BAMS डिग्री पर C-Section का सवाल! कोमल अल्फा नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद बिगड़ी महिला की हालत, हरिद्वार में बचाने के लिए करनी पड़ी बड़ी सर्जरी,, अब स्वास्थ्य विभाग की परीक्षा—लाइसेंस से लेकर BAMS के हास्पिटल और ऑपरेशन तक हो जांच,, पहले सामान्य डिलीवरी की बात, फिर C-Section! ऑपरेशन के बाद पेट में संक्रमण और मवाद का आरोप—अब स्वास्थ्य विभाग से पूछा जा रहा है, आखिर किस डॉक्टर ने कर दिया ऑपरेशन और किस अनुमति के तहत सिजेरियन ऑपरेशन डिलिवरी ?,, पीड़ित पति तस्लीम ने डीएम से की शिकायत लगाई गुहार—“मेरी पत्नी जिंदगी और मौत से जूझ रही है, आज मेरे साथ हुआ है, कल किसी और के साथ न हो”
“नर्सिंग होम के बोर्ड पर BAMS डॉक्टर का नाम, लेकिन महिला का C-Section किस डॉक्टर ने किया? ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक की विशेषज्ञ योग्यता क्या थी और नर्सिंग होम को C-Section की अनुमति किस आधार पर मिली?”

BAMS डिग्री पर C-Section का सवाल! कोमल अल्फा नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद बिगड़ी महिला की हालत, हरिद्वार में बचाने के लिए करनी पड़ी बड़ी सर्जरी,,
अब स्वास्थ्य विभाग की परीक्षा—लाइसेंस से लेकर BAMS के हास्पिटल और ऑपरेशन तक हो जांच,,
पहले सामान्य डिलीवरी की बात, फिर C-Section! ऑपरेशन के बाद पेट में संक्रमण और मवाद का आरोप—अब स्वास्थ्य विभाग से पूछा जा रहा है, आखिर किस डॉक्टर ने कर दिया ऑपरेशन और किस अनुमति के तहत सिजेरियन ऑपरेशन डिलिवरी ?,,
पीड़ित पति तस्लीम ने डीएम से की शिकायत लगाई गुहार—“मेरी पत्नी जिंदगी और मौत से जूझ रही है, आज मेरे साथ हुआ है, कल किसी और के साथ न हो”

रुड़की/हरिद्वार।
रुड़की के ईदगाह चौक स्थित कोमल अल्फा नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। रामपुर निवासी तस्लीम ने जिलाधिकारी हरिद्वार को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी फरजाना की डिलीवरी के दौरान किए गए ऑपरेशन के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। स्थिति इतनी गंभीर हुई कि उन्हें हरिद्वार लाकर इमरजेंसी में बड़ी सर्जरी करनी पड़ी।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब नर्सिंग होम के बाहर लगे बोर्ड पर BAMS योग्यता वाले चिकित्सक का नाम दिखाई देता है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर फरजाना का सीजेरियन ऑपरेशन किस डॉक्टर ने किया? डॉक्टर की विशेषज्ञ योग्यता क्या थी? और नर्सिंग होम को किस श्रेणी के उपचार एवं ऑपरेशन की अनुमति मिली हुई है?
