डीजीपी उत्तराखंड की हाई-लेवल क्राइम रिव्यू बैठक,, लापरवाह, भ्रष्ट और सिविल मामलों में दखल देने वाले पुलिसकर्मियों पर सख़्त एक्शन,, लैंड फ्रॉड, महिला अपराध और कानून व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस का ऐलान

इन्तजार रजा हरिद्वार 🔴 डीजीपी उत्तराखंड की हाई-लेवल क्राइम रिव्यू बैठक,,
लापरवाह, भ्रष्ट और सिविल मामलों में दखल देने वाले पुलिसकर्मियों पर सख़्त एक्शन,,
लैंड फ्रॉड, महिला अपराध और कानून व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस का ऐलान
देहरादून।
उत्तराखंड में अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था की मजबूती और पुलिस की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड श्री दीपम सेठ की अध्यक्षता में सरदार पटेल भवन स्थित सभागार में एक उच्च स्तरीय अपराध एवं कानून व्यवस्था समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अहम बैठक में पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ गढ़वाल व कुमाऊँ रेंज के प्रभारी, सभी जनपदों के पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ और विशेष इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में प्रदेश की वर्तमान अपराध स्थिति, संवेदनशील आपराधिक घटनाओं, महिला अपराध, लैंड फ्रॉड, लंबित विवेचनाओं और जनशिकायतों के निस्तारण की गहन समीक्षा की गई। डीजीपी ने साफ शब्दों में कहा कि अब लापरवाही, भ्रष्टाचार और अधिकारों के दुरुपयोग को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महिला अपराधों में लापरवाही पर तुरंत निलंबन, कड़ा संदेश
डीजीपी दीपम सेठ ने बैठक में हाल की गंभीर आपराधिक घटनाओं का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में किसी भी स्तर की शिथिलता सीधे कार्रवाई को न्योता देगी।
उन्होंने बताया कि जनपद देहरादून के ऋषिकेश क्षेत्र में महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में लापरवाही सामने आने पर एम्स चौकी प्रभारी उप निरीक्षक साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
इसी तरह कोतवाली नगर देहरादून में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी उप निरीक्षक प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित किया गया।
इन दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसपी क्राइम श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को जांच सौंपी गई है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि इन घटनाओं में शामिल अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की भी 07 दिवस के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाए।
डीजीपी ने दो टूक कहा—
“महिला अपराधों में संवेदनशीलता ही पुलिस की असली परीक्षा है। यहां कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
हरिद्वार गोलीकांड: लापरवाह हल्का प्रभारी सस्पेंड
जनपद हरिद्वार के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के अवसर पर दो पक्षों के बीच हुए संघर्ष और गोलीबारी की घटना को डीजीपी ने कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया। इस मामले में लापरवाही बरतने पर चुड़ियाला हल्का प्रभारी उप निरीक्षक सूरत शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक क्राइम, हरिद्वार श्री जितेन्द्र मेहरा को सौंपी गई है। साथ ही अन्य संबंधित पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच कर 07 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई साफ संकेत है कि भीड़, जातीय या सामाजिक आयोजनों के दौरान जरा सी चूक भी अब भारी पड़ेगी।
लैंड फ्रॉड मामलों पर बड़ा फैसला, सीओ जांच अनिवार्य
बैठक का सबसे अहम और दूरगामी असर डालने वाला फैसला भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) को लेकर सामने आया।
जनपद ऊधमसिंहनगर में सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण के संदर्भ में पुलिस अधिकारियों पर लगे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने बड़ा निर्देश जारी किया।
अब प्रदेश में हर लैंड फ्रॉड मामले में अनिवार्य रूप से क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर समयबद्ध जांच होगी।
सीओ को जांच के दौरान यह स्पष्ट करना होगा कि मामला सिविल प्रकृति का है या आपराधिक। इसके बाद ही कोई अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि
- सिविल मामलों में जबरन आपराधिक धाराएं लगाने
- या किसी पक्ष को लाभ पहुंचाने
जैसी शिकायतें अब सीधे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का आधार बनेंगी।
साथ ही लंबित भूमि मामलों की नियमित मॉनिटरिंग पुलिस मुख्यालय स्तर से की जाएगी, ताकि वर्षों से फंसे मामलों का निष्पक्ष समाधान हो सके।
सिविल मामलों में पुलिस की दखलअंदाजी पर डीजीपी साहब का सख़्त रुख

डीजीपी दीपम सेठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिविल विवादों में पुलिस का हस्तक्षेप कानून के दायरे से बाहर है।
जो भी पुलिसकर्मी सिविल मामलों में दबाव, समझौते या अवैध कार्रवाई में लिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून का पालन कराना है, किसी के निजी विवाद में हथियार बनना नहीं।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विजिलेंस को खुली छूट
माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए डीजीपी ने सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को निर्देश दिए कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिस कर्मियों को चिन्हित कर तेजी से कार्रवाई की जाए।
डीजीपी ने कहा कि
“वर्दी की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के लिए उत्तराखंड पुलिस में कोई जगह नहीं है।”
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, एकजुट संदेश
इस उच्च स्तरीय बैठक में पुलिस महकमे के लगभग सभी शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार
- एडीजी विजिलेंस/क्राइम एवं लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन
- एडीजी प्रशासन ए.पी. अंशुमान
- आईजी कुमाऊँ रिधिम अग्रवाल
- आईजी गढ़वाल सदानंद दाते
- आईजी क्राइम सुनील कुमार मीणा
- आईजी साइबर नीलेश आनंद भरणे
- एसपी स्तर के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
डीजीपी दीपम सेठ की यह समीक्षा बैठक सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि उत्तराखंड पुलिस के लिए स्पष्ट चेतावनी और नई कार्यसंस्कृति का ऐलान है।
लापरवाही, भ्रष्टाचार और कानून के दुरुपयोग पर सख़्ती—और ईमानदार, संवेदनशील पुलिसिंग को बढ़ावा—अब महज नारा नहीं, बल्कि कार्रवाई में बदलता दिख रहा है।



