के आसपास अक्सर कम उम्र के छात्र-छात्राओं को बाइक और स्कूटी से आते-जाते देखा जाता है। कई बार यही लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं की वजह बन सकती है। बच्चों की सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर परिवहन विभाग ने अब इस प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार शुरू किया है।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नेहा झा के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में विद्यालयों के आसपास की सड़कों, गलियों और पार्किंग स्थलों पर खड़े दोपहिया वाहनों की जांच की गई। अभियान में एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और परिवहन कर अधिकारी वरुणा सैनी भी मौजूद रहीं।
जांच के दौरान ऐसे वाहनों को चिह्नित किया गया, जिनका इस्तेमाल नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा किए जाने की आशंका थी। इसके बाद वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया। विभाग का उद्देश्य स्पष्ट है—स्कूल पहुंचने की जल्दबाजी में बच्चों की जिंदगी खतरे में डालने वाली लापरवाही पर लगाम लगाना।
तीन दिन में जवाब दो! वाहन मालिकों से पूछे जाएंगे सीधे सवाल
परिवहन विभाग की कार्रवाई का सबसे अहम हिस्सा नोटिस है। वाहन मालिकों को तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में पूछा गया है कि संबंधित वाहन विद्यालय के आसपास कौन लेकर आया था? वाहन चलाने वाले व्यक्ति की उम्र कितनी थी? क्या उसके पास संबंधित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस था? यदि वाहन किसी नाबालिग के इस्तेमाल में था, तो उसे वाहन किसने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया?
अब वाहन मालिकों के जवाब और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह अभियान उन अभिभावकों के लिए भी चेतावनी है, जो बच्चों की जिद के आगे झुककर उन्हें बाइक या स्कूटी की चाबी सौंप देते हैं। कुछ मिनट की सुविधा बच्चों और दूसरों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है।
अभिभावक सावधान! नाबालिग को वाहन देना पड़ सकता है भारी
परिवहन विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199A का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किशोर द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने की स्थिति में निर्धारित कानूनी शर्तों के अधीन अभिभावक या वाहन स्वामी की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
कानून में संबंधित परिस्थितियों में तीन वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, यह कार्रवाई मामले के तथ्यों और कानून में निर्धारित शर्तों के अनुसार होगी।
विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सामान्य मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाने के लिए न दें। विद्यार्थियों को स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन या अन्य सुरक्षित साधनों से विद्यालय भेजें। नियमों की अनदेखी न केवल कानूनी परेशानी बढ़ा सकती है, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी भी जोखिम में डाल सकती है।
स्कूल प्रबंधन भी रडार पर, पार्किंग और जागरूकता को लेकर सख्त निर्देश
परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों से कहा गया है कि नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा लाए जाने वाले मोटर वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराने से बचें और बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाकर आने वाले विद्यार्थियों की पहचान करें।
ऐसे मामलों में अभिभावकों को तत्काल सूचना देने और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों को सड़क सुरक्षा, वाहन चलाने की न्यूनतम वैधानिक आयु और बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाने के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।
डीएवी पब्लिक स्कूल, बीएचईएल के प्रिंसिपल अनुपम जग्गा ने भी बच्चों की सुरक्षा के लिए इस पहल का समर्थन किया। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्कूल, अभिभावक और विद्यार्थी—सभी की भागीदारी जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों की जिद में आकर उन्हें वाहन देने से बचना चाहिए।
निखिल शर्मा का संदेश—बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं!
एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा ने अभिभावकों से अपील की कि वे कम उम्र के बच्चों को दोपहिया वाहन चलाने की अनुमति न दें और उन्हें सुरक्षित साधनों से विद्यालय भेजें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान का मकसद केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
वहीं, एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा के नेतृत्व में शुरू हुई यह कार्रवाई आगे भी जारी रखने की बात कही गई है। विभाग के अनुसार, वाहन मालिकों के स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यही है—क्या स्कूलों के बाहर चल रहा यह अभियान नाबालिग वाहन चालकों की रफ्तार पर ब्रेक लगा पाएगा? फिलहाल परिवहन विभाग का संदेश साफ है: बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं चलेगा। नियम तोड़े तो जवाब भी देना होगा और कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।