16 अगस्त को भर्ती, 18 को ऑपरेशन—फिर शुरू हुआ मुसीबतों का सिलसिला
तस्लीम के मुताबिक उनकी पत्नी फरजाना को 16 अगस्त को डिलीवरी के लिए नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि शुरुआत में सामान्य प्रसव होने की बात कही गई, लेकिन दो दिन बाद ऑपरेशन करने की जानकारी दी गई।
इसके बाद 18 अगस्त को फरजाना का सीजेरियन ऑपरेशन किया गया। पीड़ित पति का दावा है कि ऑपरेशन के लिए बाहर से डॉक्टर बुलाया गया था।
ऑपरेशन के बाद महिला को अस्पताल में रखा गया और फिर घर भेज दिया गया। लेकिन घर पहुंचने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। दर्द और अन्य गंभीर परेशानियों के बाद परिजन उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे।
हालत बिगड़ी तो हरिद्वार लाए, जांच में संक्रमण का दावा
पीड़ित के अनुसार नर्सिंग होम में दोबारा भर्ती करने के बावजूद महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे हरिद्वार ले जाया गया।
तस्लीम का दावा है कि हरिद्वार में जांच के दौरान पेट के अंदर मवाद और गंभीर संक्रमण की जानकारी सामने आई। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों को तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा।
परिजनों का आरोप है कि महिला के अंदरूनी हिस्से में संक्रमण इतना गंभीर हो चुका था कि जान बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण अंदरूनी अंग को निकालने तक की नौबत आ गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर संक्रमण इतना गंभीर कैसे हुआ? ऑपरेशन के बाद मरीज की निगरानी और देखभाल में क्या हुआ? क्या समय रहते संक्रमण की पहचान हुई थी? इन सवालों का जवाब विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच से ही सामने आएगा।
BAMS डॉक्टर और C-Section पर सबसे बड़ा सवाल!
नर्सिंग होम के बाहर लगे बोर्ड में BAMS योग्यता वाले चिकित्सक का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाई देता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि:
क्या ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर BAMS था या कोई अलग विशेषज्ञ चिकित्सक?
यदि बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाया गया था तो उसका नाम, डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और ऑपरेशन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण सार्वजनिक जांच का हिस्सा होना चाहिए।
यही नहीं, नर्सिंग होम को किस प्रकार के उपचार और सर्जरी की अनुमति मिली हुई है, इसका रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए।
गरीब परिवार का आरोप—पहले भरोसा दिया, अब फोन तक नहीं उठा रहे
तस्लीम का आरोप है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें भरोसा दिया गया कि अस्पताल प्रबंधन उनके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन पत्नी की हालत गंभीर होने के बाद कथित तौर पर संबंधित लोगों ने फोन उठाना तक बंद कर दिया।
तस्लीम ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष मेडिकल जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी डॉक्टर या अस्पताल की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब स्वास्थ्य विभाग की परीक्षा—लाइसेंस से लेकर ऑपरेशन तक हो जांच
यह मामला केवल एक मरीज की शिकायत बनकर नहीं रहना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को जांच करनी चाहिए कि नर्सिंग होम का पंजीकरण किस श्रेणी में है, वहां किन-किन चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की अनुमति है, ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर कौन था और मरीज के इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड क्या कहते हैं।
एक महिला की जान पर बन आई, परिवार इलाज के खर्च के लिए परेशान है और अब ऑपरेशन की योग्यता से लेकर अस्पताल के लाइसेंस तक सवालों के घेरे में हैं।
तस्लीम की गुहार—“मुझे अपनी पत्नी के लिए इंसाफ चाहिए डीएम साहब से गुहार”
पीड़ित पति का कहना है कि उसकी पत्नी आज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। उसका कहना है कि अगर कहीं कोई लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कल किसी दूसरे परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
अब नजर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जांच पर है—क्या शिकायत पर निष्पक्ष जांच होगी या मामला सिर्फ कागजों में दबकर रह जाएगा?
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जांच किया जाना जनहित में जरुरी है
1. नर्सिंग होम का पंजीकरण प्रमाणपत्र
2. किस-किस चिकित्सा प्रक्रिया की अनुमति है
3. 18 अगस्त के C-Section का ऑपरेशन नोट
4. ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का नाम और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर
5. उसकी BAMS/MBBS/PG विशेषज्ञता की प्रमाणित जानकारी
6. एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टर की योग्यता
7. अस्पताल की प्रसूति एवं ऑपरेशन संबंधी अनुमति/मानक
बल्कि “ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की योग्यता और नर्सिंग होम की वैध अनुमति की जांच” होना चाहिए
नोट: ऑपरेशन किस डॉक्टर ने किया, उसकी योग्यता क्या थी और महिला की हालत बिगड़ने के लिए कौन जिम्मेदार है—ये सभी तथ्य आधिकारिक मेडिकल जांच के बाद ही निश्चित होंगे। नर्सिंग होम/संबंधित चिकित्सकों का पक्ष उपलब्ध होने पर खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा ,।



